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कांग्रेस से निकाला जाना नाकामी के जैसा था: प्रणब मुखर्जी

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की उस पुस्तक का गुरुवार को उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने विमोचन किया, जिसमें इंदिरा गांधी की हत्या, बाबरी मस्जिद का ढांचा ढहाया जाना, आॅपरेशन ब्लू स्टार और राजीव गांधी कैबिनेट से उनका निकाला जाना...
Author नई दिल्ली | January 29, 2016 00:45 am
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की पुस्तक उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने विमोचन किया,

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की उस पुस्तक का गुरुवार को उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने विमोचन किया, जिसमें इंदिरा गांधी की हत्या, बाबरी मस्जिद का ढांचा ढहाया जाना, आॅपरेशन ब्लू स्टार और राजीव गांधी कैबिनेट से उनका निकाला जाना सहित उनके राजनीतिक जीवन की अहम घटनाआें का जिक्र किया गया है।

राष्ट्रपति ने ‘द टरबुलेंट इयर 1980-1996’ में 1980 और 1990 के दशक के उन कुछ यादगार घटनाक्रमों का जिक्र किया है, जिन्हें आजादी के बाद के भारत के इतिहास में सर्वाधिक कलह पैदा करने वाला माना जाता है। मुखर्जी ने राजीव गांधी की कैबिनेट और कांग्रेस पार्टी से खुद को निकाले जाने को एक ‘नाकामी’ जैसा माना है, जिसे उन्होंने खुद पैदा किया था।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘मैंने पुस्तक में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि मुझे ऐसी परिस्थिति नहीं लानी चाहिए थी क्योंकि मैं कभी भी जन नेता नहीं था और मेरा कभी उस तरह का समर्थन आधार नहीं था जैसा कि 1960 के दशक में अजय मुखर्जी या हाल में ममता जैसे बागी नेताओं और एक तरह से खुद इंदिरा जी का था।’ मुखर्जी ने राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने से लेकर राष्ट्र के नेता के तौर पर पीवी नरसिम्हा राव के उभरने तक हर बड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर नए सिरे से प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा, ‘यह पाठकों को पढ़ना है और अपने खुद के निष्कर्ष पर पहुंचना है।

मैंने जानबूझ कर उन विषयों पर बात नहीं की जो अत्यधिक गोपनीय हैं। मेरा थोड़ा सा रूढ़िवादी रूख है। जब कभी सरकार तथ्यों को जारी कर देगी, लोग जान जाएंगे। ऐसे किसी व्यक्ति के हवाले से नहीं जो सरकार में मौजूद था।’ दोनों नेताओं ने उस वक्त के राजनीतिक हालात और राजीव को प्रधानमंत्री नियुक्त करने के बारे में कांग्रेसजनों की राय पर चर्चा की थी। राजीव प्रधानमंत्री बनने पर सहमत हो गए थे।
प्रणब आगे लिखते हैं, ‘मैं बाथरूम से बाहर आया और राजीव के फैसले से हर किसी को वाकिफ करा दिया।’

पहले राजीव कैबिनेट और फिर कांग्रेस से रुखसत होने के लिए जिम्मेदार हालात के बारे में लिखते हुए प्रणब ने स्वीकार किया है कि वह ‘राजीव की बढ़ती नाखुशी और उनके इर्द-गिर्द रहने वालों के बैर-भाव को भांप गए थे और समय रहते कदम उठाया।’

राष्ट्रपति ने लिखा है, ‘इस सवाल पर कि उन्होंने मुझे कैबिनेट से क्यों हटाया और पार्टी से क्यों निकाला, मैं सिर्फ इतना ही कह सकता हूं कि उन्होंने गलतियां की और मैंने भी की। वह दूसरों की बातों में आ जाते थे और मेरे खिलाफ उनकी चुगलियां सुनते थे। मैंने अपने मेरे धैर्य पर अपनी हताशा हावी हो जाने दी।’ गौरतलब है कि प्रणब को अप्रैल 1986 में कांग्रेस छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस (आरएससी) नाम की पार्टी बनाई थी।

बहरहाल, प्रणब का मानना है कि वह आरएससी बनाने की भूल को टाल सकते थे। उन्होंने लिखा है, ‘मुझमें यह समझदारी होनी चाहिए थी कि मैं जनाधार वाला नेता नहीं था (और न हूं)। कांग्रेस को छोड़ने वाले शायद ही कामयाब हुए। साल 1986 और 1987 के निर्णायक सालों के दौरान जब राजीव के लिए सब कुछ गलत होता दिख रहा था, उस वक्त मैं कांग्रेस पार्टी और सरकार को कुछ मदद कर सकता था।’ प्रणब इसके दो साल बाद कांग्रेस में लौट आए थे ।

राजनीतिक जीवन में प्रवेश के बाद संस्मरण का यह दूसरा हिस्सा है। इस मौके पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, पूर्व कैग विनोद राय, पूर्व केंद्रीय मंत्री करन सिंह सहित अन्य लोग मौजूद थे।

 

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