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सुप्रीम कोर्ट ने सत्‍येन्‍द्र जैन पर लगाया 25000 रु का जुर्माना, स्वास्थ्य मंत्री ने हलफनामे के लिए मांगी मोहलत

सत्येन्द्र जैन द्वारा मोहलत मांगने पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'जब लोग मर रहे हैं तो आपको 24 घंटे की जरूरत नहीं होनी चाहिए।'
Author नई दिल्ली | October 3, 2016 20:02 pm
दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन (FILE PHOTO)

राष्ट्रीय राजधानी में डेंगू और चिकनगुनिया के खिलाफ अभियान में सहयोग नहीं करने वाले अधिकारियों के नामों का खुलासा करने के लिए हलफनामा दायर करने में विफल रहने पर दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन पर उच्चतम न्यायालय ने सोमवार (3 अक्टूबर) को 25 हजार रुपए का जुर्माना लगा दिया। जैन की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता चिराग उदय सिंह ने हलफनामे में इन नामों का उल्लेख करने के लिए जब मंगलवार तक का वक्त मांगा तो न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति धनंजय वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा, ‘जब लोग मर रहे हैं, तो आपको 24 घंटे की जरूरत नहीं होनी चाहिए।’ शीर्ष अदालत ने कहा, ‘आपने हलफनामे में क्यों नाम और साक्ष्य नहीं दिए। आपने उनके खिलाफ बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। आप हलफनामा दायर नहीं करने के लिए आज तक विधिक सेवा प्राधिकरण में खर्च के तौर पर 25000 रुपए जमा कराएं।’ इसके बाद पीठ ने मामले की अगली सुनवाई मंगलवार के लिए निर्धारित कर दी।

न्यायालय ने शुक्रवार (30 सितंबर) को जैन के उन आरोपों को गंभीरता से लिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि राष्ट्रीय राजधानी में वेक्टर जनित बीमारियों की रोकथाम करने में अधिकारी सहयोग नहीं कर रहे हैं या जिम्मेदारी नहीं ले रहे हैं। इसके बाद शीर्ष अदालत ने उनसे उन अधिकारियों के नामों का खुलासा करने को कहा था, जो डेंगू और चिकनगुनिया के खिलाफ अभियान में सहयोग नहीं कर रहे हैं। जैन की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिंह ने कहा कि उन्हें हलफनामा दायर करने के लिए वक्त नहीं मिला क्योंकि अदालत ने बहुत कम समय दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार वेक्टर जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए हरसंभव कदम उठा रही है। पीठ ने इसपर कहा, ‘हमने जानबूझकर आपको बेहद कम समय दिया। यह बेहद गंभीर मामला है। लोग बीमारियों से मर रहे हैं। आपने अधिकारियों के खिलाफ आरोप लगाया था लेकिन तब भी आपने हलफनामा नहीं दायर किया। आपको इसे शनिवार तक दायर करना चाहिए था।’

सिंह ने कहा कि मामले की सुनवाई कल के लिए निर्धारित की जाए और उन्होंने हलफनामा दायर करने के लिए और 24 घंटे की मांग की। उन्होंने कहा कि मंत्री की प्रामाणिकता पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए। सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने भी यह कहते हुए दिल्ली के स्वास्थ्य सचिव की ओर से हलफनामा दायर करने की अनुमति मांगी कि पीठ के समक्ष कुछ तथ्य रखे जाने की आवश्यकता है। अदालत ने कुमार को हलफनामा दायर करने की अनुमति दी। एक जनहित याचिका पर स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने जैन को हलफनामा दायर करने के लिए नोटिस जारी किया था। जैन ने हलफनामे में कहा था कि अधिकारी जिम्मेदारी नहीं ले रहे हैं तथा डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों से संबंधित सभी फाइलें मंजूरी के लिए उपराज्यपाल के पास भेजी जा रही हैं ।

जैन ने हलफनामा तब दायर किया था जब शीर्ष अदालत ने 26 सितंबर को दिल्ली सरकार से मच्छरजनित बीमारियों को रोकने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जवाब मांगा था। केंद्र ने शीर्ष अदालत से कहा था कि यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार की है कि राष्ट्रीय राजधानी चिकनगुनिया और डेंगू जैसी बीमारियों से मुक्त रहे। उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल डेंगू से सात साल के एक लड़के की मौत होने की घटना पर स्वत: संज्ञान लिया था और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा था। इस लड़के को पांच निजी अस्पतालों ने कथित रूप से उपचार देने से मना कर दिया था जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद उसके माता-पिता ने आत्महत्या कर ली थी।

ओड़िशा निवासी लक्ष्मीचंद्र और बबीता राउत ने अपने इकलौते पुत्र अविनाश की संदिग्ध डेंगू से मौत होने के बाद दक्षिणी दिल्ली के लाडो सराय में चार मंजिला एक इमारत से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। इस साल एक अक्तूबर तक चिकनगुनिया के 5,293 मामले सामने आ चुके हैं और बीमारी से अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में डेंगू से कम से कम 21 लोगों की जान जाने की खबर है।

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First Published on October 3, 2016 2:01 pm

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