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नॉर्थ-ईस्ट के छात्रों से कुकर्म करते थे रामजस कॉलेज के पूर्व वाइस प्रिंसिपल- दूसरी जांच में भी पाए गए दोषी

जांच कमेटी की पहली रिपोर्ट को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था और मैं इस नई रिपोर्ट के बारे में कुछ नहीं जानता क्योंकि मैं साल 2015 में रामजस से रिटायर हो गया था।
Author नई दिल्ली | September 17, 2017 12:52 pm
इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (फाइल)

दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज के पूर्व वाइस प्रिंसिपल पर 9 साल पहले नॉर्थ-ईस्ट छात्रों से किए गए कुर्कम के मामले में उन्हें दूसरी जांच के बाद भी दोषी पाया गया है। अक्टूबर 2007 में हजारों की संख्या में छात्रों ने आरोपी के खिलाफ कैंपस में विरोध प्रदर्शन किया था और शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले की जांच के लिए कॉलेज प्रशासल द्वारा इसकी जिम्मेदारी कॉलेज शिकायत कमेटी को दी गई थी, जिसमें आरोपी वाइस प्रिंसिपल बीएन रेय को छात्रों के साथ कुर्कम करने का दोषी पाया गया था। इसके बाद कॉलेस प्रशासन द्वारा रेय को उनके पद से हटा दिया गया था और कॉलेज न आने के लिए कहा गया था लेकिन फिर भी बिना किसी वित्तीय नुकसान के रेय कॉलेज आया करता था।

कॉलेज शिकायत कमेटी के फैसले के खिलाफ रेय ने 2012 में दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसके बाद कोर्ट ने रामजस कॉलेज को एक बार फिर से जांच करने के निर्देश दिए थे। कॉलेज ने हाई कोर्ट के आदेश पर फिर से कमेटी से जांच कराई जिसमें रेय को दोषी पाया गया है। इस मामले में जब बीएन रेय से पूछा गया तो उन्होंने हाल ही में आई रिपोर्ट की जानकारी होने से इनकार कर दिया और अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। जांच कमेटी की पहली रिपोर्ट को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था और मैं इस नई रिपोर्ट के बारे में कुछ नहीं जानता क्योंकि मैं साल 2015 में रामजस से रिटायर हो गया था। फिलहाल मैं इस बारे में कुछ नहीं कह सकता।

कॉलेज कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2016 में पांच सदस्यी कमेटी ने कहा था कि बीएन पर लगे छह में से 4 कुकर्म के केस सही साबित हुए हैं। बीएन पर आरोप है कि उन्होंने करीब दो साल तक छात्रों के साथ शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश की। वे छात्रों को गलत तरीके से गले लगाते, किस करते और उनके प्राइवेट पार्ट को छुआ करते थे। बीएन रेय पर चार केस साबित हुए हैं जिनमें वे नार्थ-ईस्ट छात्रों को अपना शिकार बनाया करते थे। कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि बीएम रेय को किसी भी इंस्टीट्यूशन में एक शिक्षक की भूमिका में रहने का कोई हक नहीं है।

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