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राहुल गांधी पर टिप्पणी को लेकर राजस्थान विधानसभा में हंगामा

कांग्रेस की मांग है कि भाजपा अपने दोनों विधायकों के खिलाफ कार्रवाई करे और सदन में माफी मांगे।
राजस्थान विधानसभा सत्र के दौरान राज्यपाल कल्याण सिंह, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे। (पीटीआई फाइल फोटो)

जेएनयू और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर की गई विवादित टिप्पणी को लेकर मंगलवार को राजस्थान विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस ने भाजपा पर माफी मांगने का दबाव बनाते हुए सदन में जमकर नारेबाजी की। कांग्रेस की मांग है कि भाजपा अपने दोनों विधायकों के खिलाफ कार्रवाई करे और सदन में माफी मांगे। इस मामले को लेकर कांग्रेस ने प्रश्नकाल में वाकआउट किया और शून्यकाल में विधानसभा की कार्यवाही का पूरे दिन के लिए बहिष्कार किया। इस मामले में आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए कांग्रेस ने बुधवार को एक बार फिर रणनीति बनाकर भाजपा को घेरने का फैसला किया है।

मंगलवार को विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने विपक्ष के नेता रामेश्वर डूडी को बोलने की इजाजत दी। डूडी जब बोल रहे थे तो सरकारी उपमुख्य सचेतक मदन राठौड़ ने अचानक कहा कि डूडी ने विवादित बयान देने वाले भाजपा विधायक ज्ञानदेव आहूजा को गले मिलकर बधाई दी थी। कांग्रेस सदस्यों ने राठौड़ के इस बयान का विरोध किया। संसदीय कार्य मंत्री राजेंद्र राठौड़ और विधायक आहूजा ने खुद भी इस बात को सही ठहराया कि सदन के बाहर डूडी ने उन्हें राहुल गांधी पर की गई टिप्पणी के लिए बधाई दी थी। हालांकि कांग्रेस सदस्यों ने इसे गलत बताया और वह इस मामले में किसी भी तरह से झुकने को तैयार नहीं है।

विपक्ष के नेता डूडी ने पत्रकारों से कहा कि भाजपा के दो विधायकों कैलाश चौधरी और ज्ञानदेव आहूजा ने जो टिप्पणी की है उसके लिए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को खेद जताना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनहित के मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए ही खेद नहीं जता रही है। डूडी का कहना है कि इस बार सरकार के खिलाफ कांग्रेस के पास कई मुद्दे हैं।

कांग्रेस के सदस्यों ने प्रश्नकाल शुरू होते ही सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी अपनी सीट पर बैठी रहीं। डूडी ने मुख्यमंत्री से माफी मांगने को भी कहा। कांग्रेस ने सोमवार को भी भाजपा विधायक कैलाश चौधरी और ज्ञानदेव आहूजा के खिलाफ मामला दर्ज करने और माफी मांगने की मांग को लेकर हंगामा किया था।

शून्यकाल में कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक प्रद्युम्न सिंह ने भी भाजपा पर कई आरोप लगाए। उन्होंने दोनों पक्षों के बीच पैदा हुए गतिरोध को दूर करने के लिए सत्ता पक्ष से विधायकों की टिप्पणी के लिए खेद जताने की मांग की। इस बीच संसदीय कार्य मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने नियमों का हवाला देते हुए कांग्रेस की मांग को गलत ठहराया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को नियमों के तहत इस मामले को उठाना चाहिए। अध्यक्ष की अनुमति होगी तो सरकार इस पर जवाब भी देगी। हंगामे के बीच ही अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने इस मामले पर चर्चा खत्म कर दी। इसके बाद विपक्ष के नेता ने सदन की कार्यवाही के बहिष्कार की घोषणा की और कांग्रेस के सभी विधायक सदन से बाहर चले गए।

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