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आॅनलाइन ड्रग्स तस्करी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़

इस धंधे में डिजिटल भुगतान की मुद्रा बिटकॉइन के जरिए भुगतान किया जाता है। पुलिस को सूचना मिली थी कि पार्टियों में ड्रग की आपूर्ति करने वाला एक गिरोह दिल्ली में सक्रिय है।
Author नई दिल्ली | November 7, 2017 03:22 am
ड्रग्स। (file picture)

दिल्ली पुलिस ने आॅनलाइन ड्रग्स तस्करी के धंधे में शामिल एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह देश में आॅनलाइन ड्रग के धंधे का पहला मामला है जिसका खुलासा किया गया है। दिल्ली पुलिस के अपराध प्रकोष्ठ की नारकोटिक्स शाखा ने इस धंधे में शामिल दो लोगों को गिरफ्तार कर करोड़ों रुपए की कीमत का ड्रग्स बरामद किया है। इस धंधे में डिजिटल भुगतान की मुद्रा बिटकॉइन के जरिए भुगतान किया जाता है। पुलिस को सूचना मिली थी कि पार्टियों में ड्रग की आपूर्ति करने वाला एक गिरोह दिल्ली में सक्रिय है। 29 अक्तूबर को मिली गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने रोहिणी सेक्टर-11 में रहने वाले कमल कालरा और द्वारका निवासी महेश गोयल को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक उनके पास से नशे की 100 गोलियां का पत्ता बरामद किया गया। एक्सटेसी नाम की दवा का यह 42 ग्राम का पत्ता है जिसकी कीमत करोड़ों में आंकी गई है। इसे दिल्ली और अन्य राज्यों में भेजा जाना था।

पहली बार इस तरह के मामले को पकड़ने वाली दिल्ली पुलिस के उपायुक्त (अपराध शाखा) राजेश देव ने बताया कि पूछताछ में कालरा ने बताया कि उसने ड्रग्स फोन पर संपर्क में आए व्यक्ति से लिया है जो कभी अपना नाम संजय तो कभी उत्कर्ष बताता है। फोन डिटेल खंगालने पर पुलिस को महेश का सुराग मिला। पूछताछ में पता चला कि वह महेश है, जो पहले चेन्नई में रहता था। महेश क ो द्वारका से गिरफ्तार किया गया। यह दोनों फोन पर स्कूली बच्चों से लेकर युवाओं के लिए ड्रग्स मुहैया कराते थे। रेव पार्टियों मे इसका काफी चलन है। पूछताछ में उन्होंने बताया कि एक पार्टी में जब उसने इस ड्रग्स का इस्तेमाल किया तो उसे पता चला कि आॅनलाइन इसका धंधा किया जा सकता है। क्योंकि यह प्रतिबंधित नशीला पदार्थ है। इसलिए इसे आॅनलाइन मंगवाना आसान है क्योंकि इसमें खास तरह के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके डीप नेट और डार्क नेट वेबसाइट के जरिए खास टोर ब्रॉउजेर डाउनलोड करके गूगल में जाकर इन्हें कोई भी ड्रग्स आसानी से मिल जाती थी।

छानबीन से पता चला कि इन गोलियों को ग्रिटिंग कार्ड में छिपाकर नीदरलैंड से भारत भेजा गया था। इसका भुगतान भी आॅनलाइन करंसी बिटकाइन के जरिए किया जाता था। ये वेबसाइट रुपए का भुगतान करके बिटकाइन लेती है और उसके आधार पर इन ड्रग्स को खरीदा जाता था। पुलिस की आंखो में धूल झोंक कर वेबसाइट के जरिए कमल कालरा और महेश ड्रग्स तस्करी के इस धंधे को अंजाम दे रहे थे। राजेश ने पुलिस को बताया कि उन दोनों पर ड्रग्स तस्करी के चार अन्य मामले पहले से ही दर्ज है। पुलिस ने सरकार के सूचना व तकनीक मंत्रालय और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को भी मामले से अवगत करा दिया है। उनसे बिटकाइन के जरिए भुगतान को रद्द करने या रोकने को कहा गया है। पुलिस को अंदेशा है कि इनका नेटवर्क देश के अन्य हिस्सों में भी है। मामले की पड़ताल जारी है।

 

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