December 09, 2016

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करेंसी मुद्दे पर पीएम मोदी ने किया विरोध‍ियों पर पलटवार, कहा- बेईमानों के दिन खत्‍म करके रहेंगे

प्रधानमंत्री ने कहा, 'मुझे तो बचपन से कड़क चाय बनाने की आदत है। मैंने निर्णय कड़क लिया। गरीब को कड़क चाय भाती है लेकिन अमीर का मुंह बिगड़ जाता है।’

Author गाजीपुर | November 14, 2016 18:23 pm
उत्तर प्रदेश के गाज़ीपुर में भाजपा की परिवर्तन रैली को संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (PTI Photo/14 Nov, 2016)

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार (14 नवंबर) को 500 और हजार रुपए के नोटों का चलन बंद किये जाने को लेकर अपनी सरकार पर हमलावर हुए विपक्ष, खासकर कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि ईमानदारी के महायज्ञ से तकलीफजदा इस पार्टी ने भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए नहीं, बल्कि इंदिरा गांधी की गद्दी बचाने के लिए आपातकाल लगाकर देश को जेलखाना बना दिया था। प्रधानमंत्री मोदी ने यहां आयोजित परिवर्तन यात्रा रैली में माना कि 500 और हजार रुपए के नोट बंद किये जाने से आम लोगों को तकलीफ हो रही है, जिसकी खुद उन्हें भी बहुत पीड़ा है और वह उसे दूर करने के लिए दिन-रात एक कर रहे हैं, लेकिन देश से आतंकवाद, नक्सलवाद और उग्रवाद की जड़ काटने और बेईमानी से जमा किए गए धन को खत्म करने के लिये यह ’कड़क’ कदम उठाना जरूरी था।

मोदी ने कहा कि वह इस मुद्दे को लेकर देश की जनता को गुमराह करने वाले नेताओं खासकर कांग्रेस से पूछना चाहते हैं कि क्या उसने भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए आपातकाल लगाकर देश को जेलखाना बनाया था? देश को याद है कि इलाहाबाद की अदालत ने इंदिरा गांधी को सांसद पद से हटा दिया था। कांग्रेस ने सिर्फ उनकी गद्दी बचाने के लिये देश को जेलखाना बना दिया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस वालों ने तो अपनी कुर्सी के लिए 19 महीने देश को जेलखाना बना दिया था। मैंने तो गरीबों की खुशी के लिए थोड़े दिन तकलीफ झेलने की प्रार्थना की है। मुझे एक बार फिर आशीर्वाद दीजिये। मेरे देश में बेईमानों के दिन खत्म होकर रहेंगे। मोदी ने कहा कि सीमापार से हमारे दुश्मन नकली नोट छापकर हमारे देश में भेज रहे हैं। मैं उन नेताओं से पूछना चाहता हूं कि आतंकवाद और नक्सलवाद के खिलाफ लड़ने के लिये यह जाली नोटों का खात्मा होना चाहिए कि नहीं? मुझे बताइये कि 500 और 1000 की नोट पर अगर मैं हमला ना बोलता तो क्या जाली नोट खत्म हो सकते थे? जब से इन नोटों पर हमला बोला है तब से यह नेता परेशान हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, ’मेरे बचपन में लोग कहते थे कि मोदी जी जरा चाय कड़क बनाना। मुझे तो बचपन से आदत है। मैंने निर्णय कड़क लिया। गरीब को कड़क चाय भाती है लेकिन अमीर का मुंह बिगड़ जाता है।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि ये कांग्रेस वाले आज मुझे समझा रहे हैं कि किस कानून के जरिये आपने हजार और 500 के नोट बंद कर दिए। मैं पूछता हूं कि आपकी सरकार ने चवन्नी क्यों बंद की थी। यह ठीक है कि आप चवन्नी से आगे चल नहीं पाते। आपने अपनी बराबरी का काम किया और हमने अपनी बराबरी का काम किया है।’ उन्होंने कहा, ‘मैंने ईमानदारी का महायज्ञ शुरू किया है। यह सब देश से भ्रष्टाचार खत्म करने के जनता से किये गये वादे को पूरा करने के लिये ही हो रहा है। घर में नया कलर कराने पर उसकी गंध हफ्ता-10 दिन रहती है, लेकिन घर में शादी होने पर लोग इस गंध के बावजूद दीवारों पर कलर कराते हैं इसलिये कोई भी नया काम करो, तकलीफ होती ही है। हां इरादा नेक होना चाहिS।’

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचारियों के घर-घर जाकर कालाधन ढूंढने का काम बहुत मुश्किल था। ऐसे में 500 और हजार रुपये के नोटों को अचानक बंद करना जरूरी था। ‘इससे सामान्य नागरिकों को जो मुसीबत हो रही है, उसकी मुझे बहुत पीड़ा है। मैं रात-रात जागकर आपकी तकलीफ कम करने के लिये जो हो रहा है, मैं कर रहा हूं और करता रहूंगा।’ मोदी ने कहा कि शहरों में लोग रात में नजर बचाकर कचरे के डिब्बे में नोट फेंककर जा रहे हैं। गंगा में अब हजार और 500 के नोट बह रहे हैं, मगर पापियों के पाप गंगा में नोट बहाकर भी नहीं धुलने वाले। प्रधानमंत्री ने दोहराया कि वह जानते हैं कि इस कदम के बाद उन पर क्या बीतेगी। खजानों के मालिक तो सरकारों को खरीदने और भविष्य को तबाह करने की ताकत रखते हैं लेकिन जनता बताए कि क्या उन्हें ऐसे लोगों से डरकर ईमानदारी छोड़ देनी चाहिये। उन्होंने जनता का आशीर्वाद साथ होने की वजह से इतनी बड़ी लड़ाई मोल ली है। उन्होंने एक बार फिर जनता से 50 दिन मांगे और कहा कि 30 दिसम्बर तक सारी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

