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पीएम मोदी के नाम धमकी भरा मैसेज लाने वाला कबूतर जेल में, पुलिस बोली- जांच होने तक रिहाई नहीं

कबूतर को रखने के लिए 300 रुपये खर्च कर पिंजरा भी खरीदा गया है। कबूतर को बाजरा और पानी दिया जा रहा है।
पंजाब के पठानकोट जिले के बामियाल पुलिस के पास है एक कबूतर संदिग्‍ध पाकिस्‍तानी लिंक के चलते गिरफ्त में है। (Representational photo)

उरी हमले के बाद से सुरक्षाबलों के अनुसार जम्‍मू कश्‍मीर में सीमा पर घुसपैठ की कई कोशिशों को नाकाम किया गया है। इसी तरह का एक मामला पंजाब के पठानकोट जिले के बामियाल पुलिस के पास है। यहां पर एक कबूतर संदिग्‍ध पाकिस्‍तानी लिंक के चलते गिरफ्त में है। सतविंदर नाम के एक सतर्क ग्रामीण ने कबूतर के पैरों में ऊर्दू में मैसेज देखने के बाद इसे पुलिस को सौंपा। इस मैसेज में लिखा था, ”मोदी हम 1971 के जैसे नहीं हैं- जैश ए मोहम्‍मद।” कबूतर की देखभाल की ड्यूटी में तैनात इंस्‍पेक्‍टर दलीप कुमार ने बताया, ”हमने डेली ड्यूटी रजिस्‍टर में कबूतर के पकड़े जाने की बात दर्ज की है।” कबूतर को रखने के लिए 300 रुपये खर्च कर पिंजरा भी खरीदा गया है। कबूतर को बाजरा और पानी दिया जा रहा है। दलीप कुमार के अनुसार इससे पहले इस तरह के कबूतरों को सीमा के पास रखा जाता था।

पठानकोट(ग्रामीण) के डीएसपी कुलदीप सिंह ने बताया, ”देखते हैं आगे कबूतर के लिए क्‍या किया जा सकता है। इसके पकड़ने जाने को लेकर सवाल पूछ-पूछकर मीडिया पागल हो गई है। कबूतर को आजाद कराने की कुछ खबरों ने परेशान कर रखा है। अभी इसे आजाद करने का कोई विचार नहीं है।” शुक्रवार को इंस्‍पेक्‍टर दलीप कुमार कबूतर को स्‍कैन कराने के लिए गुरदासपुर के जानवरों के अस्‍पताल लेकर गए। हालांकि उन्‍हें निराशा हाथ लगी क्‍योंकि स्‍कैनिंग मशीन काम नहीं कर रही थी। उन्‍होंने बताया, ”हम देखना चाहते थे कि कबूतर के अंदर कोई सिम कार्ड तो नहीं छुपाया गया है। बस में सब लोग इसमें रूचि ले रहे थे। कबूतर काफी फेमस हो गया।”

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अमृतसर में जानवरों पर क्रूरता रोकने की सोसायटी से जुड़े इंस्‍पेक्‍टर अशोक जोशी ने बताया कि कबूतर के जरिए मैसेज भेजना आसान नहीं है। उन्‍होंने बताया, ”जिस जगह आपको संदेश भेजना है वहां ऐसा करने के लिए कबूतर को आपको साथ ले जाना होगा। एक बार कबूतर ट्रेंड हो जाए तो वह बाकी कबूतरों को भी निश्‍चित जगह पर ले जा सकता है। लेकिन भारत-पाक सीमा की उलझनों को देखते हुए ऐसा कर पाना मुश्किल है।

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