June 29, 2017

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सफदरजंग अस्पताल ने जिंदा नवजात को मृत बता परिजनों को सौंपा

परिजन इसे लापरवाही मानकर जांच की बात कह रहे हैं तो तो अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक का कहना है कि 500 ग्राम से नीचे के वजन के बच्चे का जिंदा बच पाने की संभावना न के बराबर होती है।

Author नई दिल्ली | June 19, 2017 02:51 am
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है।

बच्चे की अदला-बदली और बच्चा चोरी के कई आरोप झेल चुके सफदरजंग अस्पताल रविवार को एक जीवित नवजात (भ्रूण) को मृत घोषित कर उनके परिजनों को सौंपने के बाद फिर विवाद में आ गया है। परिजन इसे लापरवाही मानकर जांच की बात कह रहे हैं तो तो अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक का कहना है कि 500 ग्राम से नीचे के वजन के बच्चे का जिंदा बच पाने की संभावना न के बराबर होती है। लिहाजा ताजा मामले में अस्पताल की शुरुआती तौर पर लापरवाही नहीं दिख रही है फिर भी परिजनों की शिकायत के बाद पूरे मामले की जांच की जा रही है। उधर, परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने भी अपने तरीके से मामले की जांच शुरू कर दी है। बदरपुर के रहने वाले रोहित अपनी गर्भवती पत्नी को लेकर रविवार सुबह सफदरजंग अस्पताल के आपात वार्ड के प्रसूति विभाग में भर्ती कराने आए थे।

डॉक्टरों ने महिला के रक्तस्राव को देखते हुए उसका (आॅपरेशन) डीएनसी किया। आॅपरेशन के कुछ ही देर बादएक डॉक्टर ने भ्रूण को कपड़े में लपेटकर एक पोली पैक में सील करके और उस पर लेबल लगाकर परिजनों को यह कहकर सौंप दिया कि इसकी मौत हो चुकी है। परिजन पाली पैक में लिपटे भ्रूण को लेकर घर चले गए। जबकि उसकी मां का अभी अस्पताल में ही इलाज चल रहा था। घर पर पिता और अन्य लोग उसके अंतिम क्रिया की औपचारिकताएं शुरू कर रहे थे तभी रोहित की बहन ने उस पैकेट में हलचल देखी। यह देख परिजन चौके और पोली पैक खोलकर देखा तो वह जीवित निकला और उसकी धड़कन चल रही थी और हाथ पैर भी हिल रहे थे। परिजन उसे तुरंत पास के अपोलो अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने सफदरजंग अस्पताल ही ले जाने की सलाह दी। परिजनों तुरंत उसे सफदरजंग अस्पताल लाए जहां डॉक्टरों ने अपनी गलती मानकर उसे बच्चे की गहन चिकित्सा कक्ष (नर्सरी) में भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया। जीवित नवजात को मृत घोषित कर परिजनों के सौंपने के इस मामले के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन के होश उड़ गए। आनन फानन में मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एके राय का कहना है कि महिला गर्भपात कराने पहले भी आई थी लेकिन अभी दिनों के भू्रण के चलते ऐसा नहीं किया जा सका। रविवार को महिला खून से लथपथ आई तो डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया। चूंकि वह 500 ग्राम से कम वजन का है, लिहाजा डॉक्टरों ने जल्दबाजी में भ्रूण को परिजनों को सौंप दिया था। जिंदा लाने पर फिलहाल विशेषज्ञों की देखरेख में उसका इलाज चल रहा है। इस मामले में अगर किसी डॉक्टर की लापरवाही सामने आएगी तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उधर, जिले के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त चिन्मय विश्वास का भी कहना है कि शिकायत की जांच की जा रही है। जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी।

 

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First Published on June 19, 2017 2:51 am

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