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जब नकदी ही नहीं तो बैंकों में क्यों लगाएं कतार!

500 और 1 हजार रुपए के नोट बंद होने का असर लोगों के अलावा अब बैंकों पर दिखाई देने लगा है। ज्यादातर बैंकों के पास नए नोट खत्म होने के कारण निकासी का काम पूरी तरह से रुक गया है।
Author नई दिल्ली | November 26, 2016 00:56 am

500 और 1 हजार रुपए के नोट बंद होने का असर लोगों के अलावा अब बैंकों पर दिखाई देने लगा है। ज्यादातर बैंकों के पास नए नोट खत्म होने के कारण निकासी का काम पूरी तरह से रुक गया है। लगातार बढ़ रही परेशानी के कारण लोग नोट मिलने की आस में बैंक पहुंच रहे हैं। शुक्रवार को पहुंचे ऐसे लोगों को ज्यादातर बैंक प्रबंधकों ने सोमवार दोपहर तक आने को कहा है। यह उम्मीद भी तब सफल होगी, जब बैंकों के पास करंसी पहुंचेगी। 26 नवंबर को चौथे शनिवार के कारण बैंक बंद रहेंगे। जिन कुछ जगहों पर कुछ बैंक शाखाओं में लोगों को नोट दिए गए थे, वे सभी 2 हजार रुपए के थे। इसे देखकर लोगों ने नाराजगी जताई। 2 हजार के नोट की जगह 100 रुपए के नोट मांगने पर कुछ जगहों पर महिलाओं की कैशियर से कहासुनी भी हुई। बैंक अधिकारियों के 2 हजार रुपए का नोट लेना है तो लो, वरना लौट जाओ कहने पर 2 हजार रुपए का नोट लेने पर तैयार हुर्इं। ज्यादातर जगहों पर केवल पुराने नोटों को जमा करने का ही काम हुआ।

नोटबंदी से पैदा हुए हालात पर शुक्रवार को सेक्टर- 15 स्थित नोएडा पब्लिक लाइब्रेरी में एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। करीब आधा दर्जन संगठनों के प्रतिनिधियों ने इसमें भाग लिया। सभी ने कालेधन पर अंकुश लगाने के लिए नोटबंदी के फैसले को सही तो बताया लेकिन लागू करने के तरीके पर नाराजगी भी जताई। फोनरवा अध्यक्ष एनपी सिंह और नोएडा एंटरप्रिन्योर्स असोसिएशन (एनईए) के महासचिव वीके सेठ ने केंद्र सरकार से बैंक प्रणाली पर कड़ी निगरानी को जरूरी बताया। इसमें रोजाना होने वाले लेनदेन का लेखा-जोखा उसी दिन जांच करने को कहा, ताकि बैंक अधिकारी नोट नहीं होने की बात कहकर बेवजह लोगों को परेशान न कर सकें।

उधर, नोटबंदी के संकट से जूझ रहे लोगों से विपरीत शुक्रवार को सिंडिकेट बैंक ने प्राधिकरण कर्मियों के लिए अलग काउंटर शुरू किया है। जहां पर प्राधिकरण कर्मियों ने चेक से रकम निकाली। दोपहर तक करीब 14 लाख रुपए कर्मचारियों को बांटे गए। जिन कर्मचारियों को काउंटर से रकम मिली थी, उन्होंने नोएडा एंप्लाइज एसोसिएशन के नवनियुक्त अध्यक्ष कुशलपाल का आभार जताते हुए बधाई थी।

कैश के साथ लंबी कतार भी खत्म

नोटबंदी के 17 दिन बाद भले ही अधिकारी स्थिति के जल्द सामान्य होने का दावा कर रहे हों, लेकिन हकीकत इससे परे है। बैंकों के बाहर लाइनें नहीं देखकर अधिकारी लोगों को पर्याप्त कैश होने व लाइन खत्म होने की बात कहकर गुमराह कर रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि लाइन बैंक में कैश नहीं होने के कारण छोटी हुई है। जिन बैंकों के बाहर लाइनें लगी हैं उनमें घंटों इंतजार के बाद लोगों के सब्र का बांध टूट रहा है, जिसके कारण लगातार हंगामा हो रहा है। शहर के विभिन्न बैंकों व एटीएम के बाहर झगड़े हुए। यहां पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। जिले के करीब 40 फीसद बैंकों में ही कैश ट्रांजेक्शन हो पाई है। ऐसे में इन बैंकों के बाहर लोगों की लंबी लाइनें लगी रहीं। ओल्ड ज्यूडिशियल कांप्लेक्स के एचडीएफसी बैंक के खुलने के आधे घंटे बाद ही कैश खत्म हो गया। इसके बाद बैंक के बाहर नो कैश का नोटिस चस्पा कर दिया गया। इसके बाद बैंकों के बाहर लाइन में लगे लोग नदारद दिखाई दिए। खाते में रुपए जमा कराने वालों का जरूर बैंकों में तांता लगा रहा।

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