पुरबिया बोली के साथ अपने भाषण की शुरुआत करने वाले प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर गंगा नदी पर रेल सह सड़क पुल परियोजना समेत कई परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया और कहा कि उन्होंने इस काम के लिए प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की जन्मतिथि जानबूझकर चुनी है। प्रधानमंत्री का तंज भरा इशारा कांग्रेस सरकारों की तरफ था। उन्होंने कहा कि वर्ष 1962 में पंडित नेहरू के प्रधानमंत्रित्वकाल के दौरान गाजीपुर के सांसद विश्वनाथ ने संसद में रोकर कहा था कि पंडित जी आप प्रदेश से चुनकर आये हैं, उसी राज्य के पूर्वांचल में इतनी भयानक गरीबी है कि वहां के लोग गोबर में से गेहूं के दाने चुन-चुनकर उन्हें धोकर अपना पेट भरते हैं। उस वक्त हर कोई इस परिस्थिति का बयान सुनकर हिल गया था।

उन्होंने कहा कि तब नेहरू ने एच. एम. पटेल कमेटी बनायी थी, जिसने इलाके के विकास के लिये सिफारिशें की थीं। नेहरू के बाद उत्तर प्रदेश से सात और प्रधानमंत्री आये और चले गये, मगर वह रिपोर्ट डिब्बे में बंद रही। मैंने यहां आने के लिये 14 नवम्बर की तारीख जानबूझकर चुनी है। पंडित जी आपके जन्मदिन पर ही वह अधूरा काम आज मैं पूरा करने की शुरुआत कर रहा हूं। आपको ऐसी श्रंद्घांजलि पहले कभी नहीं मिली होगी। मोदी ने कहा कि 1962 में सिफारिश की गयी थी कि गंगा नदी पर पुल बनाकर रेल पटरी डाल दी जाए तो विकास के अवसर मिलेंगे। सरकारें आयीं और गयीं लेकिन गंगा को पार करने की कोई व्यवस्था नहीं हुई। आज मुझे पुल के शिलान्यास का अवसर मिला। यह काम समय सीमा में पूरा होगा।

उन्होंने गाजीपुर के किसानों और कामगारों से संवाद स्थापित करते हुए कहा कि यहां पर कन्नौज से भी अच्छे इत्र की पैदावार होती थी, लेकिन वह खत्म हो गयी। मुझे दोबारा वह रौनक लानी है। किसानों की जिंदगी में नयी ताकत पैदा करनी है। यहां की सब्जी में विशिष्ट स्वाद होता है, अगर उसे बाहर ले जाने की व्यवस्था हो जाए तो यहां के किसान को फायदा होगा। हमने पेरिशेबल गुड्स इकाई के लिये इसकी व्यवस्था की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान नौ मई 2014 को उन्होंने जनता से वादा किया था कि वह उसके प्यार को देश का विकास करके ब्याज सहित लौटाएंगे। इसे पूरा करने की दिशा में गोरखपुर में उर्वरक का कारखाना हमने जिंदा किया है और एम्स की स्थापना की शुरुआत करायी है। देश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की गयी है जिससे किसानों को बड़ी राहत दी गयी है।

इसके पूर्व, मोदी वाराणसी के बाबतपुर हवाई अड्डे पर उतरने के बाद गाजीपुर पहुंचे और गंगा नदी पर ताड़ीघाट-गाजीपुर-मउ रेल सह सड़क पुल परियोजना का बटन दबाकर शिलान्यास किया। इसकी अनुमानित लागत 1762 करोड़ रुपये है। करीब 51 किलोमीटर लम्बी इस परियोजना को 36 महीने में पूरा करने का लक्ष्य है। इससे गाजीपुर शहर गंगा के दूसरे किनारे से जुड़ जाएगा। मोदी ने 65.1 किलोमीटर लम्बे गाजीपुर सिटी-बलिया रेलखण्ड के दोहरीकरण का भी शिलान्यास किया। उन्होंने गाजीपुर-कोलकाता के बीच चलने वाली शब्दभेदी एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखायी। साथ ही पेरिशेबल कार्गो केन्द्र का भी लोकार्पण किया। प्रधानमंत्री ने 100 प्रतिशत डाक बचत कराने वाले ग्राम प्रधानों को पुरस्कार चिह्न दिये तथा पांच बच्चियों को सुकन्या समृद्घि खाते की पासबुक प्रदान की। कार्यक्रम को रेल मंत्री सुरेश प्रभु, संचार राज्यमंत्री मनोज सिन्हा तथा प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल, मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री महेन्द्रनाथ पाण्डेय तथा राज्यपाल राम नाईक भी मौजूद थे।

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First Published on November 14, 2016 6:23 pm

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