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आॅपरेशन कक्ष में लड़ते रहे डॉक्टर, नवजात की जान गई

दोनों के बीच जमकर तू-तड़ाक और गाली गलौच होती रही। करीब आधे घंटे तक चली डॉक्टरों की इस लड़ाई में नवजात की जान चल गई।
Author जयपुर | August 31, 2017 00:39 am
राजस्थान: प्रेग्नेंट महिला के ऑपरेशन के वक्त दो डाक्टरों की आपस में लड़ाई हुई।

जोधपुर के उम्मेद अस्पताल में एक गर्भवती महिला के आॅपरेशन के दौरान दो डॉक्टर आपस में भिड़ गए। दोनों के बीच जमकर तू-तड़ाक और गाली गलौच होती रही। करीब आधे घंटे तक चली डॉक्टरों की इस लड़ाई में नवजात की जान चल गई। इसी बीच किसी ने इस घटना का वीडियो बना कर इसे वायरल कर दिया। इस मामले में महिला आयोग ने सख्त रवैया अपनाते हुए अस्पताल अधीक्षक को नोटिस देकर तलब किया है। इस जटिल आॅपरेशन के दौरान डॉक्टरों के झगड़े में नवजात की मौत से सरकार भी हरकत में आ गई और दोनों डॉक्टरों को हटा दिया गया। घटना मंगलवार की है। जोधपुर में उम्मेद अस्पताल में गर्भवती अनीता का आॅपरेशन चल रहा था। इसी दौरान दो डॉक्टर अशोक नैनवाल और डॉक्टर एमएल टाक आपस में झगड़ पड़े। दोनों में करीब आधे घंटे तक जम कर बहसबाजी हुई। बस गनीमत ये रही कि दोनों में मारपीट नहीं हुई। इस दौरान मौके पर नर्सिंग स्टाफ और दो-तीन अन्य डाक्टर भी मौजूद थे। इसी बीच किसी ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना कर वायरल कर दिया। इस वीडियो में दोनों डॉक्टरों को आपस में जमकर तूतू-मैंमैं करते हुए साफ देखा गया। आॅपरेशन कक्ष में मौजूद डॉक्टर और बाकी स्टाफ पूरा तमाशा देखते रहे। इस घटना की जानकारी मिलने के बाद अस्पताल प्रशासन ने दोनों डॉक्टरों को हटा दिया। सरकार ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया और पूरे मामले की जांच के लिए कमेटी बना दी है। सरकार के पास मामला आने के बाद बुधवार को डॉक्टर अशोक नैनवाल को सेवा से बर्खास्त कर दिया और डा. एमएल टाक को जयपुर तलब कर लिया। अस्पताल में जिस प्रसूता के आॅपरेशन के दौरान यह सब हुआ वो अभी अस्पताल में ही भर्ती है।

इस मामले में सबसे गंभीर कार्रवाई राज्य महिला आयोग ने शुरू कर दी है। आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा ने बुधवार को बताया कि आॅपरेशन कक्ष में गर्भवती के आॅपरेशन के समय डॉक्टरों का आपसी झगड़ा बहुत ही गंभीर मामला है। इससे भी गंभीर यह है कि ऐसे समय में किसी महिला के आॅपरेशन का वीडियो कैसे बना। आयोग ने पूरे मामले की रिपोर्ट सहित अस्पताल अधीक्षक को एक सितंबर को जयपुर तलब कर लिया है। प्रसव के दौरान किसी महिला के साथ इस तरह की हरकत को आयोग बर्दाश्त नहीं कर सकता। उनका कहना है कि डॉक्टर समय रहते सही तरीके से आॅपरेशन करते तो नवजात को बचाया जा सकता था। चिकित्सा महकमे ने भी डॉक्टरों के ऐसे बर्ताव को शर्मनाक करार दिया है। चिकित्सा मंत्री कालीचरण सर्राफ ने इस मामले में अस्पताल प्रशासन से गहरी नाराजगी जताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया है।

 

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