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…जहां आकर दूर हो जाता है हिंदू-मुसलिम का भेद

जाफराबाद की सदभावना कांवड़ सेवा समिति पिछले 20 साल से हिंदू-मुसलिम एकता की मिसाल पेश कर रही है।
Author नई दिल्ली | July 17, 2017 02:35 am
कांवड़ यात्रा।

जाफराबाद की सदभावना कांवड़ सेवा समिति पिछले 20 साल से हिंदू-मुसलिम एकता की मिसाल पेश कर रही है। समिति के शिविर में इस इलाके के मुसलिम लोग हफ्ते भर तक दिन-रात कांवड़ियों की सेवा में लगे रहते हैं। वे सुबह झाड़ू लगाने से लेकर पानी छिड़कने तक का काम करते हैं और कांवड़ियों को नाश्ता, खाना व अन्य सुविधाएं भी मुहैया कराते हैं। उनके इस नेक काम में इलाके के पुलिसवाले भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। मौजूदा समय में यहां पांच शिविर लगाए गए हैं जिनमें मुसलिम समुदाय के लोग कांवड़ियों की सेवा करते हैं। हिंदू स्वयंसेवक सिर्फ पूजा-पाठ के लिए यहां रहते हैं। सदभावना समिति के अलावा युवा एकता कांवड़ सेवा समिति, शिवशक्ति कांवड़ सेवा समिति, धर्मपुरा कांवड़ सेवा समिति और मौनी बाबा मंदिर ब्रह्मपुरी कांवड़ सेवा समिति में मुसलिमों की मौजूदगी देखते ही बनती है। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने शनिवार को इसी तरह के एक बड़े शिविर का उद्घाटन किया। इस मौके पर इलाके के पूर्व विधायक और सदभावना कांवड़ सेवा समिति के संरक्षक चौधरी मतीन अहमद व सिंधिया फैंस क्लब दिल्ली के अध्यक्ष परशुराम रावत भी मौजूद थे। इस मौके पर शीला दीक्षित ने कहा कि हिंदू-मुसलिम एकता की मिसाल बने राजधानी के इस शिविर में आकर उन्हें संतोष होता है। मुसलिम भाई हिंदुओं के इस त्योहार में जिस तरह दिन-रात तल्लीन दिखते हैं वह काबिलेतारीफ है।

जमनापार के इस मुसलिम बहुल इलाके में शनिवार सुबह से ही सामाजिक कार्यकर्ता जावेद बहकी, नदीम शेख, अब्दुल कलाम, मीनू सेठी, हाजी अलाउद्दीन, हाजी रईस और इकबाल प्रधान कांवड़ियों की सेवा और उनके रहने-खाने की व्यवस्था में मशगूल दिखे। ये सभी लोग जाफराबाद, वेलकम, चौहान बांगर व सीलमपुर में अपना व्यवसाय करते हैं। एक हफ्ते तक वे अपने कारोबार को भूल कर पवित्र कांवड़ यात्रा में तन-मन-धन से लगे रहते हैं। सदभावना कांवड़ सेवा समिति के बैनर तले सेवा कर रहे ये सभी मुसलिम लोग 18 साल से इस कार्य में लगे हुए हैं। इनके संरक्षक पूर्व विधायक चौधरी मतीन अहमद हैं। अहमद बताते हैं कि 1992 में जब बाबरी मस्जिद विध्वंस हुआ था, तब इस इलाके के हिंदू लोगों को कोई परेशानी न हो और वे आपस में भाईचारे के साथ रहें, इसलिए इलाके में इस तरह की सेवा शुरू की गई थी। आज तो यह हम सभी के लिए एक पर्व बन गया है जिसका हमें साल भर इंतजार रहता है।

मुसलिम सेवादारों से भरी 66 फुटा रोड स्थित युवा एकता कांवड़ सेवा समिति के कार्यकर्ताओं अतीक अहमद, परवीन खान, रसीद अहमद और बाबू खान ने बताया कि हम लोग कांवड़ियों की सेवा के लिए हैं, बाकी का पूजा-पाठ समिति के अध्यक्ष आरपी पांडेय के जिम्मे है। वेलकम कालोनी के रहने वाले इन सभी मुसलिम सेवादारों ने बताया कि साल 2000 से यहां कांवड़ सेवा का काम हो रहा है और 2002 से दिल्ली सरकार ने यहां शिविर का खर्च देना शुरू कर दिया है। बाकी नाश्ता, खाना और रहने की व्यवस्था हम लोग इलाके से चंदा जमा करके करते हैं। यहां रोजाना तीन-चार सौ लोग ठहरते हैं और आखिरी दिन एक हजार से ज्यादा लोग हो जाते हैं। फरीदाबाद, बल्लभगढ़, गुरुग्राम, बहादुरगढ़ और हरियाणा के अन्य इलाकों के लोग हर साल इस शिविर में आकर रुकते हैं। यहां करीब 50 सेवादार हैं। नागरिक सेवा समिति सीलमपुर के 30-40 लोग भी अपनी सेवाएं देते हैं। वेलकम थानाध्यक्ष प्रशांत कुमार अपनी पूरी टीम के साथ यहां सुरक्षा व्यवस्था संभाले हुए हैं। 24 घंटे सड़क पर वर्दी और सादे कपड़ों में तैनात इन पुलिसवालों में भी कांवड़ियों की सेवा कूट-कूटकर भरी होती है।

 

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