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कारोबारियों का वैट रिफंड सरकारी खजाने में कैद

दिल्ली सरकार के वैट विभाग में राजधानी के सैकड़ों व्यापारियों की अतिरिक्त वैट रिफंड की राशि कई साल से लटकी हुई है। वैट की बकाया राशि वापस नहीं होने से कई व्यापारियों का धंधा चौपट होने के कगार पर आ गया है।
Author नई दिल्ली | May 20, 2016 02:14 am

दिल्ली सरकार के वैट विभाग में राजधानी के सैकड़ों व्यापारियों की अतिरिक्त वैट रिफंड की राशि कई साल से लटकी हुई है। वैट की बकाया राशि वापस नहीं होने से कई व्यापारियों का धंधा चौपट होने के कगार पर आ गया है। कई व्यापारियों का कहना है कि उनकी जमापूंजी जब सरकारी दफ्तरों में अटक जाएगी, तो वे अपना व्यापार किस तरह से करेंगे। व्यापारियों का कहना है कि यदि वे एकजुट होकर अपनी आवाज उठाएंगें, तो वैट व्यापार के इंस्पेक्टर उन्हें तरह-तरह के मामलों में फंसाएंगे। व्यापारियों का कहना है कि वैट विभाग के अधिकारी उनके ऊपर जबरदस्ती दबाव डाल रहे हैं कि वे आगे का कर जमा करवाएं।

दिल्ली का व्यापारी जब अपना सामान अन्य राज्यों या फिर विदेशों में आपूर्ति करता है, तो उसे कहा जाता है कि उसने अपने सामान की जो वैट राशि जमा करवाई है, उसका रिफंड कर दिया जाएगा। व्यापारी वैट विभाग का एच फार्म भरकर विदेशों में अपने सामान की आपूर्ति कर देते हैं। इसी तरह से अन्य राज्यों में जब वे अपना माल भेजते हैं तो उन्हें सी फार्म भरना पड़ता है। सी व एच फार्म भरकर आपूर्ति करने वाले व्यापारियों से कहा जाता है कि उन्हें वैट की वह राशि वापस कर दी जाएगी, जो उन्होंने अतिरिक्त जमा करवाई है। व्यापारी जब वैट की अतिरिक्त राशि वापसी के लिए वैट विभाग जाते हैं, तो उनसे वहां के इंस्पेक्टर टालमटोल करते हैं।

आॅल इंडिया टैक्स एडवोकेट्स फोरम के अध्यक्ष एमके गांधी का कहना है कि एक अनुमान के मुताबिक राजधानी के करीब 50 हजार व्यापारी हैं, जिनका करोड़ों रुपए का अतिरिक्त रिफंड वैट विभाग में अटका पड़ा है। गांधी का कहना है कि व्यापारियों की यह समस्य 2011 से चल रही है। सैकड़ों व्यापारी ऐसे भी हैं, जो पांच साल से लगातार अतिरिक्त वैट वापसी की राशि के लिए वैट विभाग के अलग-अलग विभागों में चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन कहीं भी उनकी कोई सुनवाई नहीं है। दिल्ली हार्डवेयर मर्चेंट एसोसिशन के अध्यक्ष सत्येंद्र जैन ने कहा कि उनकी मार्केट के ही कई व्यापारी ऐसे भी हैं, जिनकी जमा पूंजी वैट विभाग में अतिरिक्त वैट जमा कराने की वापसी के लिए अटकी हुई है। उन्होंने कहा कि दिल्ली का व्यापारी पहले ही तरह-तरह के सरकारी नियमों की वजह से परेशान है। अब उसकी बकाया राशि भी जो नियमों के तहत तय है समय पर उसे वापस मिलनी चाहिए। उसके लिए यदि उसे सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ेंगे, तो वह अपना व्यापार किस समय पर करेगा।

दिल्ली के कश्मीरी गेट स्थित आटोमोटिव मोटर पाटर््स मर्चेंट एसोसिएशन के नेता नरेंद्र मदान ने कहा कि 31 मार्च 2014 को दिल्ली सरकार वैट पर एक संशोधन लेकर आई थी, जिसके अनुसार जो व्यापारी 2013-14 में अतिरिक्त टैक्स देगा, उसे उसकी वापसी का क्लेम उसी साल करना होगा। मदान ने कहा कि यह नियम भी व्यापारियों के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यापारी फरवरी में कोई सामान खरीदकर वैट जमा करवाता है, और उसके उस सामान की अन्य राज्यों में आगामी वर्ष मई या फिर जून में आपूर्ति होती है, तो वैट विभाग के अधिकारी उसे उसका अतिरिक्त राशि लौटाने से इनकार कर रहे हैं। उन व्यापारियों से कहा जा रहा है कि उन्हें उस राशि का क्लेम 2013-14 में ही करना चाहिए था।

मदान ने कहा कि व्यापारी का सामान अगले वर्ष आपूर्ति हुआ हो, तो वह पहले से ही उस राशि की वापसी का दावा कैसे कर सकता है। उधर व्यापारियों के संगठन आॅल इंडिया कनफेडरेशन आॅफ ट्रेडर्स के अध्यक्ष प्रवीण खंडेलवाल का कहना है कि इस मामले को लेकर वे बात करने के लिए कई बार वैट आयुक्त से समय मांग चुके हैं। लेकिन उन्हें इस मामले में बातचीत के लिए समय नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार वैट विभाग का राजस्व बढ़ने की बात करती है, लेकिन वह बताए कि सरकार के पास मौजूदा में कितनी राशि शेष पड़ी है, जो उसे व्यापारियों को अतिरिक्त कर के रूप में वापस करनी है।

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