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विडियो: जमीन समाधि में करवा चौथ, दिवाली और गोवर्द्धन पूजा, 1300 किसानों का अनूठा सत्याग्रह

सरकार ने किसानों द्वारा मुआवजा राशि स्वीकार ना करने पर पैसा कोर्ट में जमा करवा दिया है। इधर, किसानों के आंदोलन के कारण जमीन अधिग्रहण नहीं हो पा रहा है।
जयपुर के पास नींदड़ गांव के किसानों ने अनोखी दिवाली मनाई। जमीन समाधि में बैठी महिलाओं ने करवा चौथ से लेकर दिवाली और गोवर्द्धन पूजा इन्हीं गड्डों में बैठकर मनाया।

अंशिका सारदा

राजस्थान की राजधानी जयपुर के पास नींदड़ गांव के किसानों ने अनोखी दिवाली मनाई। जमीन समाधि में बैठी महिलाओं ने करवा चौथ से लेकर दिवाली और गोवर्द्धन पूजा इन्हीं गड्डों में बैठकर मनाया। बता दें कि 1350 से ज्यादा किसान सरकार के भूमि अधिग्रहण के विरोध में जमीन समाधि में पिछले 20 दिनों से बैठे हैं। उनका यह सत्याग्रह गांधी जयंती यानी दो अक्टूबर से लगातार जारी है। पिछले कुछ दिनों में इस सत्याग्रह ने खूब सुर्खियां बटोरी हैं। पुरुष ही नहीं बच्चे और महिलाएं भी गड्डे खोद कर उसमें गर्दन तक समाधि की अवस्था में बैठे हैं।

ये किसान जयपुर विकास प्राधिकरण की प्रस्तावित नींदड़ आवासीय योजना का विरोध कर रहे हैं। किसानों का आरोप है सरकार उनकी उपजाऊ जमीन को अधिगृहित कर रही है और बदले में मुआवजा भी बहुत कम दे रही है। किसान चाहते हैं कि भूमि अधिग्रहण 2013 के नियमों के अनुसार हो लेकिन सरकार बरसों पुराने नियम के तहत ही मुआवजा दे रही है। इस सत्याग्रह में किसानों को विपक्ष का पूरा समर्थन मिल रहा है।

कांग्रेस नेता नगेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि सरकार के लोग कहते हैं कि नींदड़ के किसान गड्डे खोद कर बैठे हैं, लेकिन सरकार के लोगों को पता होना चाहिए कि नींदड़ के किसान समाधि में बैठे हैं और समाधि जैसे पवित्र स्थल पर सत्याग्रह करते हुए इतनी ताकत पैदा कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में सरकार ने इनकी बात नहीं मानी तो सरकार को इनहीं गड्डों में दफन कर देंगे।

जयपुर के पास जमीन समाधि में ही किसानों ने करवा चौथ भी मनाया। व्रत के दौरान एक बुजुर्ग दंपत्ति की तस्वीर।

किसानों का कहना है कि अगर सरकार ने उनकी बात नहीं मानी तो वे इसी जमीन में खुद को दफन कर लेंगे। उधर, राजस्थान सरकार भी अपनी जिद पर अड़ी है। सरकार ने किसानों द्वारा मुआवजा राशि स्वीकार ना करने पर पैसा कोर्ट में जमा करवा दिया है। इधर, किसानों के आंदोलन के कारण जमीन अधिग्रहण नहीं हो पा रहा है। फिलहाल, राजस्थान सरकार के लिए ये आंदोलन एक बड़ी चुनौती बन चुका है। किसानों का कहना है कि जब तक सरकार और जयपुर विकास प्राधिकरण हमारी जमीन अधिग्रहण को निरस्त नहीं करेंगे तब तक ये आंदोलन जारी रहेगा।

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