June 26, 2017

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हरियाणा और पंजाब के बीच जल विवाद को सुलझाने के लिए आगे आए प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 अप्रैल को दोनों राज्यों के प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई है।

Author चंडीगढ़ | April 11, 2017 01:53 am
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक कार्यक्रम के दौरान। (Image Source : PTI Photo)

हरियाणा और पंजाब के बीच वर्षों से छिडेÞ जल विवाद को सुलझाने के लिए एक बार फिर से केंद्र सरकार आगे आ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 अप्रैल को दोनों राज्यों के प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई है। वे अब दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मुलाकात करके वर्षों से चले आ रहे विवाद को सुलझाने का प्रयास करेंगे। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को झटका देते हुए सतलुज यमुना लिंक नहर मामले में सुनवाई टालने की अपील को खारिज कर दिया है।  इस बैठक को इसलिए भी अहम माना जा रहा है कि इससे पहले केंद्रीय मंत्री उमा भारती द्वारा बुलाई गई दोनों राज्यों की संयुक्त बैठक बेनतीजा रह चुकी है। तब पंजाब की पूर्व अकाली-भाजपा सरकार ने केंद्र की सिफारिशों को मानने से इनकार कर दिया था। आगामी 20 अप्रैल को दिल्ली में होने वाली इस बैठक में प्रधानमंत्री के अलावा केंद्रीय जल संसाधन मंत्री, दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री और सिंचाई मंत्री मौजूद रहेंगे। सूत्रों के अनुसार पीएमओ की ओर से इस बारे में पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को सूचित किया जा चुका है। पंजाब के सिंचाई मंत्री राणा गुरजीत सिंह भी बैठक में शामिल रहेंगे। हरियाणा में सिंचाई विभाग की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री मनोहर लाल ही संभाल रहे हैं। इन दिनों पंजाब और हरियाणा के बीच रावी-ब्यास के पानी को लेकर तलवारें खिंची हुई हैं। सतलुज यमुना लिंक नहर के जरिए हरियाणा में आने वाली इस पानी को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी हरियाणा के हक में फैसला सुना चुका है। सूत्रों का कहना है कि एसवाइएल विवाद के अलावा घग्गर नदी सहित दोनों राज्यों के बीच चल रहे सभी तरह के जल विवाद को लेकर प्रधानमंत्री यह बैठक कर रहे हैं।

इससे पूर्व 2014 में केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने दोनों राज्यों की बैठकें बुलाई थीं। दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों की भी इस बारे बैठकें हो चुकी हैं। पंजाब द्वारा हरियाणा को बाकी पेज 8 पर एसवाइएल से पानी दिए जाने का खुलकर विरोध किया जा रहा है। वहीं सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले में एसवाइएल निर्माण का जिम्मा केंद्र सरकार पर सौंप चुका है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से बुलाई गई यह बैठक अहम होने वाली है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को झटका देते हुए सतलुज यमुना लिंक नहर मामले में सुनवाई टालने की अपील को खारिज कर दिया है। पंजाब सरकार ने तर्क दिया था कि राज्य में अभी नई सरकार है। अभी राज्य में विधि अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई है। लिहाजा, सुप्रीम कोर्ट में 12 अप्रैल को होने वाली सुनवाई को टाल दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार की मांग को खारिज करते हुए कहा कि मामले की सुनवाई निर्धारित तिथि पर ही होगी।
एसवाइएल के मसले पर पंजाब और हरियाणा आमने-सामने हैं। पंजाब जहां नहर न बनाने की जिद पर अड़ा है तो हरियाणा किसी भी हाल में नहर बनाने की बात कर रहा है। पंजाब के साथ पिछले कई वर्षों से चल रहे इस विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल हरियाणा के हक में फैसला दिया था। उस समय पंजाब इस फैसले के विरोध में खड़ा हो गया था और वहां के विधानसभा चुनाव में भी यह मुद्दा खूब उछला था। हरियाणा का सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल सुप्रीम कोर्ट का फैसला तत्काल प्रभाव से लागू कराने की मांग को लेकर राष्ट्रपति और गृह मंत्री से मुलाकात कर चुका है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर कर रखी है जिसमें अदालत के फैसले को तुरंत प्रभाव से लागू कराने की मांग उठाई गई है।
इस मामले की पहली सुनवाई 2 मार्च को और दूसरी सुनवाई 28 मार्च को तय हुई थी, लेकिन बेंच उपलब्ध न होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। इसके बाद अब हरियाणा ने फिर से सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दिया। इसके मुताबिक यह करोड़ों लोगों के हितों से जुड़ा मामला है। इसलिए इसकी जल्द सुनवाई कर हरियाणा को उसका हक दिलाया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए जल्द सुनवाई का आश्वासन दिया था।

 

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First Published on April 11, 2017 1:53 am

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