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नीतीश ने विलय को लेकर गेंद आरएलडी के पाले में डाली

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, ‘‘एक बात तो स्पष्ट है कि आज केन्द्र में बैठी सरकार जो कर रही है वह लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं है।
Author पटना | May 3, 2016 05:51 am
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। (PTI Photo)

जदयू और अजित सिंह के आरएलडी के बीच विलय की संभावना के खत्म होने की मीडिया में चर्चा के बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार (2 मई) को कहा कि विलय की पहल आरएलडी की ओर से की गयी थी, इसलिए इसका उत्तर वही लोग दे सकते हैं। पटना में सोमवार (2 मई) को आयोजित जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम के बाद जदयू और आरएलडी के बीच विलय को लेकर पूछे गए एक प्रश्न पर नीतीश ने कहा कि विलय की पहल आरएलडी की ओर से की गयी थी, इसलिए इसका उत्तर वही लोग दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि विलय को लेकर अगर कोई चाहे भी तो यह बहुत सहज और आसान नहीं है। पार्टियां चाह भी ले तो विलय करने की प्रक्रिया बहुत लम्बी है। इसलिए ऐसा नहीं है कि आप चाह भी लें तो विलय हो जाएगा।

नीतीश ने कहा कि इसलिए हमने प्रारंभ से कहा है कि अधिक से अधिक एकता (मैक्सिमम पॉसिबल यूनिटी) होनी चाहिए जिसमें गठबंधन, तालमेल और आपसी समझ भी शामिल है। लेकिन जो कुछ भी हो कार्यक्रम पर आधारित होना चाहिए जिसके लिए प्रयासरत हैं और रहेंगे। नीतीश ने कहा कि भाजपा से इतर लोगों को एकजुट करने की बात करना भी बहुत लोगों को नागवार गुजर रहा है और इसको लेकर तरह-तरह की बात आज उठाई जा रही है।

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश ने कहा कि उन्होंने हाल में पटना में आयोजित अपनी पार्टी के एक सम्मेलन में स्पष्ट कर दिया था कि हमारी कोई दावेदारी (प्रधानमंत्री पद के लिए) नहीं है। एकता और एकजुटता की पूरी कोशिश करेंगे और उनकी समझ से यह कोशिश करना राजनैतिक आवश्यकता और देश के हित में है।

राकांपा प्रमुख शरद पवार के नीतीश कुमार का प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर समर्थन किए जाने के बारे में पूछे जाने पर नीतीश ने कहा कि पवार जी देश के वरिष्ठतम नेताओं में से एक हैं और उन्होंने उनके बारे में जो कहा उसे प्रशंसा ही माना जाए और इसके लिए उनके वह शुक्रगुजार हैं।

नीतीश ने कहा कि आपस में तालमेल, एकता और गठबंधन सहित यथा संभव एकता की ओर बढना चाहिए तथा भाकपा के उस बयान कि कोई भी एकता होनी चाहिए, वह कार्यक्रम पर आधारित होना चाहिए, पूरे तौर पर सहमत हैं। नीतियों के बारे में स्पष्टता होनी चाहिये।

उन्होंने कहा, ‘‘एक बात तो स्पष्ट है कि आज केन्द्र में बैठी सरकार जो कर रही है वह लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं है। देश में अहिष्णुता का दौर बढी हुआ है और जिस प्रकार से जो कुछ भी हो रहा है उसके मद्देनजर लोगों को जो उनकी नीतियों और कार्यकलापों से सहमत नहीं है उनकी आपस में एकजुटता होनी चाहिए और हमलोग इसके हिमायती हैं।’’

उन्होंने कहा कि संविधान के राज्य के नीति निर्देशक तत्वों में यह वर्णित है कि शराबबंदी राज्य सरकार द्वारा लागू की जायेगी। इस सिलसिले में कुछ लोग उच्चतम न्यायालय गये थे। उच्चतम न्यायालय द्वारा संविधान की व्याख्या करते हुये स्पष्ट किया गया था कि शराब पीना या शराब का व्यापार करना मौलिक अधिकार नहीं है।

नीतीश ने कहा कि शराबबंदी कितनी उपयोगी है, इसे बिहार में लागू कर देख लिया गया है। शराबबंदी को विशाल जनसमर्थन प्राप्त है। सभी लोग शराबबंदी के पक्ष में है। शराबबंदी से लोगों के पैसे का दुरुपयोग बंद हो गया है, अब उन पैसों का सदुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी को राष्ट्रव्यापी अभियान बनाने का उनका कोई योजना नहीं थी, पर सभी इसके पक्ष में है।

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