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जामिया विश्वविद्दालय: कठघरे में आई शिक्षक भर्ती प्रक्रिया

तमाम पदों को उन लोगों के लिए आरक्षित कर दिया गया जिन्हें नियमानुसार वहां भर्ती नहीं दिया जा सकता। इसका विरोध शुरू हो गया है।
Author नई दिल्ली | July 2, 2017 04:04 am
जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय (File Photo)

जामिया मिल्लिया इस्लामिया की ओर से विभिन्न विभागों में सहायक प्रोफेसर और प्रोफेसर के पदों पर नियुक्ति के लिए निकाले गए विज्ञापनों में सरकार के दिशा-निर्देशों की अनदेखी का मामला सामने आया है। इन पदों को भरने के लिए जामिया ने सभी श्रेणियों के उम्मीदवारों से आवेदन मांगे हैं, लेकिन उन्होंने कुछ पदों पर ऐसे खास वर्ग के लोगों से भी आवेदन मांग लिए जो उन पद के लिए आरक्षित नहीं हो सकते थे। तमाम पदों को उन लोगों के लिए आरक्षित कर दिया गया जिन्हें नियमानुसार वहां भर्ती नहीं दिया जा सकता। इसका विरोध शुरू हो गया है। सूत्रों की माने तो इसे लेकर जामिया को एक बार फिर पीछे हटना पड़ सकता है। जानकारी के मुताबिक जामिया ने विभिन्न विभागों में शिक्षकों की भर्ती के लिए जो विज्ञापन (विज्ञापन संख्या—3/2017-18) दिया गया है, उसके अनुसार हिंदी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के पदों को मूक बधिर उम्मीदवारों के लिए आरक्षित किया गया है। इसी तरह से सेंटर फॉर स्टडी आॅफ कंपेरिटिव रिलीजन एंड सिविलाइजेशन डिपार्टमेंट में सहायक प्रोफेसर के पद को भी मूक बधिर श्रेणी के उम्मीदवार के लिए आरक्षित कर दिया गया है। इतना ही नहीं, डिपार्टमेंट आॅफ एजुकेशन स्टडीज में एसोसिएट प्रोफेसर का एक पद भी मूक बधिर के लिए आरक्षित कर दिया गया है। विभिन्न विभागों में निकाले गए पदों के आवेदन की अंतिम तिथि 10 जुलाई रखी गई है।

इस बाबत आरक्षण की लड़ाई लड़ने वाले संगठनों की अगुआई करने दिल्ली विश्वविद्यालय की विद्वत परिषद के सदस्य प्रो. हंसराज सुमन ने कहा कि दरअसल मूक बधिर भी आरक्षण के हकदार हैं लेकिन केवल ड्राइंग, पेंटिंग जैसे खास क्षेत्रों में। उन्होंने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में है कि जामिया ने अपने विभागों में कई पदों को मूक बधिरों के लिए आरक्षित किया है, जो अनुचित और नियमानुकुल नहीं है। डीओपीटी दिशा निर्देशानुसार शैक्षिक पदों में (ड्राइंग, पेंटिंग को छोड़कर) मूक बधिर को आरक्षण नहीं दिया जा सकता है। बावजूद इसके जामिया ने विभिन्न विभागों में सहायक प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर सभी पदों पर मूक बधिर को शैक्षणिक पदों पर आरक्षण दिया गया है। इसे बदलने की मांग हो रही है। यदि इससे पूर्व कुलपति-रजिस्ट्रार इन पदों में संशोधन कर कोरिजेंडम (शुद्धि पत्र) नहीं लाते हैं तो आंदोलन की रणनीति अपनाई जाएगी।

उधर, जामिया के इस कदम से कथित तौर पर प्रभावित होने वाले अन्य वर्गों के प्रतिनिधियों ने मांग की है कि विश्वविद्यालय मूक बधिर वाले पदों को पीडब्लूडी (दिव्यांग) की अन्य श्रेणियों में बदलाव करके फिर से विज्ञापन दे ताकि जो पद जिस श्रेणी में जाना है, उस वर्ग के साथ सही न्याय हो सके। दिल्ली विश्वविद्यालय के अनुसूचित जाति जनताति व ओबीसी शिक्षक फोरम का कहना है कि यह नियम के खिलाफ तो है ही साथ ही इस कदम से अन्य आरक्षित वर्गों के दावेदार प्रभावित होंगे। उन्होंने इसे सुधारने की मांग की। साथ ही कहा कि जामिया अपने यहां लंबे समय खाली पड़े पीडब्लूडी के पदों को भरने के लिए उचित कदम उठाए ताकि यह वर्ग मुख्यधारा में अपनी पहचान बना सके।

 

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