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चंडीगढ़ में प्रशांत किशोर के दफ्तर पहुंचीं इरोम शर्मिला, लगने लगे कई कयास

मणिपुर की सामाजिक कार्यकर्ता इरोम शर्मिला, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मिलने के बाद कांग्रेस के चुनाव प्रचार की कमान संभाल रहे रणनीतिकार प्रशांत किशोर के दफ्तर पहुंची।
Author चंडीगढ़ | October 1, 2016 10:22 am
प्रेस कॉन्फ्रेंस करतीं इरोम शर्मिला। (पीटीआई फाइल फोटो)

मणिपुर की सामाजिक कार्यकर्ता इरोम शर्मिला, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मिलने के बाद कांग्रेस के चुनाव प्रचार की कमान संभाल रहे रणनीतिकार प्रशांत किशोर के दफ्तर पहुंची। कांग्रेस कार्यकर्ताओं इस बात से हैरान है कि राजनीति में उतरने का फैसला करने वाली इरोम शर्मिला कांग्रेस शासित मणिपुर में विधानसभा चुनाव लड़ने वालीं हैं। ऐसे में उनका प्रशांत किशोर के ऑफिस पहुंचना कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को हैरान और परेशान करने वाला हो सकता है।

उत्तर प्रदेश और पंजाब चुनाव में कांग्रेस के प्रचार अभियान की कमान संभाल रहे प्रशांत किशोर शर्मिला की यात्रा के दौरान दौरान चंडीगढ़ में ही थे। इरोम शर्मिला शर्मिला की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को देखते हुए इस यात्रा को लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं। मणिपुर के रहने वाले किशोर की टीम के एक सदस्य इरोम शर्मिला की यात्रा के दौरान उनसे मिलने चंडीगढ़ के एक होटल में पहुंचा थे, जहां शर्मिला ठहरी हुईं थी। जिसके बाद इरोम शर्मिला ने प्रशांत किशोर की टीम से मिलने की इच्छा जताई।

हाल ही में सामाजिक कार्यकर्ता इरोम शर्मिला ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की थी और उन्होंने कांग्रेस से लड़ने के लिए अपनाई जाने वाली राणनीति के बारे में पूछा। केजरीवाल ने ट्वीट कर बताया था, ”ईरोम शर्मिला से मिला। मैं उनके साहस और संघर्ष को सलाम करता हूं। उनके राजनीतिक सफर में मेरी ओर से उन्‍हें शुभकामनाएं और पूरा सहयोग है।” सूत्रों ने बताया कि शर्मिला ने दिल्‍ली के विधानसभा चुनावों में केजरीवाल की रणनीति के बारे में जानना चाहा। साथ ही पूछा कि किस तरह से उन्‍होंने कांग्रेस और भाजपा का सामना किया।

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गौरतलब है कि इरोम शर्मिला ने हाल ही में 16 साल बाद अनशन खत्‍म किया है। उन्‍होंने चुनाव लड़ने का एलान भी किया है। वे अपनी पार्टी बनाएंगी और चुनाव मैदान में उतरेंगी। शर्मिला के करीबी एक सूत्र ने बताया कि नौ अगस्‍त को अनशन तोड़ने के बाद उनके आप में शामिल होने की अनौपचारिक बातें थी। लेकिन उन्‍होंने बिना किसी गठबंधन के मणिपुर सीएम से मुकाबला करने का फैसला किया।

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