January 21, 2017

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होंडा के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठे 5 श्रमिकों की हालत बिगड़ी

उनके संघर्ष के बावजूद कंपनी प्रबंधन या प्रशासन की ओर से बातचीत के लिए कोई नहीं आया।

Author नई दिल्ली | October 4, 2016 05:13 am
होंडा का फ्लैगशिप स्कूटर एक्टिवा।

बीते 15 दिनों से जंतर-मंतर पर बेमियादी भूख हड़ताल पर बैठे होंडा मोटरसाइकिल व स्कूटर 2एफ कामगार समूह के लोगों में से 5 श्रमिकों की हालत गंभी हो गई है। समूह ने अन्य श्रमिक संगठनों की मदद से देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है और 5 अक्तूबर को होंडा टू-व्हीलर प्रोडक्ट का देश भर में बहिष्कार करने का फैसला लिया है। होंडा मोटरसाइकिल व स्कूटर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड टकपुड़ा, अलवर की कंपनी से फरवरी में निकाले गए ये श्रमिक राजस्थान में धरना प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिल पाने के कारण दिल्ली में आकर इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं।

कंपनी में काम पर वापसी और झूठे केसों को रद्द किए जाने की मांग को लेकर होंडा के निष्कासित श्रमिकों ने सोमवार को 15वें दिन भी अपना संघर्ष जारी रखा। इन श्रमिकों में से पांच नरेश कुमार, रवि, विपिन कुमार, सुनील और अविनाश 15 दिनों से बेमियादी भूख हड़ताल पर हैं और इनकी हालत अब गंभीर और चिंताजनक होती जा रही है। एक निष्कासित श्रमिक सूरज ने बताया, ‘इन पांचों के स्वास्थ्य में भारी गिरावट आई है, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि अभी भी सरकार की ओर से कोई डॉक्टर स्वास्थ्य परीक्षण के लिए नहीं आया है। समूह ने निजी तौर पर 4 डॉक्टरों की टीम से परीक्षण करवाया। उनका कहना है कि श्रमिकों की हालत चिंताजनक है, लगातार भूख हड़ताल से इनके वजन में 10-15 किलो की गिरावट आई है। इनका शुगर लेवल लगातार घट रहा है और कीटोन बढ़ रहा है जिससे खतरा हो सकता है।’होंडा मोटरसाइकिल व स्कूटर कामगार समूह के अध्यक्ष नरेश कुमार मेहता ने कहा कि उनके संघर्ष के बावजूद कंपनी प्रबंधन या प्रशासन की ओर से बातचीत के लिए कोई नहीं आया। सोमवार शाम ट्रेड यूनियन काउंसिल, गुड़गांव की ओर से आयोजित बैठक में बावल, दिल्ली, राजस्थान और अन्य जगहों के ट्रेड यूनियनों ने देशव्यापी जन आंदोलन की चेतावनी दी और आंदोलन को तेज करते हुए होंडा टू-व्हीलर उत्पाद का 5 अक्तूबर को पूरे देश में एक साथ बहिष्कार करने का फैसला लिया है। होंडा मोटरसाइकिल एवं स्कूटर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड टकपुड़ा, अलवर के प्लांट में कार्यरत करीब 3000 श्रमिकों को 16 फरवरी को कंपनी से निष्कासित कर दिया गया था। इनमें से कुछ स्थायी श्रमिकों को वापस लिया गया, लेकिन करीब 2500 ठेका श्रमिक अभी भी बाहर हैं। बकौल, सूरज, इन श्रमिकों को यूनियन बनाए जाने की दिशा में प्रयासरत होने के कारण प्रताड़ित किया जा रहा है।

श्रमिकों ने अगस्त 2015 में यूनियन के लिए आवेदन किया था। सूरज ने कहा कि इसके बाद से ही प्रबंधन की ओर से जबरन ओवरटाइम करवाना, छुट्टी रद्द किया जाना, और अन्य तरह से परेशान किए जाने की बातें सामने आने लगीं। इसी तरह से 16 फरवरी को एक श्रमिक के बीमार होने के बावजूद उस पर ओवरटाइम के लिए दबाव डाला गया, जिसके विरोध पर प्रबंधन की ओर से मारपीट व गालीगलौज की गई और मजदूरों को बाहर निकाल दिया गया। संघर्षरत श्रमिकों ने 2 अक्तूबर को गांधी जयंती के अवसर पर ‘महाजुटान’ का आयोजन किया था जिसमें सभी 3000 निष्कासित श्रमिकों से शामिल होने को कहा गया था।

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First Published on October 4, 2016 5:10 am

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