December 07, 2016

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नोटबंदी पर बैंकों की मनमानी से लोग परेशान, बैंक-डाकघरों के बाहर दस रुपए में बिक रहे हैं फार्म

प्रधानमंत्री की ओर से 1000 और 500 के नोट बंद करने की घोषणा के बाद जिले में अफरातफरी का माहौल है।

Author फतेहपुर/ संतकबीरनगर | November 13, 2016 04:57 am
2000 रुपए के नोट दिखाता एक युवक। (Photo Source: AP) चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

प्रधानमंत्री की ओर से 1000 और 500 के नोट बंद करने की घोषणा के बाद जिले में अफरातफरी का माहौल है। बैंकों में पिछले तीन दिनों से लगातार लंबी कतारें लग रही हैं। एटीएम बंद हैं। पैसा न होने से लोगों में रोष है। पांच सौ और एक हजार रुपए के नोट की बंदी के बाद बैंक प्रशासन सरकार के निर्देशों का पालन हो रहा है। शहर में एक-दो एटीएम को छोड़कर बाकी शो पीस बनकर रह गए हैं। शहर से लेकर गांव तक के बैंकों और डाकघरों में आपाधापी मची हुई है। प्रधान डाकघर में यह काम चंद घंटों तक ही चल पाया। शहर के विजया बैंक में दिनभर मुद्रा के बदलाव का काम नहीं किया गया।

खातेदारों की जमा निकासी हुई। इसी तरह पंजाब नेशनल बैंक सिविल लाइन में निकासी के लिए एटीएम की सुविधा दी गई। इससे लोगों को राहत मिली। एचडीएफसी बैंक सिविल लाइन, यूनियन बैंक वर्मा चौराहा, सेंट्रल बैंक चौक, आइडीबीआइ सिविल लाइन, आइसीआइसीआइ बैंक जीटी रोड खेलदार सहित छोटे डाकघरों में जनता चक्कर काटने को मजबूर हुई। साउथ सिटी में खुले बैंकों की शाखाओं में भीड़ लगी रही। शाम को एसबीआइ सिटी ब्रांच का एटीएम शुरू होने से लोगों को राहत मिली। सुरक्षा को देखते हुए हर जगह पुलिस के जवान मुस्तैद रहे। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक व्यवस्था का जायजा लेते नजर आए। कोआपरेटिव बैंक के चेयरमैन जगदीश सिह ने बताया कि 10 करोड़ रुपए की मुद्रा जमा हुई है।

नोटों को बदलने या खाते से पैसे निकालने के काम में बैंक मनमानी कर रहे हैं। बैंक की शाखाएं करीब 2 बजे खुल रही हैं और शाम छह बजे से पहले बंद हो जा रही हैं। मुख्य बैंक शाखाओं को छोड़कर बाकी शाखाओं में नई-पुरानी कैरेंसी प्रशासन दिनभर में नहीं पहुंचा पाया है। नोटों के बदलाव का काम न हो पाने से लोगों में गुस्सा है। यह गुस्सा किसी भी दिन विवाद का कारण बन सकता है।

एक तरफ जहां पांच सौ और एक हजार रुपए के पुराने नोट बंद होने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं इन पुराने नोटों को बदलने में इस्तेमाल होने वाले फार्म की कालाबाजारी हो रही है। बैंक इस फार्म को देने में हीलाहवाली कर रहे हैं। इससे लोगों को मुफ्त में मिलने वाला यह फार्म पांच से दस रुपए में खरीदने पड़ रहे हैं। गोरखपुर जोन के पुलिस महानिरीक्षक (आइजी) ने जोन के सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को बैंकों व डाकघरों से बात कर उपभोक्ताओं को यह फार्म मुफ्त में दिलाने का निर्देश दि।

प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद से पांच सौ और एक हजार रुपए के नोटों को बदलने के लिए जब बैंक गुरुवार को खुले तो लोग बैंक और डाकघर पहुंचे। वहां उपभोक्ताओं से एक निर्धारित फार्म भरवाकर उसके साथ एक पहचान पत्र जैसे पैन कार्ड, आधार कार्ड, राशन कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस के साथ जमा कराया जा रहा है। इतनी औपचारिकता पूरी करने के बाद लोगों के पांच सौ और एक हजार रुपए के नोटों को बदला जा रहा है। इसके लिए बैंकों और डाकघरों के बाहर लोगों की भारी भीड़ लग रही है। बैंककर्मी तरह-तरह के बहाने बनाकर उपभोक्ताओं को वापस लौटा रहे हैं।

इसका फायदा बैंकों और डाकघरों के बाहर के दुकानदार उठा रहे हैं। नोट बदलने में काम आने वाले फार्म की वह कालाबाजारी कर रहे हैं। एक फार्म को पांस से दस रुपए में बेंच रहे हैं। कुछ उपभोक्ताओं ने कहा कि इस कालाबजारी में बैंककर्मियों की भी मिलीभगत है। इसकी सूचना जब आइजी पुलिस मोहित अग्रवाल को मिली तो उन्होंने जोन के सभी पुलिस अधीक्षकों को फार्म की कालाबजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने पुलिस अधीक्षकों को निर्देष दिया कि वो बैंकों और डाकघरों से बातचीत कर लोगों को ये फार्म मुफ्त में उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारी बैंक और डाकघर के मुख्य द्वार पर मुफ्त में फार्म का काउंटर लगवाएं। इन काउंटरों पर मोटे अक्षरों में लिखा हो कि यहां पर पुराने नोट बदलने के लिए फार्म मुफ्त में उपलब्ध है।
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First Published on November 13, 2016 4:57 am

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