March 23, 2017

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भाजपा में शुरू हुई बगावती बात, वर्तमान निगम पार्षदों के टिकट कटने से शुरू हुई बगावत

दिल्ली के तीनों निगमों के 272 सीटों पर मौजूदा भाजपा के निगम पार्षदों में किसी को भी पार्टी इस बार चुनाव नहीं लड़ाएगी।

Author नई दिल्ली | March 20, 2017 02:42 am
मनोज तिवारी

दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी आलाकमान का वर्तमान निगम पार्षदों को टिकट नहीं देने के फैसले का विरोध शुरू हो गया है। प्रदेश भाजपा कार्यकारिणी के वरिष्ठ सदस्य नंदराम बागड़ी कहते हैं कि यह पूरी तरह से तुगलकी फरमान है। उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है कि आखिर सभी पार्षदों को किस बिना पर चुनाव से महरूम किया जा रहा है। उनका निशाना सीधे तौर पर प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी पर भी है। बागड़ी की बेटी सुशीला बागड़ी मौजूदा समय में सुल्तानपुरी से निगम पार्षद हैं और उन्हें भी इस फरमान पर हैरानी है।
दिल्ली के तीनों निगमों के 272 सीटों पर मौजूदा भाजपा के निगम पार्षदों में किसी को भी पार्टी इस बार चुनाव नहीं लड़ाएगी। इतना बड़ा फैसला प्रदेश मुख्यालय में आयोजित एक कांफ्रेंस में अध्यक्ष मनोज तिवारी ने घोषित किया। फैसले के पीछे क्या तर्क हो सकते हैं यह भी नहीं बताया गया और सिर्फ पार्टी आलाकमान के फैसले बताकर सभी पार्षदों को तुगलकी फरमान सुना दिया गया। 36 से ज्यादा पार्षदों ने पूरी तरह से बगावती तेवर अपनाया है। इनमें आधा दर्जन पार्षदों से दूसरे दलों में शामिल होने की हरी झंडी मिल चुकी है। इन पार्षदों ने अपने साथ वार्ड के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को लेकर आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और अन्य दलों में जाने की तैयारी कर ली है। एक-दो दिन में इसका एलान हो सकता है।

1996 में जनता दल के राष्ट्रीय महामंत्री का पद छोड़कर भाजपा में आने वाले नंदराम बागड़ी कहते हैं कि कांग्रेस के गढ़ सुल्तानपुरी में उन्होंने पार्टी को तब जीत दिलाई थी जब भाजपा का कोई नाम लेने वाला नहीं था। सज्जन कुमार जैसे कद्दावर नेता को उन्हीं के नेतृत्व में केएल शर्मा ने निगम चुनाव हराया था। बाल-बच्चों को दुनियावी सुख सुविधाओं से वंचित कर पार्टी फंड में पैसे कार्यकर्ता जमा कराएं और चुनाव लड़े आलाकमान का तय उम्मीदवार।बागड़ी ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि जिन्हें दिल्ली की एबीसीडी की जानकारी नहीं वे सांसद और प्रदेश अध्यक्ष बनकर जमीनी कार्यकर्ताओं को उपेक्षित कर रहे हैं। वे कहते हैं, ‘श्याम जाजू, विजेंद्र गुप्ता और उनकी पत्नी शोभा विजेंद्र लाल बत्ती लें, सत्ता सुख भोगें तो ठीक और आरक्षित समुदाय के नेता आगे आएं यह पार्टी को मान्य नहीं। जो खून पसीने से पार्टी का परचम लहरा सकता है वह खून-पसीने से पार्टी को धूल में उड़ा भी सकता है’।

फैसले के साथ हैं, कहने वाले भी डटे

दक्षिणी निगम में भाजपा के कद्दावर पार्षद, मेयर, डिप्टी मेयर, स्थाई समिति अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य अहम पदों पर रहे राजेश गहलौत कहते हैं कि पार्टी आलाकमान का फैसला सिर आंखों पर। पश्चिमी दिल्ली में करीब 45 पार्षदों में एक भी विरोध नहीं करेंगे। निर्दलीय और अन्य दलों में जाने वाले बाद में पछताएंगे। उत्तरी निगम की स्थाई समिति के उपाध्यक्ष और प्रदेश महामंत्री राजेश भाटिया कहते हैं कि पार्टी ने सोच-समझकर इस तरह का फैसला किया है। पार्टी में कई प्रकोष्ठ होते हैं। विधानसभा और संगठन में कार्य अलग से है। फिर विरोध किस बात का। जो पार्षद विरोध करेगा वह पार्टी की नीतियों का विरोध होगा। जबकि पूर्वी दिल्ली के उप-मेयर राजकुमार ढिल्लो कहते हैं कि हम पार्टी और आलाकमान के साथ हैं।

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First Published on March 20, 2017 2:42 am

  1. D
    dharmendrakumar
    Mar 21, 2017 at 2:28 pm
    [email protected] 9695709068
    Reply
    1. S
      Sidheswar Misra
      Mar 20, 2017 at 9:25 pm
      पुराने पार्षद इतने बदनाम थे इस लिए नए चेहरे ला रहे है।
      Reply

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