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एनजीटी ने जारी किए उत्तराखंड और हिमाचल सरकारों को नोटिस

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने शुक्रवार को दो विभिन्न मामलों में हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड सरकारों को नोटिस जारी करते हुए जवाब देने को कहा है।
Author नई दिल्ली | July 22, 2017 01:05 am
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी)।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने शुक्रवार को दो विभिन्न मामलों में हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड सरकारों को नोटिस जारी करते हुए जवाब देने को कहा है। एनजीटी ने हिमाचल प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह हलफनामा दायर कर कुल्लू-मनाली में टैक्सी एसोसिएशन के साथ पंजीकृत कुल सदस्यों की संख्या का ब्योरा दे। जबकि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सरकारों को राष्ट्रीय वन्य आग रोकथाम और नियंत्रण दिशा-निर्देश जमा करने का निर्देश दिया गया।

अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाले पीठ ने हिमाचल सरकार से तीन दिन के भीतर उचित पड़ताल के बाद विस्तृत जवाब देने का निर्देश दिया है। पीठ ने यह निर्देश एनजीटी के 19 जून के आदेश के खिलाफ एक टैक्सी एसोसिएशन की याचिका पर दिया। एनजीटी ने 19 जून के अपने आदेश में टैक्सियों के परमिट की संख्या पर सीमा तय कर दी थी। टैक्सी एसोसिएशन ने जहां यह दावा किया कि क्षेत्र में 2,100 टैक्सियां हैं, वहीं हिमाचल सरकार ने पंजीकृत टैक्सियों की संख्या 2,517 बताई थी। हरित इकाई ने मनाली-रोहतांग मार्ग पर रोप-वे परियोजना पर भी स्थिति रिपोर्ट मांगी और निर्देश दिया कि सरकार का सबसे वरिष्ठ अधिकारी 26 जुलाई को उसके समक्ष पेश हो। इसने पलचन पंचायत के सरपंच को भी अगली सुनवाई पर अपने समक्ष पेश होने का निर्देश दिया जिसने नौ किलोमीटर लंबे पलचन-रोहतांग रोप-वे का विरोध किया था।

एक अन्य मामले में अधिकरण ने उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सरकारों को राष्ट्रीय वन्य आग रोकथाम और नियंत्रण दिशा-निर्देश जमा करने के निर्देश दिए। अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की पीठ ने दोनों राज्य सरकारों को 2016 से शुरू जंगल की आग की संख्या के बारे में भी अवगत कराने का निर्देश दिया है। पीठ ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि दोनों राज्य हमें अवगत कराएं कि 2016 की तुलना में 2017 में जंगल में आग की कितनी घटनाएं हुईं। वन्य आग पर आप राष्ट्रीय दिशा-निर्देश भी रेकॉर्ड पर रखिए। मामले में अधिकरण ने अपना फैसला नहीं सुनाया है। अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी। हिमाचल प्रदेश में 2016-17 के दौरान वन्य आग की 1545 घटनाओं में 13069 हेक्टेयर जमीन प्रभावित हुई और इससे 1.53 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। वर्ष 2015-16 में 5749.95 हेक्टेयर क्षेत्र में आग की 672 घटनाओं से 1.34 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

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