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केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार व चार अन्य 5 दिन की सीबीआई हिरासत में

50 साल के राजेंद्र कुमार पर 2007 से 2014 के दौरान पैसे लेकर सामान आपूर्ति का ठेका देने का आरोप है।
Author नई दिल्ली | July 5, 2016 19:48 pm
15 दिसंबर को सीबीआई ने सीएम अरविंद केजरीवाल के मुख्‍य सचिव राजेंद्र कुमार के दफ्तर में छापा मारा था।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार और चार अन्य लोगों को मंगलवार (5 जुलाई) को एक विशेष अदालत ने पांच दिनों की सीबीआई हिरासत में भेज दिया। इन लोगों को कथित भ्रष्टाचार के एक मामले में गिरफ्तार किया गया है और एजेंसी ने अदालत से कहा कि आईएएस अधिकारी गवाहों को ‘धमकी’ दे रहे हैं। विशेष सीबीआई न्यायाधीश अरविन्द कुमार ने कुमार, केजरीवाल के कार्यालय में उप सचिव तरूण शर्मा, कुमार के करीबी सहयोगी अशोक कुमार तथा एक निजी कंपनी के मालिकों संदीप कुमार तथा दिनेश गुप्ता को सीबीआई हिरासत में भेज दिया।

सुनवाई के दौरान सीबीआई ने आरोपियों से 10 दिनों तक हिरासत में पूछताछ के लिए अनुरोध किया। सीबीआई ने दावा किया कि राजेंद्र कुमार एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं और उन्हें गिरफ्तार किए बिना निष्पक्ष जांच संभव नहीं है क्योंकि वह गवाहों को धमकी दे रहे हैं। सीबीआई अभियोजक ने अदालत में कहा, ‘वह एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं और उच्चपदस्थ अधिकारी हैं। उन्हें गिरफ्तार किए बिना हम निष्पक्ष जांच नहीं कर सकते क्योंकि वह गवाहों को धमकी दे रहे हैं।’

इस पर अदालत ने सवाल किया कि ‘क्या गवाहों को धमकी देने की कोई घटना हुयी है?’ इसके जवाब में एजेंसी अधिकारी ने कहा, ‘हां, हमने ऐसे गवाहों के बयान दर्ज किए हैं।’ एजेंसी ने यह आरोप भी लगाया कि गिरफ्तार आरोपियों के बीच साठगांठ है और कुमार उन सबसे भलीभांति परिचत हैं तथा उन लोगों ने एंडेवर सिस्टम्स प्रा. लि. को ठेका देने के लिए षडयंत्र किया। एजेंसी ने कहा कि पैसे के लेनदेन का पता लगाना है और उसके पास कुमार तथा अन्य आरोपियों के बीच बातचीत का आडियो टेप है।

कुमार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मोहित माथुर ने सीबीआई के रिमांड आवेदन का विरोध करते हुए कहा कि एजेंसी की याचिका में ऐसा कोई आधार नहीं बताया गया है जिससे सीबीआई हिरासत की जरूरत का पता लगता हो। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड में एक भी ऐसा दस्तावेज नहीं है जिससे पता लगता हो कि उनके मुवक्किल का गिरफ्तार अन्य आरोपियों से कोई संबंध था। माथुर ने यह भी दलील दी कि कुमार के खिलाफ ऐसी कोई शिकायत नहीं है कि उन्होंने किसी को गलत तरीके से नुकसान पहुंचाया।

शर्मा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रमेश गुप्ता ने कहा कि उनके मुवक्किल ने जांच में सहयोग किया था और उन्हें गिरफ्तार करने का कोई आधार नहीं था। बचाव पक्ष की दलीलों का विरोध करते हुए एजेंसी ने कहा कि मामले में जांच चल रही है और कुछ साक्ष्य सामने आए हैं जिससे धोखाधड़ी और फर्जीवाड़ा जैसे अपराध का पता लग सकता है।
अदालत ने दलीलें सुनने के बाद कहा कि आरोपियों को 10 दिनों की रिमांड में देने के सीबीआई के अनुरोध पर वह मंगलवार (5 जुलाई) को बाद में फैसला सुनाएगी।

सुनवाई के लगभग आखिरी चरण में आरोपी दिनेश गुप्ता ने न्यायाधीश से कहा, ‘मुझ पर सरकारी गवाह बनने का दबाव डाला जा रहा है और मुझे सीबीआई द्वारा धमकी दी जा रही है।’ पांचों आरोपियों को 50 करोड़ रुपए का एक सरकारी ठेका एक निजी कंपनी को देने में पक्षपात के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

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