December 10, 2016

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अयोध्या में नहीं, पर महाराष्ट्र में बन गया “राम मंदिर”, उद्घाटन अगले हफ्ते

स्टेशन का नाम इलाके में स्थित करीब 200 साल पुराने राम मंदिर के नाम पर रखा गया है।

राम मंदिर स्टेशन मुंबई

देश की राजनीति में ‘राम मंदिर’ का मुद्दा पिछले ढाई दशकों से गाहे-बगाहे चर्चा में रहा है। अयोध्या में राम मंदिर बने या न बने लेकिन महाराष्ट्र में अगले हफ्ते राम मंदिर का उद्घाटन होने वाला है लेकिन ये मंदिर आम मंदिर से अलग होगा। जी हां, मुंबई की लोकल ट्रेन ने अपने नए स्टेशन का नाम “राम मंदिर” स्टेशन रखा है। चार प्लेटफॉर्म वाले इस स्टेशन पर दो चौड़े फुटओवर ब्रिज बने हैं। स्टेशन पर एलिवेटेड टिकट बुकिंग ऑफिस भी है। ये स्टेशन मुंबई के ओशिवाड़ा में स्थित है। जोगेश्वरी और गोरेगांव में रहने वाले लाखो यात्री लंबे समय से इस स्टेशन की मांग करते रहे हैं क्योंकि पिछले कुछ सालों में इस इलाके की आबादी कई गुना बढ़ गई है।

वेस्टर्न रेलवे लोकल का राम मंदिर स्टेशन अगले पखवाड़े से काम करने लगेगा। यात्रियों को इस स्टेशन के तैयार होने से काफी राहत मिलेगी क्योंकि अब उन्हें जोगेश्वरी या गोरेगांव जाने के लिए ऑटो-टैक्सी में ज्यादा किराया नहीं देना पड़ेगा, न ही बस की लंबी कतार में खड़ा होना पड़ेगा। स्टेशन का नाम इस इलाके में स्थित करीब 200 साल पुराने राम मंदिर के नाम पर रखा गया है। स्थानीय निवासी इस इलाके को पहले से ही राम मंदिर इलाके के नाम से पुकारते रहे हैं। यहां की स्थानीय मुख्य सड़क का नाम भी राम मंदिर मार्ग है।

राम मंदिर के ट्रस्टी शैला पठारे ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “यहां आने जाने वालों के लिए राम मंदिर एक महत्वपूर्ण लैंडमार्क है। इस इलाके को मंदिर के नाम से ही जाना जाता है। हम स्टेशन का नाम मंदिर पर रखे जाने से काफी खुश हैं।” स्टेशन बनने के बाद पूरब से पश्चिम जाने के लिए ‘राम मंदिर फाटक’ को हटा दिया जाएगा। स्टेशन का काम समय से पूरा करने के लिए 50 से ज्यादा मजदूर काम में लगे हुए हैं। स्टेशन के निर्माण का काम पिछले नौ साल से चल रहा था। लोकल मेट्रो में इससे पहले साल 2007 में सेंट्रल रेलवे के लोकल कोपर स्टेशन का उद्घाटन किया गया था।

साल 2015 से ही लोक स्टेशनों के नाम पर राजनीतिक छाप दिखाई देनी लगी है। स्टेशन के नामकरण के लिए हस्ताक्षर अभियान  चलाने से लेकर विपक्षी दलों की सहमति लेने तक ऐसा लग रहा था जैसे स्टेशन का नाम रखना स्टेशन बनने से कम महत्वपूर्ण नहीं है। स्टेशन के नाम के पीछे चाहे जो भी राजनीति हो लेकिन आम यात्रियों को इससे काफी सहूलियत मिलेगी। एक यात्री ने कहा, “अब मुझे रोज जोगेश्वीर स्टेशन से अपने ऑफिस जाने के लिए 60-70 रुपये नहीं खर्च करने होंगे। अब मैं नए स्टेशन से 10 मिनट में पैदल पहुंच जाऊंगी।”

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First Published on December 1, 2016 12:19 pm

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