January 18, 2017

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अभिव्यक्ति के मंच पर हमलों को लेकर एकजुट होने की अपील

हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में ‘द्रौपदी’ के मंचन को लेकर खड़े किए गए हंगामे के बाद चार अक्तूबर को इंदौर में इप्टा के राष्टÑीय सम्मलेन में तोड़-फोड़ की कोशिश के बाद अभिव्यक्ति पर हो रहे हमलों को लेकर चिंता जाहिर की गई है।

Author नई दिल्ली | October 7, 2016 01:26 am
Central University of Haryana

हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में ‘द्रौपदी’ के मंचन को लेकर खड़े किए गए हंगामे के बाद चार अक्तूबर को इंदौर में इप्टा के राष्ट्रीय सम्मलेन में तोड़-फोड़ की कोशिश के बाद अभिव्यक्ति पर हो रहे हमलों को लेकर चिंता जाहिर की गई है। जनवादी लेखक संघ के महासचिव मुरली मनोहर प्रसाद सिंह और उपमहासचिव संजीव कुमार ने गुरुवार को आरोप लगाया कि ये दोनों घटनाएं बताती हैं कि राष्ट्रीय उन्माद फैलाकर आलोचनात्मक आवाजों को दबा देने की नीति पर संघ और उससे जुड़े अनगिनत संगठन लगातार, अपनी पूरी आक्रामकता के साथ सक्रिय हैं। इंडियन कल्चर फोरम ने भी इन हमलों की भर्त्सना की है। गौरतलब है कि चार अक्तूबर को इंदौर में इप्टा के राष्ट्रीय सम्मलेन के तीसरे दिन कुछ हिंदू संगठन से जुड़े लोगों ने मंच पर चढ़कर हंगामा किया और इस पूरे आयोजन को राष्ट्रविरोधी गतिविधि बताते हुए नारे लगाए। आरोप है कि आयोजन-स्थल से बाहर निकाले जाने के बाद उन्होंने पत्थर भी फेंके जिससे इप्टा के एक कार्यकर्ता का सिर फट गया। उनका आरोप यह था कि प्रसिद्ध फिल्मकार एमएस सथ्यू (‘गरम हवा’ के निर्देशक) ने अपने उद्घाटन भाषण में पाकिस्तान में भारतीय सेना के घुसने की आलोचना करके राष्ट्र के खिलाफ काम किया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वहां पिछले दो दिनों से चल रहीं नाट्य-प्रस्तुतियां राष्टÑविरोधी और जातिवादी हैं।

संजीव कुमार ने बताया कि इसके पहले हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में पिछली 21 सितंबर को महाश्वेता देवी को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी विश्व-प्रसिद्ध कहानी ‘द्रौपदी’ का मंचन किया गया। यह कहानी कई विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में है और इसका नाट्य-रूपांतरण भी अनेक समूहों द्वारा अनेक रूपों में किया जा चुका है। जुलाई में दिवंगत हुर्इं महाश्वेता देवी को याद करते हुए इसी कहानी का मंचन हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में किया गया। मंचन के दौरान शांति रही और नाटक को भरपूर सराहना मिली। लेकिन उसके बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के लोगों ने भारतीय सेना को बदनाम करने की साजिश बताकर इस मंचन के विरोध में हंगामा शुरू किया।

महाश्वेता देवी को राष्ट्रविरोधी लेखिका के रूप में प्रचारित किया गया, कुलपति के पुतले फूंके गए और विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने यह मांग रखी गई कि नाट्य-मंचन की इस ‘देशद्रोही’ गतिविधि के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। हंगामे के बाद विश्वविद्यालय ने नाटक के मंचन से जुड़े शिक्षकों पर एक जांच कमेटी बिठा दी, जबकि इस मंचन के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन से पूर्व-अनुमति ली गई थी। अब अंग्रेजी विभाग के प्राध्यापक सनेहसता और मनोज कुमार कार्रवाई के निशाने पर हैं। संजीव कुमार ने कहा कि जनवादी लेखक संघ लेखकों व संस्कृतिकर्मियों से अपील करता है कि इस माहौल के विरोध में अपनी आवाज बुलंद करें और अभिव्यक्ति की आजादी पर होने वाले हमलों का सीधा प्रतिकार करने के लिए एकजुट हों।

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First Published on October 7, 2016 1:23 am

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