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पुलिस नए जवानों को देगी कोटपा कानून का सबक

सार्वजनिक स्थानों पर लोग सिगरेट पीते देखे जा सकते हैं। स्कूलों के 100 मीटर के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री अभी भी जारी है।
Author नई दिल्ली | July 17, 2017 02:16 am
रोजाना सिगरेट पर किया गया खर्च कुछ सालों में आपको करोड़ों का नुकसान पहुंचाता है।

दिल्ली पुलिस ने अपने जवानों-अधिकारियों के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में ‘कोटपा’ (सिगरेट व अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003) कानून के प्रावधानों को शामिल करने का फैसला किया है। पुलिस मुख्यालय की ओर से पुलिस प्रशिक्षण केंद्र को इस बाबत सर्कुलर जारी किया गया है। पुलिस आयुक्त की ओर से सहायक पुलिस आयुक्त प्रिया मित्रा कौशिक ने विशेष आयुक्त (पुलिस प्रशिक्षण केंद्र) को लिखे पत्र में पुलिस के जवानों व अफसरों को ‘कोटपा’ कानून के प्रावधानों से रूबरू कराने के लिए प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में अपबंधों का स्थायी समावेश करने को कहा है। इस कवायद का उद्देश्य संसद की ओर से पारित इस कानून को समाज में लागू करने के लिए पुलिस बल को सजग करना है।  ‘कोटपा’ कानून 2003 से लागू है लेकिन शुरुआत के कई सालों तक इसको लेकर सख्ती देखने को नहीं मिली। सार्वजनिक स्थानों पर लोग सिगरेट पीते देखे जा सकते हैं। स्कूलों के 100 मीटर के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री अभी भी जारी है। इतना ही नहीं, 18 साल से कम उम्र के बच्चों को तंबाकू उत्पाद नहीं बेचने या देने के प्रावधान की दुकानदारों ने केवल बोर्ड लगाकर रस्म अदायगी भर की है। बता दें कि इस कानून में एक लाख तक का जुर्माना व सात साल की सजा का प्रावधान है।

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ऐसा नहीं है कि इस बाबत पुलिस कुछ नहीं कर रही है। दिल्ली नगर निगम, समाजिक व गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से तंबाकू के दुष्प्रभाव को लेकर जागरूकता व उसकी रोकथाम के लिए जवानों को संवेदनशील बनाया जाता रहा है। अब इसे ट्रेनिंग का हिस्सा बनाए जाने पर और फायदा होगा। यह सब संबंध फाउंडेशन के प्रयासों से संभव हो सका है। पुलिस और नगर निगमों ने संबंध के साथ जुड़कर शिक्षण संस्थानों को तंबाकू मुक्त करने और पुलिस बल को इसके प्रति संवेदनशील बनाने के कई कार्यक्रम किए थे। इसके बाद संबंध की प्रोजेक्ट मैनेजर डॉ हिना श्ोख ने पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) बिक्रमजीत सिंह से कोटपा कानून को पुलिस अकादमी के पाठयक्रम में शामिल करने की मांग की थी, जिसके बाद पुलिस मुख्यालय अपने जवानों-अधिकारियों के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में ‘कोटपा’ कानून के प्रावधानों को शामिल करने का फैसला किया।
डॉ हिना श्ोख ने कहा कि कानून संसद बनाती है और उसे लागू करने का जिम्मा नौकरशाही का है। जब मामला जनता के रहन-सहन से जुड़ा हो तो यह और भी संवेदनशील हो जाता है। कोटपा सिगरेट व अन्य तंबाकू उत्पादों से जुड़ा कानून है। निश्चित तौर पर दिल्ली पुलिस का यह कदम मील का पत्थर साबित होगा। अब पुलिस अकादमी में ही प्रशिक्षण में अधिकारी, कर्मचारी व जवानों को कोटपा कानून के उल्लंघन पर कार्रवाई की तकनीकी जानकारी मिलेगी। वे तंबाकू व अन्य धूम्रपान उत्पादों के दुष्प्रभाव व इसे रोकने के लिए बने कानून की तमाम धाराओं को समझ सकेंगे।

क्या कहते हैं आंकड़े
आंकड़ो पर नजर डालें तो स्थिति भयावह है। ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे (गेट्स 2017) के अनुसार देशभर में 15 से 24 साल तक के 12.4 फीसद युवा तंबाकू उत्पादों की गिरफ्त में हैं। संबंध फाउंडेशन के संजय सेठ के मुताबिक, दिल्ली में रोजाना 81 बच्चे इसकी शुरुआत करते हैं, वहीं देश में 5500 बच्चे रोज तंबाकू सेवन की शुरुआत करते हैं और वयस्क होने से पहले ही तंबाकू के आदी हो जाते हैं। इसी कारण दिल्ली में हर साल 10600 लोग अपनी जान गंवा देते हैं। सार्वजनिक स्थल और महाविद्यालय परिसर के अंदर व इसकी चारदीवारी के सौ गज के दायरे में किसी भी तरह के तंबाकू उत्पादों की बिक्री या सेवन करते पाए जाने पर जुर्माना और जेजे एक्ट के तरह जेल का प्रावधान है।

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First Published on July 17, 2017 2:16 am

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