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विधायक और अध्यक्ष में तकरार, विधानसभा को दो घंटे के लिए स्थगित किया

राज्य विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन जहां कांग्रेस ने अपनी रणनीति बदल कर कार्यवाही में हिस्सा लिया, वहीं जनजाति में शामिल मीणा वर्ग के प्रमाण पत्र जारी करने का मामला गूंज गया।
राजस्थान विधानसभा सत्र के दौरान राज्यपाल कल्याण सिंह, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे। (पीटीआई फाइल फोटो)

राजस्थान विधानसभा में बुधवार को अध्यक्ष कैलाश मेघवाल और एनपीपी के विधायक किरोड़ी लाल मीणा के बीच तीखी तकरार हो गई। इसके चलते अध्यक्ष ने कार्यवाही को दो घंटे के लिए स्थगित कर दिया। दोनों के बीच विवाद तब हो गया जब अध्यक्ष ने विधायक के मीणा और मीना जनजाति के प्रमाण पत्र से जुड़े प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया।

राज्य विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन जहां कांग्रेस ने अपनी रणनीति बदल कर कार्यवाही में हिस्सा लिया, वहीं जनजाति में शामिल मीणा वर्ग के प्रमाण पत्र जारी करने का मामला गूंज गया। विधायक किरोड़ी लाल मीणा ने प्रमाण जारी नहीं होने के मसले पर स्थगन प्रस्ताव दिया था।

अध्यक्ष मेघवाल ने शून्यकाल में व्यवस्था देते हुए इस प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया। इस पर ही किरोड़ी लाल मीणा भड़क गए और अपने प्रस्ताव को लेने पर जोर देते रहे। अध्यक्ष के इनकार करने पर मीणा अपने दल के दो विधायकों के साथ वेल में आ गए और प्रस्ताव पर चर्चा की मांग करने लगे। इस दौरान दोनों के बीच तीखी झड़प भी होती रही। अध्यक्ष मेघवाल ने उसी समय सदन की कार्यवाही को दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। इसके साथ ही शून्यकाल के अन्य मसलों को भी उन्होंने नहीं लिया। विधानसभा की कार्यवाही जब दो बजे फिर शुरू हुई तो राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस शुरू करवा दी।

कांग्रेस ने बुधवार को अपनी रणनीति बदलते हुए विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लिया। इससे पहले कांग्रेस लगातार दो दिन से विवादित टिप्पणी करने वाले दो भाजपा विधायकों के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई की मांग पर अड़ी हुई थी। कांग्रेस ने धमकी दी थी कि राहुल गांधी के खिलाफ टिप्पणी करने वाले विधायकों के खिलाफ कार्रवाई और मुख्यमंत्री के माफी नहीं मांगने पर सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं होंगे।

कांग्रेस ने बुधवार को रणनीति बदलते हुए कार्यवाही में हिस्सा लिया और प्रश्नकाल में अपन भूमिका भी निभाई।
प्रश्नकाल में अलवर की कानून व्यवस्था के मामले में गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने अलवर में बेहतर स्थिति बताई तो कई सदस्यों ने उस पर एतराज जताया। कटारिया ने कहा कि पूरे प्रदेश में अपराध घटे हैं। इस पर कांग्रेस के सदस्यों ने गृह मंत्री के तथ्यों को गलत करार दिया और कहा कि अपराधों में बढ़ोतरी हुई है। इस मामले में हंगामा भी हुआ। कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि गैंगस्टर आनंद पाल को पकड़ नहीं पा रहे हैं। आनंदपाल कब पकड़ा जाएगा, यही सवाल जनता पूछ रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक प्रद्युमन सिंह ने भी अपराधों के मामलों में सरकार की खिंचाई करते हुए उसे घेरा।

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