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आज दिए जाएंगे भारतीय मीडिया के सबसे प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका अवार्ड

रामनाथ गोयनका एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म अवार्ड्स यहां सोमवार को दिए जाएंगे। पत्रकारिता के विभिन्न वर्गों में उत्कृष्ट उपलब्धि, खबरों के लिए हर साल ये पुरस्कार दिए जाते हैं..
Author नई दिल्ली | November 23, 2015 09:41 am

रामनाथ गोयनका एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म अवार्ड्स यहां सोमवार को दिए जाएंगे। पत्रकारिता के विभिन्न वर्गों में उत्कृष्ट उपलब्धि, खबरों के लिए हर साल ये पुरस्कार दिए जाते हैं। आठवीं बार ये अवार्ड दिए जा रहे हैं। जिन खबरों के लिए ये पुरस्कार दिए गए हैं, वे देश के उपेक्षित इलाकों से लेकर प्राकृतिक आपदा से तबाह हुए क्षेत्रों की हैं। ये खबरें मुख्तलिफ प्रकार की हैं, लेकिन इनमें उत्कृष्ट पत्रकारिता की झलक है।

इस साल के पुरस्कार 2013 और 2014 में उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए दिए जा रहे हैं। प्रिंट और प्रसारण की पंद्रह श्रेणियों में आए नामाकंनों से इन विजेताओं का चयन किया गया। केंद्रीय वित्त और सूचना प्रसारण मंत्री अरुण जेटली पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। वे विजेताओं को अवार्ड प्रदान करेंगे। भारतीय सिनेमा के मकबूल अदाकार आमिर खान इस समारोह का खास आकर्षण होंगे। समारोह में वे लोगों से रूबरू होकर अपनी बात रखेंगे।

पुरस्कार के लिए अंतिम नामों का चयन बड़ी तादाद में आई प्रविष्ठियों से किया गया। चयन मंडल में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बीएन श्रीकृष्णा, एचडीएफसी लिमिटेड के चेयरमैन दीपक पारेख, एशियानेट टीवी चैनल के संस्थापक और एशियन कॉलेज आॅफ जर्नलिज्म के चेयरमैन शशिकुमार, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी और वरिष्ठ पत्रकार और इंडियन काउंसिल आॅफ सोशल साइंस रिसर्च की वरिष्ठ फेलो पामेला फिल्पोस थे।

शशि कुमार ने कहा कि निजी तौर पर मैंने पाया कि खबरों की रेंज काफी असर छोड़ने वाली है। कुल मिलाकर भारतीय प्रविष्टियां भारतीय समाचार माध्यम की वस्तुस्थिति बयां करती है। इन खबरों की पहुंच और नजरिया भी ताजगी लिए था। इनमें से किसी एक को छांटना वाकई दुष्कर काम था। और यह अक्सर होता है। वास्तव में यह उत्कृष्टता की प्रतियोगिता है। जस्टिस श्रीकृष्णा ने कहा कि चयन के लिए कई तरह के मापदंड रखे गए थे।

लेकिन हमने खबरों के सामाजिक महत्त्व पर गौर किया। हमने खबरों के अंदाज और भाषा पर ध्यान दिया और पुरस्कार के लिए इस पहलू को पैमाना माना। पामेला की राय थी कि खबरों की रेंज के आधार पर हमने पुरस्कार का चयन किया। यहां तक कि सिर्फ एक घटना को कोई तरीके से कवर किया गया था। उदाहरण के लिए कश्मीर की बाढ़ का जिस तरह समाचार-संकलन किया गया, वह प्रभावित करने वाला था। हमारी पीढ़ी को इन नए लोगों जैसा प्रशिक्षण नहीं मिला था। क्षेत्रीय कार्य ने भी मुझे प्रभावित किया।

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