June 28, 2017

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OROP सुसाइड: बेटे ने बताया, पिता सूबेदार रामकिशन कर रहे थे सिर्फ 5 हजार रुपए बढ़ाने की मांग

रामकिशन के बेटे जसवंत ने बताया कि सूबेदार रामकिशन 2004 में DSC से रिटायर हुए थे, जिसके बाद उन्हें हर महीने 24,999 रुपए की पेंशन मिलती थी। लेकिन वन रैंक वन पेंशन (OROP) लागू होने के बाद उनकी पेंशन 30 हजार रुपए हो जानी चाहिए थी।

Author November 3, 2016 08:17 am
दिल्‍ली में वन रैंक वन पेंशन की मांग को लेकर सुसाइड करने वाले पूर्व सैनिक का आईडी कार्ड।

ओआरओपी के लिए हरियाणा के रहने वाले एक पूर्व सैनिक राम किशन ग्रेवाल ने बुधवार को सुसाइड कर लिया। हरियाणा में भिवानी के एक गांव में रहने वाले राम किशन अपनी पंचायत के पहले दलित सरपंच थे। राम किशन के परिवार और करीबियों ने बताया कि उनके गांव में किसी को विश्वास नहीं हो रहा कि उनके जैसा बुद्धिमान व्यक्ति ऐसा कदम उठा सकता है। परिवार के मुताबिक राम किशन की मांग सिर्फ पेंशन में 5000 रुपए बढ़कर मिलने की थी। उन्होंने प्रादेशिक सेना में 6 साल और डिफेंस सिक्योरिटी कॉर्प्स (DSC) में 24 साल की सर्विस दी थी। रामकिशन के बेटे जसवंत ने बताया कि सूबेदार रामकिशन 2004 में DSC से रिटायर हुए थे, जिसके बाद उन्हें हर महीने 24,999 रुपए की पेंशन मिलती थी। लेकिन वन रैंक वन पेंशन (OROP) लागू होने के बाद उनकी पेंशन 30 हजार रुपए हो जानी चाहिए थी।

परिवार ने बताया कि ग्रेवाल चाहते थे कि उनकी पेंशन में एरियर के साथ छठे और सातवें वेतन आयोग व ओआरओपी के अनुसार इजाफा हो। 2004 में ही रिटायर होने वाले एक अन्य पूर्व सैनिक सूबेदार पृथ्वी सिंह ने कहा, “अगर सही से जोड़ा जाए तो हम सभी 30 हजार रुपए की पेंशन पाने के हकदार हैं।” रामकिशन के गांव बामला स्थित उनके घर में 16 लोगों का परिवार है। दिनभर टीवी पर चली खबरों से ही इन्हें पूरी घटना की जानकारी मिल पाई थी। परिवार के सभी सदस्य सदमे में थे। रामकिशन की पत्नी किताब कौर ने कहा, “हमने अपने दिल्ली में रह रहे परिवार के लोगों को संपर्क करने की कोशिश की लेकिन बात नहीं बनी। मेरे पति मृत पड़े थे और परिवार वालों को पीटा जा रहा था।” किताब कौर अभी तक भरोसा नहीं कर पा रहीं कि उनके पति अब नहीं रहे।

वीडियो: OROP को लेकर पूर्व सैनिक के सुसाइड पर चढ़ा सियासी पारा, हिरासत में लिए जाने के बाद छोड़े गए राहुल गांधी

रामकिशन के पांच बेटे और दो बेटिया हैं, इनमें से दो बेटे कॉलेज में पढ़ाई करते हैं। उनके गांव में करीब 10 हजार लोगों की आबादी है, जिसमें दो पंचायत हैं। अपनी पंचायत में वह पहले दलित थे जिसे सरपंच बनाया गया हो। वह 1200 वोटों के रिकॉर्ड मार्जिन से जीते थे। उनकी पत्नी कौर ने बताया, “गांव के लोगों को वह इतने पसंद थे कि जीतने के बाद लोगों ने उन्हें कंधे पर उठा लिया था। गांव में दो बोरी भरकर मिठाई बांटी गई थी और पटाखे जलाए गए थे। अब वह नहीं रहे। मैं आशा करती हूं कि सरकार उन्हें शहीद का दर्जा देगी क्योंकि उन्होंने खुद के लिए नहीं दूसरों के लिए अपनी जान दी है।”

बता दें कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर सैनिकों के लिए वन रैंक वन पेंशन के मामले पर प्रदर्शन कर रहे पूर्व फौजी रामकिशन ग्रेवाल ने सुसाइड कर लिया था। इसके बाद मामले पर दिनभर सियासी संग्राम चला। परिवार से मिलने अस्पताल पहुंचे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को मिलने नहीं दिया गया और पुलिस ने तीनों को हिरासत में ले लिया था। हालांकि बाद में तीनों को छोड़ दिया गया। रामकिशन की सुसाइड करने से पहले अपने बेटे से फोन पर की गई बातचीत की एक ऑडियो क्लिप भी सामने आई थी। जिसमें वह बता रहे हैं कि उन्होंने सैनिकों के लिए अपनी जान दी है।

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First Published on November 3, 2016 8:09 am

  1. D
    DARSHAN LAL
    Nov 3, 2016 at 7:08 am
    AISA AADMI FOJI KE NAME PER DHABBA HAI KHUD KARNE WALA FOUJI NAHI HO SAKTA HAI EASKO MILNE WALE SARE LABH AUR PANSON TURANT BAND KAR DENA CHAHIA
    Reply
    1. V
      Vijay
      Nov 3, 2016 at 6:33 am
      फौजी कभी खुदकुशी नहीं करते . इस मौत की जांच होनी चाहिए . ख़ुदकुशी को बलिदान बताना फौजी का अपमान है .
      Reply
      सबरंग