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कलाः तस्वीरों में मानवतावादी मूल्यों की झलक

राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय में गांधीजी के बचपन से लेकर जीवन के अंतिम दिन तक की तस्वीरें प्रदर्शित की गई हैं। गांधीजी और कस्तूरबा के जीवन से जुड़ी चीजें भी यहां संग्रहित हैं।
Author February 12, 2016 01:21 am

राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय में गांधीजी के बचपन से लेकर जीवन के अंतिम दिन तक की तस्वीरें प्रदर्शित की गई हैं। गांधीजी और कस्तूरबा के जीवन से जुड़ी चीजें भी यहां संग्रहित हैं। नाथुराम गोडसे की पिस्तौल से निकली हुई जिस गोली ने इस महात्मा की हत्या की थी वह और उनके रक्तरंजित वस्त्र संग्रहालय में मौजूद हैं।

इसी संग्रहालय में भूतल पर एक बड़ी दीर्घा है जहां समय-समय पर गांधीजी से संबंधित प्रदर्शनियां लगाई जाती हैं। 2 अक्तूबर को गांधीजी के आश्रमों की प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था। इन दिनों वहां चित्रकार सूरज सदन द्वारा बनाए गए व्यक्तिचित्रों की प्रदर्शनी चल रही है। शीर्षक है- ‘शांति और स्वतंत्रता के चेहरे’।

1947 में जब सूरज सदन आठ साल के थे तब दिल्ली के किंग्जवे कैंप में, देश के विभाजन के बाद शरणार्थियों के लिए रहने की जगह बनाई गई थी। एक दिन गांधीजी वहां गए थे और तब इस बालक ने उन्हें देखा था। गांधीजी की वह छवि इस चित्रकार के मन में ऐसी बस गई कि तब से उनके चित्रों में गांधीजी का वही करुणामय चेहरा दिखाई देता है। चौदह साल की आयु से सूरज सदन व्यक्तिचित्र- ‘पोर्ट्रेट’ बनाते हैं। 1969 में गांधीजी की जन्म शताब्दी के अवसर पर उन्हीं के बनाए हुए चित्र को भारत सरकार ने डाक टिकट के रूप में जारी किया था।

वर्तमान प्रदर्शनी में गांधीजी के चित्रों के साथ-साथ पंडित नेहरू, खान अब्दुल गफ्फार खान, नेल्सन मंडेला, मार्टिन लूथर किंग, मदर टेरेसा के चित्र भी प्रदर्शित किए गए हैं। इन सभी विभूतियों की विचारधारा गांधीजी के दर्शन के अनुसार मानवतावादी रही थी। सूरज सदन सालों पहले भारत छोड़कर कनाडा में बस गए थे। लेकिन वे हर साल भारत आते हैं और अपनी अस्सी साल की उम्र में भी शांति, अहिंसा और स्वतंत्रता का संदेश देने वाले देश-विदेश के नेताओं के चित्र बनाते रहते हैं। वे कहते हैं कि चाहे वे विदेश में रहते हैं लेकिन उनका हृदय भारतीय है और सदा भारतीय रहेगा।

दीर्घा में दीवारों पर व्यक्तिचित्र प्रदर्शित किए गए हैं और गांधीजी के आश्रमों की छोटी प्रतिकृतियों को रहने देने के कारण सजावट बहुत सुंदर लग रही है। यह प्रदर्शनी 14 फरवरी तक चलेगी। इसके बाद फिर से उन आश्रमों की प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा।

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