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जल संकट वाले जिलों में विशेष पैकेज बनाने की सिफारिश

समिति ने देश के अनेक शहरों में नगर निगम स्रोतों से आधे घंटे से भी कम पानी मिलने और गर्मी में जल संकट के और गंभीर होने का जिक्र किया है।
Author नई दिल्ली | May 3, 2016 01:36 am
जल संकट से जूझ रहे लातूर में सिर पर पानी लेकर जाती एक लड़की। (रॉयटर्स फोटो)

संसद की एक समिति ने सिफारिश की है कि शहरी विकास मंत्रालय, राज्य सरकार के साथ मिलकर कदम उठाए और जल संकटग्रस्त शहरों के लिए विशेष पैकेज सृजित करने और जल संयंत्रों को चालू करने की त्वरित पहल करे। समिति ने देश के अनेक शहरों में नगर निगम स्रोतों से आधे घंटे से भी कम पानी मिलने और गर्मी में जल संकट के और गंभीर होने का जिक्र किया है।

शहरी विकास मंत्रालय से जुड़ी 2016-17 की अनुदानों की मांगों पर स्थायी समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति चाहती है कि सरकार प्रेषण और वितरण प्रणाली में हानियों को न्यूनतम करने, शोधन संयंत्रों द्वारा जल पुनर्चक्रण, वर्षा जल संचयन और शहर की झीलों के पुनरुद्धार, जल के उपयोग और व्यापक वृक्षारोपण के माध्यम से जल संरक्षण के लिए पहल करे।

समिति सिफारिश करती है कि सरकार लातूर और जलाभाव वाले अन्य शहरों के लिए विशेष वित्त पोषण के प्रावधान के साथ उन्हें अमृत मिशन में शामिल करे। रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति पाती है कि ऐसी स्थिति आ गई है कि व्यवहारत: भारत के किसी भी शहर को अपने निवासियों की आवश्यकता पूरी करने के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। अनेक शहरों में लोगों को नगर निगम के स्रोतों से प्रत्येक वैकल्पिक दिन पर आधे घंटे से भी कम पानी मिलता है। गर्मी के शुष्क मौसम में नल लगातार कई कई दिनों तक सूखे रहते हैं और लोग ऐसे समय में पानी से वंचित हो जाते हैं, जब उन्हें इसकी सबसे अधिक जरूरत होती है।

समिति ने कहा कि लातूर (महाराष्ट्र) में पानी की गंभीर कमी के कारण कानून और व्यवस्था सहित हालात खराब हो गई है। शहर में बांध में उसकी क्षमता का केवल एक फीसद पानी बचा है। समिति यह नोट करके विचलित है कि न तो केंद्र सरकार के पास जल समस्या के समाधान की कोई पृथक योजना है और न ही 3 लाख से अधिक जनसंख्या होने के बावजूद इसे अमृत योजना में शामिल किया गया है।

शहरों में आधारभूत संरचना के सुदृढीकरण के लिए शहरी परिवर्तन मिशन शुरू किया गया है। इसे अमृत मिशन के नाम से भी जाना जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, समिति जल संकटग्रस्त शहर के लिए इस सौतेले व्यवहार को अत्यंत अस्वीकार्य पाती है। समिति का विचार है कि इस प्रकार की स्थिति केवल लातूर तक ही सीमित नहीं है। समिति पुरजोर सिफारिश करती है कि शहरी विकास मंत्रालय, राज्य सरकार के साथ मिलकर कदम उठाए और जल संकट ग्रस्त शहरों के लिए विशेष पैकेज सृजित करे और जल संयंत्रों को तुरंत चालू करने की पहल करे।

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