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नेता वोट के लिए घर-घर गए लेकिन आंख गवां चुके मरीजों का हाल लेने नहीं आया कोई मंत्री

चुनाव का दौर फि र शुरू हो गया है। नेता वोट के लिए घर-घर आने लगे हैं पर आंख गवां चुके हम मरीजों का हाल लेने अब तक कोई मंत्री तो दूर एक विधायक या पार्षद तक नहीं आया।
Author नई दिल्ली | April 7, 2017 02:18 am
कहीं बच्चे की आंखों की रोशनी भी न चली जाए..

चुनाव का दौर फि र शुरू हो गया है। नेता वोट के लिए घर-घर आने लगे हैं पर आंख गवां चुके हम मरीजों का हाल लेने अब तक कोई मंत्री तो दूर एक विधायक या पार्षद तक नहीं आया। यह पीड़ा इलाज में गड़बड़ी से आंख की रोशनी गवां चुके मरीज भूमि चंद ने जाहिर की। जीटीबी अस्पताल में सुई लगने के बाद से पैदा हुई दिक्कत का एम्स में इलाज करा रहे यह अकेले नहीं बल्कि ऐसे 22 मरीज हैं। जिनका अब एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल चक्कर लगाते दिन बीत रहा है। इन मरीजों में कुछ ने दूसरी आंख की भी रोशनी कम होने की तो कुछ ने एंटीबायोटिक की वजह से पेट में दिक्कत होने की भी शिकायत की है। समस्या की वजह से कुछ ने नौैकरी जाने का अंदेशा जताया तो किसी ने जीविका का संकट भी खड़ा होने की बात कही। एम्स में इलाज को पहुंचे इन मरीजों ने बताया कि जीटीबी अस्पताल में इलाज के दौरान आंखों की रोशनी गवां चुके मरीजों की तादात 20 से बढ़ कर 22 हो गई है। इन मरीजों ने दूसरी आंख की रोशनी भी कम होने की शिकायत की। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि यों तो चुनाव हो तो प्रधानमंत्री से लेकर हर नेता मंत्री घर-घर पहुंच जाता है पर हम लोगों का हाल लेने कोई भी आता। भूमि चंद ने बताया कि हम 22 लोग हैं जिनको यह दिक्कत हो रही है पर जीटीबी से एम्स इलाज के लिए आना पड़ता है।

कहने को अस्पताल प्रशासन की ओर से एम्बुलेंस के जरिए यहां भेजने की व्यवस्था की गई है लेकिन केवल दो एम्बुलेंस है जिससे सभी मरीज नहीं आ पाते लिहाजा 200 रुपए भाड़ा खर्च कर खुद से एम्स आए हैं। इसी तरह सीमा, विजयपाल व कई अन्य मरीजों ने शिकायत की कि उनके अलावा कई मरीज बसों में धक्के खाते हुए एम्स पहुंचे हैं। एम्स में जांच करके इलाज क्या देना है यह लिख कर वापस जीटीबी अस्पताल भेज दिया जाता है जहां पर उनको सेलाइन के जरिए वह दवा चढ़ाई जाती है। फिर अगले दिन जांच के लिए इन्हें एम्स आना पड़ता है।

मरीज मोहम्मद अब्बास ने कहा कि दूसरी आंख में भी असर आ रहा है। एम्स मे इलाज कराने आए मरीज ने एक अस्पताल से दूसरे के बीच चक्कर लगाने से होने वाली दिक्कत का जिक्र करते हुए कहा कि अगर हमें किसी एक अस्पताल में इलाज मिल जाए तो क्या दिक्कत लेकिन न तो अस्पताल प्रशासन की ओर से ऐसा किया जा रहा है न हमें दूसरे अस्पताल जाने की इजाजत मिल रही है। हम कहते भी हंै तो हमसे लिखित में मांगा जा रहा कि हम अपने जोखिम पर खुद से जा रहे है। ऐसे मे हम क्या करें समझ में नही आ रहा है।
जीटीबी अस्पताल के निदेशक डा सुनील कुमार ने कहा है कि अभी जांच रपट आने में एक दो दिन का वक्त और लगेगा। उसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है। हालांकि शुरूआती जांच से यह संक्रमण का मामला लगता है।

कहीं बच्चे की आंखों की रोशनी भी न चली जाए..
इन मरीजों में से एक आरएन शर्मा ने कहा कि सभी मरीज डरे हुए हैं क्योंकि कुछ मरीजों की दूसरी आंख की रोशनी भी कम होने लगी है। एक महिला मरीज की तो गोद में बच्चा भी है। इस मरीज ने आशंका जताई है कि जिस सूई से उनकी आंख की रोशनी चली गई उससे कहीं उनके बच्चे की आंख में भी तो बुरा असर तो नहीं आ रहा है क्यों कि इनका बच्चा अभी स्तानपान करता है। मदनगिर की रहने वाली मरीज सीमा ने बताया कि वो पैर का इलाज कराने आई थीं जांच में पता चला कि आंख में दिक्कत है शुक्रवार को फोन आया कि आकर शनिवार को सुई लगवा लो। जब शनिवार को सुई लगवाई तो रविवार से दिखने में दिक्कत शुरू हो गई। तब से लगातार दोनों अस्पताल के चक्कर लगा रही हैं। उनके साथ उके पति भी परेशान हैं आंख ठीक होगी कि नहीं, इस चिंता से परेशान सीमा को यह आशंका भी सता रही कि ड्राइवर पति को नौकरी से निकाल न दिया जाय। दो बच्चों सहित उनकी जीविका पर भी संकट के बादल नजर आ रहे हैं।

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