June 29, 2017

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रीता बहुगुणा जी, क्‍या सच में आपके भाजपा में जाने के कारण वही हैंं, जो आपने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में गिनाए

लखनऊ कैंटोमेंट से विधायक जोशी पिछले लोक सभा चुनाव में लखनऊ से राजनाथ सिंह के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरी थीं लेकिन उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था।

रीता बहुगुणा जोशी। (Photo-Indian Express/File)

यूपी कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और विधायक रीता बहुगुणा जोशी गुरुवार (20 अक्टूबर) को अपनी पुरानी पार्टी से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो गईं। माना जा रहा है कि जोशी शीला दीक्षित को यूपी के सीएम पद का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद से ही पार्टी से असंतुष्ट थीं। राज बब्बर को यूपी कांग्रेस का अध्यक्ष बनाये जाने के बाद उनके सब्र का बांध टूट गया। जोशी 2007 से 2012 तक यूपी कांग्रेस की अध्यक्ष रही थीं। बीजेपी में शामिल होने से पहले जोशी समाजवादी पार्टी के नेता और यूपी के सीएम अखिलेश यादव से भी मिली थीं। तब उनके सपा में शामिल होने की अटकल लगाई जा रही थी। लेकिन शायद वहां उनकी बात नहीं बनी। उनके बीजेपी में जाने की खबर सूत्रों के हवाले से तीन-चार पहले ही मीडिया में आ गई थी जिसकी आज आधिकारिक पुष्टि भी हो गई।

67 वर्षीय जोशी तीन दशकों से अधिक समय से राजनीति में हैं इसलिए उनके लिए उसी पार्टी में शामिल होने में ज्यादा मुश्किल नहीं आएगी जिसका वो इतने लंबे समय से विरोध करती रही हैं। लेकिन हैरत की बात ये है कि जोशी ने गुरुवार को बीजेपी में शामिल होने के लिए जो तर्क दिए उन पर शायद कोई काठ का उल्लू ही यकीन करेगा। जोशी ने कहा कि वो राहुल गांधी के “खून के दलाली” वाले बयान से आहत थीं। जोशी ने कहा, “खून की दलाली जैसे शब्द का उपयोग किया गया, उससे मैं काफी दुखी हो गयी।” जोशी ने कहा कि जब पूरी दुनिया भारत की सर्जिकल स्ट्राइक पर यकीन कर रही थी तब कांग्रेस और दूसरी पार्टियों द्वारा इस पर सवाए उठाए जाना उन्हें पसंद नहीं आया।

वीडियो: विदेश सचिव ने कहा पहले भी हुई थी एलओसी पारकर के कार्रवाई- 

जोशी ने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में नई दिल्ली में पार्टी में शामिल होने की घोषणा की। लेकिन अभी तक ये नहीं पता चला है कि बीजेपी में उन्हें क्या पद दिया जाएगा? जोशी को जो कांग्रेस में नहीं मिला वो बीजेपी में मिलेगा? जोशी लाख कहें कि वो सर्जिकल स्ट्राइक पर दिए गए बयानों और पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व से प्रभावित होकर बीजेपी में आई हैं लेकिन उनकी बात पर यकीन शायद ही किसी को होगा। और वो बीजेपी किन शर्तों पर आई हैं ये वक्त आने पर सबके सामने जरूर ही आ जाएगा।

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गौरतलब है कि उनके भाई विजय बहुगुणा को कांग्रेस ने उत्तराखंड का सीएम बनाया था। बाद में जब उन्हें सीएम पद से हटा दिया गया तो कुछ समय तक वो पार्टी से रुष्ट बने रहे फिर कांग्रेस की सरकार गिराने की विफल कोशिश की और राज्य की सत्ता नहीं हाथ लगी तो बीजेपी का दामन थाम लिया। जोशी के पिता और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा भी कांग्रेस पार्टी की सरकार में यूपी के सीएम रहे थे। लेकिन 1980 में कांग्रेस छोड़कर उन्होंने इंदिरा गांधी के धुरविरोधियों से हाथ मिला लिया था। अगर पद का लालच न भी हो तो जोशी अपने परिवार की परंपरा तो जरूर ही निभायी है।

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First Published on October 20, 2016 3:55 pm

  1. R
    Ram
    Oct 20, 2016 at 5:53 pm
    Amit shahka muh dekho... he himself is not happy to take this budhiya in bjp
    Reply
    1. I
      Indian
      Oct 21, 2016 at 12:55 am
      BJP up chunav se pahle kabaad ikttha kar rhi h. Haha
      Reply
      1. D
        Dev Verma
        Oct 20, 2016 at 7:38 pm
        बिलकुल ी ईसे लगता है जैसे कोई कड़बी चीज़ खा ली हो !
        Reply
        1. D
          Dinesh Singh
          Oct 20, 2016 at 9:39 pm
          dheere dheere, BJP congress ki B team ho ee hai. pehle se hi 84 MP purane congressi hai ab ye bhi sahi. Lagta hai isee vazah se Vadra aur soniya ke khilaaf kuch nahi karta.
          Reply
          1. V
            vikash singh
            Oct 20, 2016 at 11:51 am
            तो मुझे ये समझ नहीं आ रहा है जनसत्ता एक मीडिया के तरह नहीं कांग्रेसी प्रलक्ता के तरह क्यू बात कर रहे हो?? बहुत ा लगा जनसत्ता को वोह अले अले
            Reply
            1. P
              Praveen Misra
              Oct 21, 2016 at 11:20 am
              राज बब्बर भी तो दगाबाज़ है क्योंकि वह भी पहले समाजवादी पार्टी में था और मुलायम सिंह को धोका देकर कांग्रेस में आ गया था.
              Reply
              1. A
                abbeg
                Oct 20, 2016 at 12:04 pm
                नमक kya hoti hai Rita ne batla diya
                Reply
                1. D
                  Dev Verma
                  Oct 20, 2016 at 7:37 pm
                  नहीं है बेटा लोग डूबते जहाज में सफर नहीं करना चाहते !
                  Reply
                2. S
                  sanjay
                  Oct 20, 2016 at 11:21 am
                  नेता लोग या तो पार्टी के द्वारा उनकी उपेक्षा की जाती है तब छोड़कर जाते है या पार्टी की कार्यप्रणाली के कारण उनकी छवि जनता में धूमिल होती है तब छोड़कर जाते है या अपने निजी स्वार्थ या चुनाव में जितने हेतु जाते है ! लेकिन इनके आने जाने से इनके सिद्धान्त में बदलाव आता है क्योकि सभी पार्टियों के अपने अलग अलग सिद्धान्त है ! अब रीताजी धर्मनिरपेक्ष पार्टियों को आइना दिखाएगी और राष्ट्रवाद का पाठ इन पार्टियों को बताएगी,क्योकि बीजेपी का मूल सिद्धान्त ही हिंदुत्व और राष्ट्रवाद है!
                  Reply
                  1. S
                    shivshankar
                    Oct 20, 2016 at 8:27 pm
                    नमक हराम नहीं हैं रीता जी पार्टी बदलना उनका पेशा है . पहले समाजवादी पार्टी से कांग्रेस मैं आई अब समाजवादी पार्टी के दर से शाहजी की शरण मैं आ गई हैं.
                    Reply
                    1. S
                      shivshankar
                      Oct 20, 2016 at 8:30 pm
                      बीजेपी का मूल सिद्धान्त हिंदुत्व और राष्ट्रवाद है !!!! आप बहुत अच्छे जोकस सुनाते हैं
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                      सबरंग