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अस्‍पताल में डॉक्‍टरों ने कहा- हो चुकी है मौत, अंतिम संस्‍कार से पहले जिंदा पाया गया बच्‍चा

अस्पताल के डॉक्टरों ने जन्म के बाद बच्चे की अच्छे से जांच की होती तो शायद आज एक मां-बाप से उनका बच्चा नहीं छिनता।
इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

तेलंगाना के वारंगल एमजीएम अस्पताल में एक लापरवाही का मामला सामने आया है। अस्पताल के डॉक्टरों ने जहां नवजात बच्चे को मृत घोषित कर दिया लेकिन जब उसका अंतिम संस्कार किया जा रहा था तो वह जिंदा निकला। प्राप्त जानकारी के अनुसार रविवार को बच्चे के माता-पिता उसके अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे कि तभी उन्होंने महसूस किया कि बच्चा जिंदा है और उसमें थोड़ी हलचल है। बच्चे के परिजन उसे तुरंत ही अस्पताल लेकर पहुंचे जहां पर इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। यह मामला एमजीएस अस्पताल द्वारा बरती गई लापरवाही का है जहां पर बच्चे ने जन्म लिया था। अगर अस्पताल के डॉक्टरों ने जन्म के बाद बच्चे की अच्छे से जांच की होती तो शायद आज एक मां-बाप से उनका बच्चा नहीं छिनता।

इस मामले पर जवाब देते हुए अस्पताल के डॉक्टरों ने कहा कि सुबह बच्चे के जन्म के बाद उसका ईसीजी चेक किया गया था लेकिन ईसीजी मशीन काम नहीं कर रही था। ऐसा ही एक मामला पिछले महीने जून में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में देखने को मिला था जहां पर डॉक्टरों ने करीब तीन महीने के एक प्रीमैच्यूर बच्चे को मृत घोषित कर दिया था। बदरपुर निवासी बच्चे के पिता रोहित ने बताया था कि जब बच्चे का जन्म हुआ था तो वह महज 460 ग्राम का था।

रोहित ने बताया था कि अस्पताल के डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ ने हमें बताया कि हमारा बच्चा मर गया है और कर्मचारियों ने उसे एक प्लास्टिक के बैग में बांध दिया था, जैसे कि सभी मृत लोगों को बांधा जाता है। पूरा परिवार बच्चे के अंतिम संस्कार में जुटा हुआ था कि तभी रोहित की बहन को बच्चे में कुछ हलचल होते हुए दिखाई दी और तब परिवार को पता चला कि बच्चा जिंदा है। इस मामले की शिकायत पुलिस में की गई, जिसके बाद माता-पिता के बयान पर पुलिस ने आरोपी डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ केस दर्ज कर लिया।

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