December 04, 2016

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राम के नाम पर जारी है उप्र में जारी चुनावी घमासान

उत्तर प्रदेश में राम को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। राम के संपूर्ण जीवन वृतांत में समय-समय पर राजनीति ने जो अहम किरदार अदा किया, वैसा ही आज भी करने की कोशिशें जारी हैं।

उत्तर प्रदेश में राम को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। राम के संपूर्ण जीवन वृतांत में समय-समय पर राजनीति ने जो अहम किरदार अदा किया, वैसा ही आज भी करने की कोशिशें जारी हैं। अब उसकी जगह सियासी नफा-नुकसान ने ले ली है। इसी को ध्यान में रख कर विधानसभा चुनाव के कुछ पहले उत्तर प्रदेश में नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी और अखिलेश यादव को राम याद आए हैं। कोई राम को संग्रहालय में रखना चाहता है, तो कोई राम के नाम पर थीम पार्क बनवाने का एलान कर चुका है। नजरें उन रामावलंबियों पर है जिनकी संख्या उत्तर प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा सीट पर है। इस बीच केंद्र के एक मंत्री ने यहां तक कह दिया है कि प्रधानमंत्री चाहते हैं कि रामराज कायम हो।

कुछ महीने बाद उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव है। इस बात का इल्म चुनाव आयोग कराए, उसके पहले ही राम के प्रति राजनीतिक दलों के मन में पनपे प्रेम से हो जाता है। उत्तर प्रदेश का मतदाता राम के नाम की राजनीति बढ़ते ही अंदाज लगा लेता है कि चुनाव सर पर हैं। और इसलिए अखिलेश सरकार ने अयोध्या में रामलीला केंद्र में थीम पार्क का निर्माण कराने का एलान किया है। चुनाव सर पर हैं इसलिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार अयोध्या में राम के नाम पर म्यूजियम बनवाने जा रही है। चुनाव सर पर हैं इसलिए विजयदशमी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लखनऊ के ऐशबाग रामलीला मैदान पर जय श्रीराम का उद्घोष करते दिखे और जनता से भी उन्होंने अपने स्वर में स्वर मिलाने की इच्छा जताई।

राम को आधार बना कर हो रही राजनीति पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता विनय कटियार कहते हैं, एक साल पहले से अयोध्या में रामायण संग्रहालय का निर्माण होना प्रस्तावित है, लेकिन अब तक उसके लिए जमीन तक नहीं दी जा सकी। जिस जमीन का चिह्नीकरण किया भी गया, उस पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राम थीम पार्क के निर्माण की घोषणा कर दी।
राम के नाम पर संग्रहालय और थीम पार्क के निर्माण से विनय कटियार खासे दुखी हैं। वे कहते हैं, अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण न हो पाने की बेहद तकलीफ है मुझे। बिना राम मंदिर का निर्माण हुए अयोध्या सूनी है। राम मंदिर का निर्माण कराए जाने पर सरकार को पहल करनी चाहिए। चाहे वह बात-चीत का रास्ता हो, अदालत की शरण हो या लोकसभा में बिल पास करवाना हो। उसे पास करवाना चाहिए। उन्होंने कहा कि माना कि राज्यसभा में अभी हमारे पास बहुमत नहीं है लेकिन लोकसभा में तो है। वहां राम मंदिर के निर्माण का बिल पास कराया जा सकता है। राज्यसभा में जब बहुमत आएगा, उस वक्त देखेंगे। कम से कम हम यह कह पाने की स्थिति में तो होंगे कि जो मेरे सामर्थ्य में था वो किया।

उधर, अयोध्या में कारसेवकपुरम में मंगलवार को आयोजित केंद्रीय पर्यटन व संस्कृति मंत्री डा. महेश शर्मा ने कहा कि हम राम के नाम पर राजनीति नहीं कर रहे हैं। राम हमारी आस्था के प्रतीक हैं। प्रधानमंत्री चाहते हैं कि रामराज कायम हो। देश उनके आदर्शों पर चले। राजनीति तो वे कर रहे हैं जिनके पास दो महीने का समय बचा है और वे राम के नाम पर अंतरराष्ट्रीय थीम पार्क बनाने की मंजूरी दे रहे हैं। वे चार साल से क्या कर रहे थे।
वहीं उत्तर प्रदेश के कबीना मंत्री शिवपाल सिंह यादव कहते हैं कि विधानसभा चुनाव आ गए हैं। अब तो भाजपा को राम और अयोध्या की याद आएगी ही। अब तक दोनों उन्हें याद नहीं थे।

फिलहाल, उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में राम पर राजनीति फिर गति पकड़ने जा रही है। राम को केंद्र में रख कर केंद्र व उत्तर प्रदेश की सरकारें अलग राग अलापने की पटकथा तैयार कर चुकी हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि इस बार राम का लाभ भाजपा और सपा में से किसे अधिक होता है। वहीं पिछले दिनों किसान यात्रा के दौरान राहुल गांधी का अयोध्या पहुंच कर हनुमान गढ़ी में दर्शन करना भी इस बात का इशारा है कि वे राम तक तो नहीं, लेकिन उनके भक्त तक पहुंचने का साहस जरूर बटोर पाए हैं। आगामी विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी और कांग्रेस राम के मसले पर अपने पत्ते छिपाए रखने पर अधिक केंद्रित है।

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First Published on October 20, 2016 12:15 am

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