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राजस्थान: धमकी के बाद 20 मुस्लिम परिवारों ने छोड़ा था गांव, अब खाने के लिए मोहताज

200 मुस्लिमों ने हिंदुओं से मिली धमकी के बाद गांव छोड़ दिया था।
लोक गायक आमद खान का परिवार। (Photo Source: Indian Express/Hamza Khan)

राजस्थान के जैसलमेर जिले के एक गांव में हिंदुओं की ओर से कथित रूप से धमकी मिलने के बाद गांव छोड़ने वाले 20 मुस्लिम परिवारों के सामने अब एक और समस्या आ गई है। जिला प्रशासन के अस्थाई कैंप ने अभी वे लोग रह रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से खाने की व्यवस्था नहीं की गई है। कैंप में बुनियादी सुविधाएं भी ना होने की वजह से बच्चे और महिलाएं परेशान हैं। 20 परिवारों के करीब 150 से ज्यादा लोग अपने गांव दांतल नहीं लौटना चाहते। उन्होंने जिला प्रशासन से अपील की है कि उन्हें दूसरे सुरक्षित ठिकाने पर शिफ्ट किया जाए। इन परिवारों ने एक हिंदू पुजारी और उनके भाईयों द्वारा एक मुस्लिम लोकगायक की कथित हत्या कर देने के बाद पैदा हुए विवाद के बाद गांव छोड़ दिया था। रमेश सुथार नाम के पुजारी (जो एक तांत्रिक का काम करता है) को गिरप्तार कर लिया गया है, जबकि उसके भाई फरार हैं।

सुथार पर आरोप है कि उसने गांव में 27 सितंबर को नवरात्र के समारोह में ‘धीमा भजन गाने’ पर 45 वर्षीय लोकगायक आमद खान की हत्या कर दी थी। अगले दिन खान का शव उसके घर के आगे मिला था। गांव के राजपूत समुदाय के लोगों ने खान के परिवार वालों को पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराने की धमकी दी थी। खान परिवार ने चुपचाप शव दफन कर दिया। जब पास के गांव के उनके रिश्तेदार आए और उन्होंने हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया तो उन्होंने सुथार और उसके दो भाईयों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया। उसके बाद राजपूत समुदाय के लोगों ने कथित तौर पर उन्हें गांव छोड़ने की धमकी दी, जिसके बाद उन्होंने गांव छोड़कर पास के गांव में शरण ले ली।

सोमवार को उन्होंने जैसलमेर जिले के डीसी केसी मीणा से मुलाकात की, जिसने उन्हें मदद का दिलासा दिया था और नगर निकाय की ओर से चलाए जा रहे शेल्टर हाउस में शिफ्ट किया था। डीसी ने नगर निकाय से उन लोगों के लिए खाने का इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। लेकिन मुस्लिम परिवारों को कहना है कि हम लोग खुद ही खाने का इंतजाम कर रहे हैं, लेकिन यह ज्यादा दिन नहीं हो पाएगा। प्रशासन खाने का इंतजाम करने में हमारी कोई मदद नहीं कर रहा है। वह जैसलमेर नगर निकाय का कहना है कि हमारे पास उन परिवारों को खाना मुहैया कराने का फंड नहीं है। हम हर रोज उन्हें खाना मुहैया नहीं करा सकते।

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  1. S
    sanghpriya wasnik
    Oct 12, 2017 at 4:07 pm
    ये गलत है शर्म की बात है सरकार चुप बैठी है और दलित, मुस्लिम मर रहे है
    (0)(0)
    Reply
    सबरंग