ताज़ा खबर
 

हरमन सिद्धू: वो शख्स जिसकी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने हाइवे के किनारे शराब के ठेकों को बंद करने का सुनाया फरमान

साल 2012 में हरमन ने हरियाणा हाइकोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल करते हुए हाइवे के किनारे से सभी शराब के ठेकों को बंद करने की अपील कर दी।
47 वर्षीय हरमन सिद्धू एक सड़क दुर्घटना के बाद व्हीलचेयर पर अपनी जिंदगी बिता रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला है कि किसी भी हाईवे के 500 मीटर की रेंज में कोई शराब की दुकान नहीं रहेगी। सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के पीछे 47 साल के उस विकलांग का हाथ है जो पिछले 21 सालों से व्हीलचेयर पर अपनी जिंदगी बिताने को मजबूर है। जी हां हरमन सिद्धू नाम के इस अधेड़ उम्र के व्यक्ति ने ही कोर्ट में जमहित याचिका दायर कर के हाइवे किनारे शराब की बिक्री पर बैन की अपील की थी। इनकी इसी अपील का नतीजा है कि 1 अप्रैल से हाइवे के किनारे से शराब के ठेकों को दूर कर दिया गया है।

हरमन सिद्धू के इस पीआईएल दाखिल करने के पीछे वो 24 अक्टूबर 2016 की उस शाम को बड़ा कारण मानते हैं जब हिमाचल के रेणुका से चंडीगढ़ जाते वक्त उनकी गाड़ी पहाड़ी से नीचे गिर गई। इस दुर्घटना में हरमन को इतनी चोट आई कि गर्दन के नीचे पूरे शरीर ने काम करना बंद कर दिया। उस मनहूस शाम ने हरमन को 26 साल की उम्र में ही पूरी जिंदगी के लिए व्हीलचेयर पर बिठा दिया।

अस्पताल में लेटे-लेटे हरमन जब अपनी किस्मत को कोस रहे थे कि उनके साथ ही ऐसा क्यों हुआ तभी उनकी नजर अस्पताल के दूसरे मरीजों पर पड़ी। उन्होंने देखा कि ऐसे मरीजों की कोई कमी नहीं है जो सड़क दुर्घटना का शिकार हुए और अस्पताल में मौत से जंग लड़ रहे हैं। हरमन ने सड़क दुर्घटनाओं पर रिसर्च करना शुरू कर दिया। अपनी रिसर्च में उन्होंने पाया कि भारत में लगभग हर चौथे मिनट में एक शख्स सड़क दुर्घटना में अपनी जान गंवा देता है।

रिसर्च के दौरान उनके हाथ WHO की वो रिपोर्ट लगी जिसमें बताया गया कि लगभग 30 से 35 फीसदी सड़क हादसे शराब पीकर गाड़ी चलाने के कारण होते हैं। हरमन को इस रिपोर्ट ने अंदर तक झकझोर दिया। इस रिपोर्ट को पढ़ने के बाद हरमन ने 2012 में एक सर्वे किया। अपने इस सर्वे में उन्होंने पाया कि पानीपत से जालंधर के बीच 291 किलोमीटर के हाइवे के किनारे 185 शराब की दुकाने हैं। इस सर्वे के बाद हरमन ने ठान लिया कि हाइवे के किनारे के शराब के ठेकों को बंद होना ही चाहिए। साल 2012 में हरमन ने हरियाणा हाइकोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल करते हुए हाइवे के किनारे से सभी शराब के ठेकों को बंद करने की अपील कर दी।

आज पूरे देश में हरमन के उसी जनहित याचिका का असर दिख रहा है जब नेशनल हाइवे के किनारे की शराब के ठेकों पर ताले जड़े जा रहे हैं। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने के लिए हरमन को ढेरों कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ा। मार्च 2014 में जब हरियाणा हाइकोर्ट ने हरियाणा और पंजाब में नेशनल हाइवे के किनारों से ठेके बंद करने का फरमान सुनाया तो उनको धमकियां मिलनी भी शुरू हो गईं। शराब माफिया उन्हें फोनकरके अपनी याचिका वापस लेने के लिए दबाव डालने लगे। एक शराब व्यापारी ने तो उनको 25 करोड़ रुपए की रिश्वत तक ऑफर कर दी। इतना ही नहीं इस फैसले के 6 दिन बाद ही दोनों राज्यों की सरकारों ने इस फैसले पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया।

तमाम मुश्किलों के बाद भी हरमन ने हार नहीं मानी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में भी अपनी लड़ाई जारी रखी। आज उनकी मेहनत रंग लाई है। आज सिर्फ पंजाब हरियाणा ही नहीं देश के हर नेशनल हाइवे से शराब के ठेके बंद करने के आदेश जारी हो चुके हैं।

वडोदरा: हाई प्रोफाइल शराब पार्टी में छापा; IPL के पूर्व कमिश्नर समेत 200 लोग पकड़े गए, देखें वीडियो:

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.
सबरंग