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बुजुर्गों की हिफाजत के लिए दिल्ली पुलिस ने जारी किया मोबाइल ऐप

दिल्ली पुलिस ने जून 2004 में सीनियर सिटिजन सिक्योरिटी सेल की स्थापना की थी।
Author नई दिल्ली | October 2, 2016 05:40 am
पुलिस को जागरूकता शिविरों का आयोजन करने को भी कहा ताकि उन बुजुर्गों को ऐप के बारे में जानकारी दी जा सके जो तकनीक का ज्यादा इस्तेमाल नहीं करते हैं।

राजधानी में बुजुर्गों के साथ होने वाले अपराधों के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस ने एक स्मार्ट तरीका अपनाया है। इसके तहत शनिवार को अंतरराष्ट्रीय बुजुर्ग दिवस के मौके पर उपराज्यपाल नजीब जंग ने सीनियर सिटिजन मोबाइल ऐप की शुरुआत की। इस मोबाइल ऐप के जरिए बुजुर्ग अब अपने स्मार्टफोन से आसानी से शिकायत दर्ज करवा सकेंगे। दिल्ली पुलिस की इस महत्त्वाकांक्षी सुरक्षा योजना के बारे में जंग ने कहा कि इस ऐप के प्रभावी होने से दिल्ली पुलिस बुजुर्गों की सुरक्षा का खासा खयाल रख सकेगी। उपराज्यपाल ने पुलिस को जागरूकता शिविरों का आयोजन करने को भी कहा ताकि उन बुजुर्गों को ऐप के बारे में जानकारी दी जा सके जो तकनीक का ज्यादा इस्तेमाल नहीं करते हैं। इस मौके पर आयुक्त आलोक कुमार वर्मा सहित सभी आला अधिकारी मौजूद थे।

राष्ट्रीय मीडिया सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में दिल्ली पुलिस के आयुक्त आलोक वर्मा ने कहा कि दिल्ली पुलिस के सीनियर सिटीजन सेल में पंजीकृत 27 हजार वरिष्ठ नागरिकों को तुरंत इस ऐप से जोड़ दिया जाएगा। वहीं अन्य बुजुर्गों को फोन पर ऐप डाउनलोड कर अपना पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण के लिए वरिष्ठ नागरिकों का बायोडाटा भी ऐप पर भरवाया जाएगा। पंजीकरण के बाद संबंधित स्थानीय थाना पुलिस और सीनियर सिटीजन सेल आवेदन की जांच करेंगे। सत्यापन के बाद ही उनका पंजीकरण पूरा माना जाएगा। वर्मा ने कहा कि ऐप पर पंजीकरण करा चुके लोग एसओएस बटन दबाकर वरिष्ठ नागरिकों के लिए बनाए गए हेल्पलाइन नंबर 1291 पर फोन भी कर सकेंगे। फोन करने वाले की स्थिति के साथ एक अलर्ट 24 घंटे काम करने वाले नियंत्रण कक्ष में पहुंच जाएगा। साथ ही इलाके के थानाध्यक्ष, बीट अधिकारी और पहले से दिए गए नंबर पर संदेश पहुंच जाएगा। इस ऐप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है।

वर्मा ने कहा कि इससे पहले दिल्ली पुलिस ने जून 2004 में सीनियर सिटिजन सिक्योरिटी सेल की स्थापना की थी। यह सेल ऐसे वरिष्ठ नागरिकों का पंजीकरण करता है, जो अकेले रहते हैं, अपने जीवनसाथी के साथ परिवार से अलग रहते हैं। स्थानीय थाने का बीट या डिविजन स्टाफ और सेल की पुलिस समय-समय पर व्यक्तिगत रूप से या टेलीफोन पर संपर्क कर उनकी मदद करेगी।

 

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