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भाजपा शासित असम में इस मुस्लिम शख्स ने तैयार की दुनिया की सबसे लंबी मां दुर्गा की प्रतिमा

101 फीट ऊंची दुर्गा की प्रतिमा बनाने के लिए उन्होंने 5000 बांस की लकड़ियां, बांस का...

नवरात्र को लेकर देश भर में भक्ति और खुशी का माहौल है। असम में इसी बीच दुनिया की सबसे ऊंची मां दुर्गा की प्रतिमा तैयार की गई है। खास बात है कि इसे किसी हिंदू ने नहीं बल्कि मुस्लिम शख्स ने बनाया है। गिनीज बुक में इसका नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन भी किया गया है। असम के गुवाहाटी में नुरुद्दीन अहमद (59) सपरिवार रहते हैं। उन्होंने बताया कि “मुझे हिंदू देवी-देवताओं की प्रतिमाएं बनाने में कोई दिक्कत नहीं है। मैं 1975 से इस पेशे में हूं। मैंने तब उत्तरी लखीमपुर में मिट्टी व बांस से पहली दुर्गा की प्रतिमा तैयार की थी, जिसके बाद से हर साल मैं इन्हें बना रहा हूं। सिर्फ 1991 में स्वास्थ्य में गड़बड़ी के चलते प्रतिमाएं नहीं बना पाया था।”

101 फीट ऊंची दुर्गा की प्रतिमा बनाने के लिए उन्होंने 5000 बांस की लकड़ियां, बांस का डोला (चावल साफ करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाली ट्रे), सलोनी ( बांस की छलनी), पासी और खोड़ाही (बांस की टोकरियां) और असम की पारंपरिक टोपी जापी का प्रयोग किया। अहमद के मुताबिक, कई लोगों ने उनके मुस्लिम होने पर भी दुर्गा की प्रतिमाएं बनाने को लेकर सवाल किया था। चूंकि वह असम की संस्कृति मे पले-बढ़े हैं, लिहाजा वहां पर देश के अन्य हिस्सों के मुकाबले धार्मिक सहनशीलता अधिक है। चांदसाई को ही ले लीजिए, मुस्लिम होने के बाद भी वह असम के सामाज और धार्मिक सुधारक रहे श्रीमंत संक्रदेव की अनुनायी थीं।

अहमद 1970 के दौरान मुंबई के जेजे कॉलेज से आर्ट्स में पढ़ाई कर रहे थे। लेकिन बीच में वह असम लौट आए और यहां की स्थानीय फिल्म इंडस्ट्री में काम करने लगे। उन्हें तकरीबन 100 फिल्मों में काम करने का अनुभव है। यही नहीं, वह बतौर आर्ट डायरेक्टर कई पुरस्कार भी जीत चुके हैं। देवी-देवताओं की प्रतिमाएं बनाने के लिए नुरुद्दीन के साथ उनकी टीम में 40 लोग हैं। उनमें कुछ हिंदू हैं, तो कुछ मुस्लिम। यहीं की एक पूजा समिति से जुड़े हुए प्रशांत बोस ने बताया कि हमें गर्व है कि नुरुद्दीन अहमद हमारे साथ पिछले सात सालों से हैं।

अहमद की पत्नी जुनू राजखोवा स्कूल टीचर और एनसीसी ट्रेनर हैं। घर में उनके अलावा दूसरे बेटे दीप की पत्नी संध्या भी हिंदू है। वह बताते हैं कि “मैं रोज मस्जिद जाता हूं। पत्नी रोज पूजा करती है और नाम घर (असम में पूजनीय स्थल) जाती है। ” प्रख्यात शक्ति पीठ कामाख्या के पुजारियों को भी मुस्लिमों के हिंदू देवी-देवताओं की प्रतिमाएं बनाने पर कोई आपत्ति नहीं रहती। शक्ति मंदिर के मुख्य दलोई मोहित चंद्र शर्मा ने कहा कि मुसलमानों के दुर्गा की प्रतिमा बनाने पर हमें कोई एतराज नहीं है। नुरुद्दीन अकेले मुस्लिम नहीं हैं, जो मां की प्रतिमाएं बनाते हैं। पूरे असम में ऐसे बहुत सारे लोग हैं।

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