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नवाजुद्दीन को नहीं मिला मौका लेकिन रहमान बनते हैं कुंभकर्ण, रुखसार नजर आती हैं ट्रिपल रोल में

पश्चिमी दिल्ली के द्वारका सेक्टर-10 में श्री रामलीला सोसाइटी में रामलीला मंचन में उत्तर प्रदेश की रुखसार एक साथ तीन भूमिका निभा रहीं हैं।
Author नई दिल्ली | October 11, 2016 09:09 am
रामलीला (फाइल फोटो-इंडियन एक्सप्रेस अमित मेहरा)

फिल्म अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी को मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना में रामलीला में अभिनय करने का मौका नहीं दिया गया, लेकिन दिल्ली में कमोबेश सभी बड़ी रामलीलाओं में मुसलिम युवक-युवतियां रामायण के किरदार निभा रहे हैं। ऐसी ही एक कलाकार हैं रुखसार जो द्वारका की रामलीला में उर्मिला, सुलोचना और लक्ष्मी के तीन-तीन किरदार निभा रही हैं। दूसरी तरफ लाल किले के बाहर मुजीबुर रहमान कुंभकर्ण की भूमिका अदा कर रहे हैं। इसी तरह पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड कड़कड़डूमा में आलम अली के जिम्मे रावण का पुतला बनाने का काम है। अजमल खां पार्क, करोलबाग में नजीब अहमद रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतले बनाने का काम करते हैं। यह सामाजिक सौहार्द का ही एक उदाहण है हालांकि गाहे-बगाहे कुछ इलाके में छिटपुट सांप्रदायिक झगड़े को छोड़कर अमूमन दिल्ली के लोग मिल जुलकर ही रहते हैं।

पश्चिमी दिल्ली के द्वारका सेक्टर-10 में श्री रामलीला सोसाइटी में रामलीला मंचन में उत्तर प्रदेश की रुखसार एक साथ तीन भूमिका निभा रहीं हैं जिसकी वहज से वह चर्चा में भी हैं। सौम्य, सुंदर रूखसार लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला, सुलोचना और लक्ष्मी की भूमिका निभा रही है। इसी रामलीला में चिराग खान इंद्रदेवता और अन्य छोटी भूमिका निभा रहा है। दोनों कलाकार युवा है। यहां कई मुसलिम कलाकर पूरे एक महीने से दुर्गा पूजा में व्यस्त रहते हैं और रामलीला के मंचन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। रामलीला कमेटी के संरक्षक और पूर्व विधायक राजेश गहलौत का कहना है कि हमारे यहां रावण और राम की सेना के बीच के युद्ध का मंचन, लक्ष्मण को मूर्छित दिखाना और साक्षात भगवान का स्वयं मैदान में उतरकर युद्ध करने जैसे रोमांचक प्रसंगों दर्शाया जाता है। जिसे देखकर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, सांसद तरुण विजय, ओमप्रकाश यादव और स्थानीय सांसद प्रवेश वर्मा मुसलिम युवाओं के जोश और रामायण के मंचन को देख कर उनकी तारीफ करने से खुद को नहीं रोक पाए। उन्होंने कहा अक्सर सम्प्रदाय का सवाल उठता है लेकिन यहां साम्प्रदायिकता जैसी कोई बात नहीं। सभी समुदाय के लोग रामलीला देखने आते हैं। जो उत्साद हिंदू युवाओं में दिखता है उससे कहीं ज्यादा उत्साह मुसलिम कलाकारों में देखने को मिलता है।

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नवश्री धार्मिक लीला कमेटी, लाल किला ग्राउंड पर 59 सालों से रामलीला का मंचन करा रहे हैं। यहां दिल्ली का मुजीबुर रहमान कुंभकर्ण की भूमिका अदाकर सबकी आंखों के तारा हैं। 25 साल का मुजीबुर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में पढ़ाई कर रहे हैं। साथ इस रामलीला के पूरे आइटी विभाग का जिम्मा भी संभाले हुए हंै। मुजीबुर हालांकि पहली बार कुंभकर्ण की भूमिका यहां निभा रहे हैं पर यहां रावण के पुतले बनाने से लेकर आतिशबाजी तक का जिम्मा मुसलिम युवाओं पर ही है। नव श्री धार्मिक लीला में उत्तरप्रदेश सरकार के स्वास्थ्य लेखा अधिकारी अरविंद शर्मा रावण की भूमिका में हैं। कमेटी के मुख्य आयोजकों जगमोहन गोटेवाला, पदमचंद शर्मा और बृजमोहन शर्मा कहते हैं कि यह रामलीला अपने तरीका का है। यहां हिंदू- मुसलिम नहीं बल्कि सभी धर्मों के लोग समान भक्तिभाव से आते हैं। सोमवार को उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को हमने आमंत्रित किया तो मंगलवार को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी आमंत्रित हैं। पुरानी दिल्ली की यह रामलीला भाईचारे की मिसाल है। बनाई है।

दिल्ली के रामलीलाओं में मुसलिम किरदार ही नहीं बल्कि मुसलिमों की भागीदारी का अनुमान इस से लगाया जा सकता है कि बिना मेहनताना तय किए भोपुरा के फरूखनगर का आलम अली एक महीने से 60 आदमियों के साथ दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। आलम कहते हैं कि हम पैसे लेते जरूर हैं यह तय नहीं होता है। कोई दो लाख भी दे देता है, तो कोई एक लाख, 50 हजार या 25 हजार। हम मेहनत करते हैं और मेहनताना आयोजकों पर छोड़ देते हैं। आलम के साथ अनवर अहमद, चंद्रपाल, लाजिम खान, रामजाने और इदरिश दिल्ली के सात रामलीलाओं में रावण के पुतले बनाने से लेकर दुर्गापूजा के बाद जुलूस, झांकियां और फिर दीवाली की तैयारी में व्यस्त हो जाते हैं। वे कहते हैं कि सदभाव, भाईचारा हमारे खून में है। हम धर्म पर सोचते कम हैं अपनी भूमिका और काम पर ज्यादा ध्यान देते हैं। आलम इस बार सीबीडी ग्राउंड बालाजी रामलीला कमेटी के भगवत रुस्तगी और मुकेश गुप्ता के आमंत्रण पर एक महीने से पुतले बना रहे हैं।सबसे ऊंचे पुतलों की होड़ में नजीब का बनाया रावण का पुतला है जिसकी ऊंचाई 85 फीट है। वही मेघनाद व कुम्भकर्ण के पुतलों को उंचाई भी 80 फीट रखी गई है। संस्था के महामंत्री अशोक कपूर, मंत्री प्रवीन कपूर एंव अध्यक्ष देवेश गुप्ता का कहना है कि जब बुराई पर अच्छाई के प्रतीत के रूप में रामलीला होती हैं तो फिर उसमें हिंदू और मुसलिम की बात ही कहां है। पिछले 20 सालों से नजीब अहमद अपने पूरे परिवार के साथ यहां रावण, मेघनाद व कुम्भकर्ण का पुतला बना रहे हैं।

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First Published on October 11, 2016 4:01 am

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