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ओडिशा : गर्म सरिए से इलाज कर रहा था तांत्रिक, मर गई बच्ची

बच्ची के भाई को भी गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
चित्र का इस्‍तेमाल केवल प्रस्‍तुतिकरण के लिए किया गया है।

देश में अंधविश्वास अब भी जारी है और लोग कहीं न कहीं मेडिकल साइंस की अनदेखी कर तांत्रिकों के चक्कर में पड़ जाते हैं। एेसी ही एक घटना ओडिशा में हुई जहां एक आठ साल की बच्ची की रविवार रात उस वक्त मौत हो गई जब एक तांत्रिक ने दस्तों का इलाज करने के लिए उसके पेट पर गर्म लोहे का सरिया रख दिया। बच्ची के जुड़वां भाई के साथ भी यही किया गया था और उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस साल कई बच्चों की मौत तांत्रिकों से इलाज कराने के कारण हो चुकी है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कालाहांडी जिले के बाराखामा गांव के रहने वाले नबीन और भारती दिगल के दोनों बच्चे अकसर पेट दर्द और दस्तों से पीड़ित रहते थे।

स्थानीय लोगों के मुताबिक बच्चों के मां-बाप उन्हें स्थानीय प्राथमिक चिकित्सा केंद्र भी लेकर गए थे, लेकिन उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हो पाया। इसके बाद एक स्थानीय तांत्रिक झूनू ने भारती को सलाह दी कि वह गर्म लोहे के सरिया से बच्चों का इलाज करता है। शनिवार की रात जब नबीन घर पर नहीं था तो झूनू उसके घर पहुंचा और उसकी करतूतों के कारण रविवार सुबह बच्ची को बलिगुडा सब डिविजनल हॉस्पिटल में मृत घोषित कर दिया गया।

हॉस्पिटल में बच्ची का इलाज कर रहे डॉक्टर जगदीश चंद्र जेना ने कहा कि बच्ची की मौत सेप्टीसीमिया (खून में इन्फेक्शन) के कारण हुई थी। उन्होंने कहा कि बच्ची के भाई के शरीर में भी गर्म सरिए के कारण इन्फेक्शन फैल गया है।

बता दें कि इस साल एेसे कई हादसे हुए हैं जिनमें माता-पिता के अंधविश्वास के कारण कई बच्चों की मौत हुई है। इसी साल मार्च में राउरकेला की रहने वाली एक 65 वर्षीय महिला को एक महीने के बच्चे का गर्म चूड़ियों से इलाज करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उस बच्चे की मौत हो गई थी। इसी महीने में मलकागिरी जिले में एक 4 साल के बच्चे की मौत तब हो गई जब उसके दादा ने गर्म लोहे से उसका इलाज करने की कोशिश की। मार्च में ही नबरंगपुर के नंदाहांडी ब्लॉक में एक महीने की बच्चे के पेट और छाती पर गर्म सरिया रखने से मौत हो गई थी।

 

 

 

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