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आरएसएस मैगजीन ने कहा- ओणम में महाबली नहीं भगवान विष्‍णु का स्‍वागत होना चाहिए

इस लेख के अनुसार महाबली ने अपने सारे यज्ञ गुजरात में नर्मदा नदी के किनारे कराए थे। महाबली के साम्राज्‍य में केरल का तो जिक्र भी नहीं है।
Author तिरुवनंतपुरम | September 10, 2016 14:20 pm
महाबली की तरह तैयार एक कलाकार। (Express File Photo by Prashant Nadkar)

केरल में अगले सप्‍ताह ओणम मनाया जाएगा। इससे ठीक पहले राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ(आरएसएस) की एक मैगजीन ने इस त्‍योहार को मनाए जाने के पीछे की वजह पर फिर से ध्‍यान देने को कहा है। आरएसएस के मलयालम मुखपत्र ‘केसरी’ में एक लेख में कहा गया है कि असुर राजा महाबली के बजाय ओणम में भगवान विष्‍णु के वामन अवतार का स्‍वागत किया जाना चाहिए। सरकारी संस्‍कृत कॉलेज के संस्‍कृत के प्रोफेसर उन्‍नीकृष्‍णन नंबूतिरि ने अपने लेख में लिखा कि पुराणों में बहुत कम ऐसे प्रमाण हैं जो यह सिद्ध करते हैं कि ओणम महाबली के स्‍वागत में मनाया जाता है। जिस तरह से महाबली को दिखाया जाता है उस तरह के उनके तोंद और लंबी मूंछे नहीं थी। हिंदी ऐक्‍य वेदी की प्रेसीडेंट केपी शशिकला ने कहा, ”वामन विष्‍णु का अवतार थे। पुराणों में बताया गया है कि महाबली भी विष्‍णु की पूजा करते थे। इसलिए ओणम विष्‍णु की अनदेखी करने का अवसर नहीं है। उन्‍हें स्‍वतंत्रता सेनानी के रूप में देखना चाहिए जिन्‍होंने केरल को साम्राज्‍यवादी ताकत(महाबली) से आजाद कराया।”

उन्‍होंने कहा कि वर्तमान में चल रही परंपरा हिंदू धर्म का अपमान और कलंकित करने वाली है। इस लेख के अनुसार महाबली ने अपने सारे यज्ञ गुजरात में नर्मदा नदी के किनारे कराए थे। महाबली के साम्राज्‍य में केरल का तो जिक्र भी नहीं है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर आरएसएस पर हमला बोला है। कांग्रेस नेता वीटी बलराम ने कहा कि ओणम को नया रूप देना इस त्‍योहार को साम्‍प्रदायिक रंग देने का प्रयास है। ‘केसरी’ के इस महीने के कवर पर भी वामन अवतार की फोटो प्रकाशित की गई है। इस बारे में केरल भाजपा अध्‍यक्ष कुमानम राजशेखरन ने कहा कि केसरी में छपा यह लेख भाजपा या आरएसएस का आधिकारिक स्‍टैंड नहीं माना जा सकता।

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