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1966 में गौहत्या के खिलाफ किए गए आंदोलन की सालगिरह मनाएगा संघ परिवार

1966 के गौहत्या विरोधी आंदोलन का फायदा जनसंघ को 1967 के चुनाव में मिला था और उसे 35 लोक सभा सीटों पर जीत मिली थी।
Author November 4, 2016 12:44 pm
प्रतीकात्मक तस्वीर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ परिवार आने वाले रविवार को 1966 में चलाए गए गौहत्या विरोधी आंदोलन की 50वीं सालगिरह मनाएगा। आरएसएस के सरकार्यवाह भैयाजी जोशी और दूसरे कई हिंदू संत कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। 1966 के आंदोलन का आरएसएस के लिए खास महत्व है। इस आंदोलन से जनसंघ को जनाधार मिला था। कुछ वैसे ही जैसे 1990 के दशक में राम मंदिर आंदोलन से बीजेपी को अपना प्रभाव बढ़ाने में मदद मिली थी। 1967 के लोक सभा चुनाव में जनसंघ ने अपनी सर्वाधिक 35 सीटें जीती थीं। जनसंघ उस साल चुनाव में मिले वोट प्रतिशत के मामले में केवल कांग्रेस से पीछे था। जनसंघ को सीपीआई और सीपीएम के मिले कुल वोटों से भी ज्यादा वोट मिले थे।

केंद्र में बीजेपी नीत गठबंधन सरकार आने के बाद गोरक्षा के नाम पर होने वाले हमलो में काफी बढ़ोतरी हुई है। गुजरात के उना में कुछ दलितों की गोहत्या का आरोप लगाकर सरेआम पिटाई करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। वहीं यूपी के दादरी में अखलाक नामक व्यक्ति की बीफ खाने के आरोप में पीटपीट कर हत्या कर दी गई। हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश इत्यादि राज्यों में भी कथित गोरक्षकों पर ऐसे ही आरोप लगे। राष्ट्रीय मीडिया में ये मुद्दा काफी छाया रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक भाषण में गोरक्षा के नाम पर हिंसा करने वालों को अपनी दुकान चलाने वाले असामाजिक तत्व कहा था। हालांकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने दशहरा संबोधन में गोरक्षकों का बचाव किया था।

वीडियो: हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने दिया विवादित बयान-

पीएम मोदी के बयान पर कई हिंदू संगठनों ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी थी। वहीं विपक्षी नेताओं ने गोरक्षा के मुद्दे को बढ़ती मंहगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे बीजेपी शासित प्रदेशों ने पिछले दो सालों में गौहत्या और बीफ से जुड़े कड़े कानून बनाए गए हैं।

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