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जल स्वावलंबन अभियान में जिला कलेक्टरों के रवैए से सरकार नाखुश

वसुंधरा राजे ने अभियान की शुरुआत 27 जनवरी से पूरे प्रदेश में की थी। इसके जरिए प्रदेश में जल भंडारण के लिए जनसहयोग से कई काम कराए जाने है पर नौकरशाही की इसमें ज्यादा रूचि सामने नहीं आ रही है।
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे। (पीटीआई फाइल फोटो)

राजस्थान में चल रहे मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान में जिला कलेक्टरों के रवैए से सरकार ने नाखुशी जताई है। इस अभियान को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे खासा महत्व दे रही हैं। राजे ने अभियान की शुरुआत 27 जनवरी से पूरे प्रदेश में की थी। इसके जरिए प्रदेश में जल भंडारण के लिए जनसहयोग से कई काम कराए जाने है पर नौकरशाही की इसमें ज्यादा रूचि सामने नहीं आ रही है।

जल स्वावलंबन अभियान की फीडबैक के लिए मुख्य सचिव सीएस राजन ने यहां जिला कलेक्टरों से वीडियो क ांफें्रसिंग के जानकारी जुटाई थी। इसमें ही उभर कर आया कि जिलों में तय मापदंडों के मुताबिक काम नहीं हो रहा है। इसके साथ ही कई जिलों में तो कलेक्टर ही इस काम को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। इस पर ही मुख्य सचिव ने कलेक्टरों से नाराजगी जताते हुए उन्हें अपने रवैए में सुधार लाने की नसीहत तक दी। मुख्य सचिव की नाराजगी थी कि अभियान के तहत कलेक्टरों ने किसी भी तरह का नया काम शुरू नहीं किया है।

जिलों में पुराने कामों को उलटफेर कर शुरू करवा दिया गया है। जिला कलेक्टरों के इस तरह के काम करने से ही सरकार ने अपनी नाखुशी जताई। राजन ने कहा कि जिलों में जो काम हो रहे है उनमें कोई इनोवेटिव काम नहीं हो रहे हैं। अभियान में ज्यादातर काम वाटरशेड प्रोग्राम की तरह हो रहे हैं। पुराने ढर्रे के ही काम करवाने थे तो फिर अभियान की क्या जरूरत थी। मुख्य सचिव ने साफ तौर पर कलेक्टरों को चेताया कि इसमें फौरन सुधार किया जाए।

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