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सुप्रीम कोर्ट के बैन के बावजूद नहीं सुधरे हालात, यूपी के शख्स ने स्पीड पोस्ट से पत्नी को भेजा तलाकनामा

यह लेटर स्पीड पोस्ट के जरिए उत्तर प्रदेश से 14 अगस्त को भेजा गया था जो कि उर्दू भाषा में लिखा हुआ है।
Author जेसलमैर | September 12, 2017 16:42 pm
(Represantional Image)

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा इंस्टैंट तलाक पर बैन लगाया गया है लेकिन इसके बाद भी लोग इस गैरकानूनी प्रथा पर रोक नहीं लगा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को न मानते हुए एक शख्स ने स्पीड पोस्ट के जरिए अपनी पत्नी को तलाक दे दिया। यह मामला जेसलमैर के पोखरण का है। यह लेटर स्पीड पोस्ट के जरिए उत्तर प्रदेश से 14 अगस्त को भेजा गया था जो कि उर्दू भाषा में लिखा हुआ है। यह लेटर कलसुम नाम की महिला के नाम पर मंगोलाई गांव में स्थित उसके घर पर भेजा गया था। कलसुम अनपढ़ है और वह उर्दू भी नहीं जानती। उसके परिवार ने किसी की मदद से उस लेटर को पढ़वाया जिसके बाद पूरा परिवार सदमें में है। इस लेटर के जरिए कलसुम के पति ने उसे तलाकनामा भेजा है।

कलसुम के पिता छोटू खान का कहना है कि वह अपनी बेटी के लिए इंसाफ की मांग करते हैं और उसके पति के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। मीडिया से बातचीत के दौरान खान ने कहा कि ढाई साल पहले उनकी बेटी की शादी यूपी के मेरठ में रहने वाले मोहम्मद अरशद से हुई थी। शुरुआत में तो सब सही चल रहा था लेकिन बाद में अरशद कलसुम से यह कहने लगा था कि वह उसे बिल्कुल भी पसंद नहीं करता है क्योंकि वह खूबसूरत नहीं है। इसके बाद अरशद ने कलसुम के साथ मारपीट करना शुरु कर दिया था। खान ने कहा कि हमने कई बार अरशद को समझाया लेकिन उसे कोई फर्क नहीं पड़ा।

इस मामले की पुलिस में शिकायत की गई है। इस मामले पर बात करते हुए जिला एसपी गौरव यादव ने कहा कि आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के इस गैरकानूनी प्रथा को बैन करने के बावजूद आरोपी ने अपनी पत्नी को तलाक भेजा। यादव ने बताया कि दो दिन पहले पीड़िता ने दहेज और उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई है जिसमें उसने तीन तलाक का जिक्र नहीं किया है। फिलहाल पूरे मामले की जांच की जा रही है।

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  1. S
    Sidheswar Misra
    Sep 13, 2017 at 10:39 am
    कोर्ट के फैसले से तलाक का क्या सम्बन्ध। अब तो यह हो गया पत्नी को जो सामान्य कानून है उसके तहत महिला अदालत जाये मुकदमा लड़े गुजरा भत्ता के लिए पुरुष तो स्वतन्त्र घूमे। महिला अदालतों के चक्क्र में
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    Reply
    सबरंग