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‘कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नई पार्टी बनाने की धमकी देकर राहुल गांधी को किया था चित, सोनिया ने दिया था राजीव गांधी का वास्ता’

लेखक खुशवंत सिंह ने अमरिंदर सिंह की आधिकारिक जीवनी 'कैप्टन अमरिंदर सिंह- दि पीपुल्स महाराजा' में लिखा है कि जब कांग्रेस ने अमृतसर से चुनाव लड़ने के लिए कैप्टन अमरिंदर सिंह को कहा था, तब उन्होंने मना कर दिया था।
कैप्टन अमरिंदर सिंह का हाथ पकड़े हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी। (एक्सप्रेस फोटो)

पंजाब के 26वें मुख्यमंत्री के रूप में आज (16 मार्च को) कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शपथ ले ली है। यह दूसरा मौका है जब उन्होंने पंजाब की बागडोर संभाली है। इससे पहले भी साल 2002 से 2007 तक वो मुख्यमंत्री रह चुके हैं। यानी अमरिंदर सिंह की अगुवाई में कांग्रेस ने न सिर्फ दस साल बाद पंजाब में वापसी की है बल्कि मोदी लहर में कांग्रेस के लिए उम्मीदों की रोशनी भी जलाई है। पंजाब विधान सभा चुनावों में 117 सीटों में से कांग्रेस ने 77 सीटें जीती हैं जबकि सत्तारूढ़ शिरोमणि अकाली दल-बीजेपी गठबंधन और अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को करारी शिकस्त दी है। कैप्टन अमरिंदर सिंह साल 2014 के लोकसभा चुनावों में भी भाजपा को शिकस्त दे चुके हैं। जब देश में मोदी लहर थी तब कांग्रेस ने उन्हें अमृतसर सीट से उम्मीदवार बनाया था। इस सीट से पहले भाजपा के नवजोत सिंह सिद्धू सांसद रह चुके हैं लेकिन साल 2014 के लोकसभा चुनावों के वक्त उनका टिकट काटकर भाजपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और मौजूदा वित्त मंत्री अरुण जेटली को वहां से उम्मीदवार बनाया था। तब अरुण जेटली को कैप्टन के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा था।

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लेखक खुशवंत सिंह ने अमरिंदर सिंह की आधिकारिक जीवनी, ‘कैप्टन अमरिंदर सिंह- दि पीपुल्स महाराजा’ में लिखा है कि जब कांग्रेस ने अमृतसर से चुनाव लड़ने के लिए कैप्टन अमरिंदर सिंह को कहा था, तब शुरू में अमरिंदर सिंह ने मना कर दिया था लेकिन जब नई दिल्ली से पटियाला लौटते वक्त फोन पर सोनिया गांधी ने अमरिंदर सिंह से पूछा था, “क्या आप मेरे खातिर यह चुनाव लड़ेंगे?” तब अमरिंदर सिंह ने हामी भर दी थी। इससे पहले प्रियंका गांधी ने भी कैप्टन से अनुरोध किया था, “अंकल, मैं चाहती हूं कि आप अमृतसर से चुनाव लड़ें।” प्रियंका ने तब अपने पिता स्वर्गीय राजीव गांधी और अमरिंदर सिंह की दोस्ती का भावुक याद दिलाई थी। इसके बाद अमरिंदर सिंह ने अमृतसर से न केवल लोकसभा चुनाव लड़ा बल्कि मोदी लहर में उनके खास रहे अरुम जेटली को हराया भी और कांग्रेस को मुस्कुराने का एक बेहतरीन मौका भी दिया।

कैप्टन अमरिंदर सिंह और कांग्रेस हाई कमान के बीच रिश्ते काफी तनावपूर्ण रहे हैं। रैडिफ डॉट कॉम पर छपी खबर के मुताबिक, सितंबर 2015 के अंत में सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अमरिंदर सिंह को न तो उचित सम्मान दिया और न ही बैठने को कहा था। इससे अमरिंदर सिंह काफी नाराज हुए थे। उन दोनों नेताओं के बीच तब कुछ गरमा-गरमी हुई थी। तब सोनिया गांधी ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए कहा था, ‘राहुल.. मत भूलो, तुम अपने दिवंगत पिता के दोस्त से बात कर रहे हो।’  इसके बाद राहुल गांधी का रुख बदल गया था। वो ठंडे पड़ गए थे। राहुल गांधी के इस रुख के बाद अमरिंदर सिंह ने नई पार्टी बनाने का मन लिया था लेकिन फिर बाद में उन्होंने इसे टाल दिया।

(कैप्टन अमरिंदर सिंह की आधिकारिक जीवनी, ‘कैप्टन अमरिंदर सिंह- दि पीपुल्स महाराजा’ लिखने वाले खुशवंत सिंह दिवंगत पत्रकार और मशहूर लेखक खुशवंत सिंह से अलग हैं।)

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