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रोडवेज के निजीकरण के विरोध में श्रमिक संगठन आंदोलन की राह पर

राजस्थान में भाजपा सरकार के रोडवेज को निजी हाथों में सौंपने के विरोध में केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है।
राजस्थान में भाजपा सरकार के रोडवेज को निजी हाथों में सौंपने के विरोध में केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है।

राजस्थान में भाजपा सरकार के रोडवेज को निजी हाथों में सौंपने के विरोध में केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। श्रमिक संगठनों का आरोप है कि भाजपा सरकार गठन के बाद से ही प्रदेश में रोडवेज को बंद कर उसका निजीकरण करने में लगी है। संगठनों ने मांग कि है कि सरकार इस तरह के कदम उठाने बंद करे। संगठनों ने चेतावनी दी है कि निजीकरण के विरोध में रोडवेज के श्रमिक और कर्मचारी काम बंद कर सरकार का जमकर विरोध करेंगे। प्रदेश के इंटक, एटक, सीटू और हिंद मजदूर सभा के साथ ही कई केंद्रीय कर्मचारी और श्रमिक संगठनों के नेताओं ने शुक्रवार को यहां सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों पर अपनी गहरी नाराजगी जताई। एटक के प्रदेश अध्यक्ष एमएल यादव, इंटक के प्रदेश महामंत्री विनोद मेहता, एचएमएस के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश माथुर, सीटू के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र शुक्ला और केंद्रीय कर्मचारी और श्रमिक महासंघ के सचिव आरके मीणा के साथ कई श्रमिक नेताओं ने साझा तौर पर सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि रोडवेज को किसी भी हालत में बंद नहीं करने दिया जाएगा।

इन नेताओं का कहना था कि भाजपा सरकार राजस्थान लोक परिवहन सेवा के नाम पर प्राइवेट बसों का संचालन रोडवेज के बस स्टैंडों से करना चाहती है। इसका प्रमुख मकसद बस स्टैंडों की बेशकीमती जमीन भूमाफियाओं को सौंपना है। सरकार पुलिस बल के मार्फत इसको कब्जाने की कोशिश में है। रोडवेज के श्रमिकों और कर्मचारियों के बढ़ते विरोध के चलते अभी तक प्राइवेट बसों का संचालन बस स्टैंडों से नहीं हो पा रहा है।

श्रमिक संगठनों का कहना है कि सरकार ने राजस्थान बस अड्डा प्राधिकरण का गठन कर प्रदेश में रोडवेज के 84 बस स्टैंडों को हड़पने का खाका तैयार किया है। सरकार साजिश के तहत मध्य प्रदेश की तर्ज पर राजस्थान में भी रोडवेज को खत्म करने की तैयारी में लग गई है। भाजपा की सरकार बनने के फौरन बाद से ही इस दिशा में कई काम किए गए हैं। रोडवेज में नई बसों की खरीद भी नहीं की जा रही है। श्रमिक संगठनों ने मांग कि की रोडवेज को लेकर सरकार की तरफ से किए गए सभी फैसलों पर फिर से विचार किया जाए। प्रदेश की जनता रोडवेज की सेवाओं से संतुष्ट है, इसलिए जनहित में रोडवेज को बेहतर तरीके से संचालित किया जाए। रोडवेज उद्योग को मजबूत करने और इसका फैलाव करने की योजना बनाई जाए। राजस्थान लोक परिवहन सेवा के नाम पर प्राइवेट बसों के परमिट जारी करने पर रोक लगाई जाए। रोडवेज में स्थाई तौर पर श्रमिकों और कर्मचारियों की भर्ती की जाए। इसके साथ ही रिटायर कर्मचारियों को पेंशन और भत्तों का फौरन भुगतान किया जाए।

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