December 10, 2016

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सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र द्वारा लोकपाल नियुक्त नहीं करने पर निराशा व्यक्त की

उच्चतम न्यायालय ने संसद द्वारा जनवरी 2014 में कानून पारित किये जाने के बावजूद केन्द्र द्वारा अभी तक लोकपाल की नियुक्ति नहीं करने पर आज निराशा व्यक्त की।

Author नई दिल्ली | November 23, 2016 16:44 pm

उच्चतम न्यायालय ने संसद द्वारा जनवरी 2014 में कानून पारित किये जाने के बावजूद केन्द्र द्वारा अभी तक लोकपाल की नियुक्ति नहीं करने पर आज निराशा व्यक्त की। प्रधान न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर, न्यायमूर्ति धनंजय वाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की तीन सदस्यीय खंडपीठ के समक्ष केन्द्र ने दलील दी कि विपक्ष के सबसे बड़े राजनीतिक दल के नेता को चयन समिति में शामिल करने के लिये संसद में संशोधन विधेयक लंबित है। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि कानून में संशोधन नहीं करके संसद लोकपाल की नियुक्ति के प्रावधान को निरर्थक नहीं कर सकती है।

पीठ ने अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी से जानना चाहा कि सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को चयन समिति में शामिल करने के लिये न्यायालय आदेश क्यों नहीं दे सकता है। अटार्नी जनरल ने पीठ से कहा कि मौजूदा हालात में न्यायालय द्वारा पारित कोई भी आदेश न्यायिक तरीके से कानून बनाने जैसा होगा। उन्होंने कहा कि वह इस संबंध में निर्देश प्राप्त करके न्यायालय को सूचित करेंगे। इस पर पीठ ने मामले की सुनवाई सात दिसंबर के लिये स्थगित कर दी।

इससे पहले, गैर सरकारी संगठन कामन काज की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शांति भूषण ने कहा कि लंबे संघर्ष के बाद लोकपाल बिल पारित किया गया था लेकिन अब सरकार कुछ नहीं कर रही है। उन्होंने कहा, ‘‘2014 में कानून अधिसूचित होने के बावजूद हमारे पास आज भी लोकपाल नहीं है। यहां तक कि विधिवेत्ता की भी नियुक्ति नहीं हुयी है और जनता हताश हो रही है। क्या आप एक और अन्ना आन्दोलन चाहते हैं? भूषण ने कहा कि सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को प्रतिपक्ष के नेता के रूप में मान्यता देने के लिये शीर्ष अदालत को लोकपाल कानून की व्याख्या करनी होगी।

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First Published on November 23, 2016 4:43 pm

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