December 10, 2016

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अंतराष्ट्रीय व्यापार मेला: आखिरी दिन जमकर हुई खरीदारी

प्रगति मैदान मेट्रो स्टेशन से ही दर्शकों की लंबी कतारें शुरू हुर्इं जो मेले के स्टॉल और पविलियन तक लगी रहीं।

Author नई दिल्ली | November 28, 2016 04:14 am
अंतराष्ट्रीय व्यापार मेले ।

प्रगति मैदान में लगे अंतराष्ट्रीय व्यापार मेले में यूं तो नोटबंदी के कारण इस बार हलचल थोड़ी कम दिखी लेकिन मेले के आखिरी दिन रविवार को भीड़ बेकाबू हो गई। गेट खोलने से पहले से ही पहुंचे दर्शकों में अंदर जाने की होड़ लगी रही। नोटबंदी के कारण 14 नवंबर से शुरू हुए इस मेले में भीड़ कम होने की संभावना को रविवार की भीड़ ने गलत साबित कर दिया।  मेले के समापन के मद्देनजर पुलिस ने भी सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद की थी, लेकिन प्रगति मैदान मेट्रो स्टेशन के बाद यह व्यवस्था पूरी तरह धराशायी होती दिखी। जिसे जहां से मौका मिला, वह मेले की सुरक्षा के लिए लगाई गई लोहे की जाल को भी तोड़ते हुए अंदर जाने की जुगत में लगा रहा। कोई अनहोनी न हो और अंदर आने वालों की पुख्ता सुरक्षा जांच हो, इसलिए मेले के पुलिस उपायुक्त कुमार ज्ञानेश खुद दल-बल के साथ पूरे दिन मेले में घूमते रहे और दर्शकों से सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की अपील करते रहे।

इससे पहले शनिवार को भी साप्ताहिक अवकाश होने के कारण लोग परिवार व दोस्तों के साथ खरीदारी के साथ मौज-मस्ती करने मेले में पहुंचे थे, लेकिन रविवार को दर्शकों और खरीदारों की संख्या ढाई से तीन लाख तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। प्रगति मैदान मेट्रो स्टेशन से ही दर्शकों की लंबी कतारें शुरू हुर्इं जो मेले के स्टॉल और पविलियन तक लगी रहीं। नोटबंदी के बीच लोगों ने कुछ जगहों पर पुराने 500 और 1000 के नोट चलाने की भी कोशिश की। कुछ दुकानदारों ने नोट लिया भी और जहां नोट नहीं चला वहां डेबिट या के्रडिट कार्ड के साथ ही मोबाइल भुगतान करते भी देखा गया। हॉल नंबर एक में कपड़ों की बिक्री कर रहे दुकानदारों का कहना था कि शुरू में तो लगा कि बिक्री नहीं होगी और स्टॉल का किराया भी नहीं निकल सकेगा, लेकिन अंतिम दो दिन थोड़ी राहत दे गए। लोग काफी संख्या में आए और छूट के नाम पर खरीदारी भी की। इस बार मेले में खादी का खासा क्रेज रहा। खादी की दुकान पर लोग कुर्ता और जैकेट खरीदते रहे। अन्य दुकानों की तुलना में यहां भी कुछ छूट थी, लेकिन ज्यादातर ग्राहकों में खरीदारी करने की होड़ लगी रही। मेले में सरकार की ओर से लगाए गए मुफ्त स्वास्थ्य जांच शिविर में भी काफी भीड़ रही। इसके अलावा बिहार, राजस्थान, ओडीशा और पश्चिम बंगाल के भोजन में भी लोगों की दिलचस्पी रही। हालांकि शाम होते-होते बिहारी लिट्टी चोखा खत्म हो चुका था, लेकिन राजस्थानी भोजन पर्याप्त होने के कारण लोग वहीं अपनी भूख मिटाने में लगे रहे।

तमिलनाडु की रहने वाली ऐश्वर्या अपने पिता के साथ मेले में मौज मस्ती करने आई थीं, तो गाजियाबाद के विवान, मनी और लकी अपने पिता वीर सिंह रावत और मां कुसुम रावत के साथ खरीदारी करने से नहीं चूके। मेले में सौंदर्य प्रसाधन का अलग हैंगर होने से महिलाओं की खरीदारी में ज्यादा दिलचस्पी देखी गई। दुकानदारों ने भी भारी छूट का लालच देकर महिलाओं का दिल जीत लिया और खूब खरीदारी हुई।रविवार को मेले में खरीदारी करने आए लोगों को मोबाइल फोन के नेटवर्क ने काफी परेशान किया। नेटवर्क के सही तरह से काम नहीं करने की वजह से डेबिट-के्रडिट कार्ड भुगतान मशीनें भी ठीक तरह से काम नहीं कर रही थीं, जिसके कारण दुकानदारों को काफी मुश्किल हुई और कई लोग इस वजह से अपनी मनपसंद चीजें भी नहीं खरीद सके। दोपहर के बाद जुटी ढाई लाख से अधिक दर्शकों की भीड़ ने पुलिसिया व्यवस्था को भी ध्वस्त कर दिया। शाम छह बजे मेले में भीड़ के अलावा और कुछ नहीं दिख रहा था और पुलिस व अन्य अर्धसैनिक बलों के जवान सिर्फ लोगों को गेट बताते और सुरक्षित निकालते ही देखे गए।

 

 

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First Published on November 28, 2016 4:14 am

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