April 26, 2017

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5 महिलाओं के माथे पर गुदवा दिया था “जेबकतरी”, 23 साल बाद पुलिसवालों को हुई मामूली सजा

इस मामले में अमृतसर के दो पुलिस वालों को दो साल और एक अन्य पुलिस वाले को एक साल की सजा सुनाई गई है।

Author October 19, 2016 08:30 am
अपने बेटे के साथ 65 साल की पीड़िता मोहिंदर कौर।

स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने इस महीने अमृतसर के दो पुलिस वालों को दो साल और एक अन्य पुलिस वाले को एक साल की सजा सुनाई है। यह सजा पांच महिलाओं के माथे पर जेबकतरी गुदवा देने के जुर्म में दी गई। हालांकि जानकर हैरानी होगी कि इस केस में यह सजा करीब 23 साल बाद दी गई है। जहां चार महिलाएं पिछले 23 साल से आरोपी पुलिसवालों की सजा का इंतजार कर रही थीं, वहीं एक महिला की मौत इंतजार करते-करते ही हो गई। इतने सालों के बाद भी पुलिसवालों को मिली 3 साल की मामूली सजा से पीड़ित महिलाएं काफी निराश हैं।

70 साल की सुरजीत कौर ने कहा, “हमारे इतने लंबे इंतजार के बाद भी तीन साल की सजा देना मायने नहीं रखती। यह बिलकुल मामूली है और इसे बढ़ाना चाहिए।” दरअसल 8 दिसंबर, 1993 में पांच महिलाओं के माथे पर “जेबकतरी” लिखवा दिया गया था। इन पांच में से तीन महिलाएं सुरजीत (70), सुरजीत की ननद मोहिंदर कौर (65) और मोहिंदर की सास हामिर कौर (अब मृत) एक ही गांव में रहती थीं, वहीं परमेश्री (65) और गुरदेव कौर (60) अलग-अलग गांव की थी।  पुलिस वालों ने चार चोरी करने वाली महिलाओं के माथे पर ‘जेबकतरी’ का टैटू गुदवा दिया था। वे महिलाएं अक्सर पॉकेट मारने के लिए पकड़ी जाती थीं। पॉकेट मारी के केस के दौरान पुलिस ने उन महिलाओं के माथे को दुपट्टे से ढक कर कोर्ट में पेश किया गया। उनमें से एक महिला ने कोर्ट में माथे पर बना हुआ टैटू दिखा दिया। इसके बाद यह घटना मुद्दा बन गई।

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केस के मुताबिक, ये महिलाएं अमृतसर में स्वर्ण मंदिर जा रही थीं, तब इन्हें बस अड्डे से गिरफ्तार किया गया। इन्हें एक हफ्ते तक हिरासत में रखा था, जिसके बाद पुलिसवालों ने महिलाओं के माथे पर ‘जेबकतरी’ का टैटू बनावा दिया था। पॉकेट मारी के केस के दौरान पुलिस ने उन महिलाओं के माथे को दुपट्टे से ढक कर कोर्ट में पेश किया गया। उनमें से एक महिला ने कोर्ट में माथे पर बना हुआ टैटू दिखा दिया। इसके बाद यह घटना मुद्दा बन गई। कोर्ट में टैटू दिखाने वाले परमेश्री ने बताया, “पुलिसवालों ने टैटू गोदने वाली मशीन को मंगाया और फिर एक सब इंस्पेक्टर नारिंदर सिंह ने हमारे माथे पर काली इंक से लिख दिया।”

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मामला प्रकाश में आने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी इसका संज्ञान लिया। इससे ना सिर्फ पंजाब पुलिस की बहुत आलोचना हुई, बल्कि खुद पंजाब सरकार को प्लास्टिक सर्जरी के जरिए उस टैटू को हटवाना पड़ा। जनवरी 1994 में NHRC भी हाई कोर्ट में इस मामले में एक पार्टी बन गई और पंजाब सरकार से इसकी रिपोर्ट मांगी गई। NHRC ने हाई कोर्ट में इसकी सीबीआई जांच की मांग की। सीबीआई ने 2015 में विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज करके जांच शुरू की। सीबीआई ने 2015 में विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज करके जांच शुरू की और 2016 में जाकर इस मामले में फैसला सुनाया गया।

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First Published on October 19, 2016 8:26 am

  1. S
    Santosh San
    Oct 19, 2016 at 6:34 am
    Ise desh ki police sabse bhrasht hae, or logon ko nasihat de rahe hae
    Reply

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