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समाधि में लीन ही रहेंगे आशुतोष महाराज, नहीं होगा अंतिम संस्कार- पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

साल 2014 में इसी कोर्ट की सिंगल बेंच ने डीजेजेएस प्रमुख के शरीर का अंतिम संस्कार करने का आदेश दिया था।
Author July 5, 2017 15:53 pm
साल 2014 में इसी कोर्ट की सिंगल बेंच ने डीजेजेएस प्रमुख के शरीर का अंतिम संस्कार करने का आदेश दिया था। तब कोर्ट ने कहा था कि आशुतोष महाराज क्लिनिकली डेड को चुके हैं।

पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मशहूर संत और समाधि में लीन आशुतोष महाराज के शरीर को सुरक्षित रखने की अनुमति दे दी है। इससे उनके अनुयायियों में खुशी की लहर है। आज, बुधवार (05 जुलाई) को पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट की डबल बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश को निरस्त करते हुए दिव्य ज्योति जागृति संस्थान (डीजेजेएस) के प्रमुख के शरीर को संरक्षित करने का फैसला सुनाया। इससे पहले साल 1 दिसंबर 2014 को जस्टिस एमएमएस बेदी की सिंगल बेंच ने डीजेजेएस प्रमुख के शरीर का अंतिम संस्कार करने का आदेश दिया था। तब कोर्ट ने कहा था कि आशुतोष महाराज क्लिनिकली डेड को चुके हैं। लिहाजा, उनका अंतिम संस्कार कर दिया जाए।

हाइ कोर्ट की सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ डीजेजेएस ने डबल बेंच में चुनौती दी थी और कहा था कि आशुतोष महाराज समाधि में लीन हैं और एक दिन वो इससे बाहर आएंगे। लिहाजा, उनका अंतिम संस्कार नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही हाईकोर्ट की डबल बेंच ने समय-समय पर आसुतोष महाराज के शरीर का मेडिकल टीम द्वारा निरीक्षण कराने का भी निर्देश दिया है। यह निरीक्षण लुधियाना के अस्पताल के डॉक्टों की टीम करेगी। संस्थान को इस निरीक्षण के लिए 50 लाख रुपये जमा कराने को कहा गया है।

समाधि में लीन आशुतोष महाराज।

मामले में पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट में दलील दी थी कि महाराज समाधि में हैं या मृत, यह तय करना सरकार का काम नहीं है। पंजाब के एडवोकेट जनरल अतुल नंदा ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा था कि इस विषय पर सरकार बिल्कुल तटस्थ है। यह आस्था और विश्वास का विषय है और सरकार का काम सभी की धार्मिक भावनाओं की सुरक्षा करना है।

इसके अलावा हाईकोर्ट ने उस याचिका को खारिज दिया है जिसमें दिलीप कुमार झा नाम के एक शख्स ने खुद को आशुतोष महाराज का तथाकथित पुत्र बताया था और डीएनए टेस्ट की मांग की थी। कोर्ट ने झा को निर्देश दिया कि अगर आप डीएनए टेस्ट कराना चाहते हैं तो इसके लिए सिविल सूट दाखिल करना होगा। हाईकोर्ट ने ये भी कहा है कि सिविल सूट दाखिल करने की स्थिति में यदि आशुतोष महाराज के डीएनए सैंपल की जरूरत पड़ी तो दिव्य ज्योति जागृति संस्थान को उपलब्ध कराना होगा। हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि सैंपल लेने में किसी भी तरह का हस्तक्षेप या व्यवधान न पैदा किया जाय।

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First Published on July 5, 2017 12:39 pm

  1. K
    Kumar Madan Lal
    Jul 5, 2017 at 3:46 pm
    यह फैसला सामाजिक नहीं है, कानून चाहे कुछ भी कहे, धर्म और समाज के खाई को पटाने में कानून बिफल रही है. संस्था पैसो से कानून को तोलने का काम किया है. अगर आस्था को समाज से अलग माना जाता है तो फिर उस आस्था को समाज में जगह लेने क्यों दी जाती है. समाज के लोगो को इसका बहिस्कार करना होगा.चंद्र लोगो की आस्था को लेकर पूरी समाज पर इसका निर्णय देना गलत है.
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